06/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 06/20/2026 08:24
जय बाबा तारकनाथ !
हर-हर महादेव !
मंच पर विराजमान राज्यपाल आर. एन. रवि जी, यहां के लोकप्रिय और ऊर्जावान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जी, अन्य सभी महानुभाव और बंगाल के मेरे भाइयों और बहनों।
बाबा तारकनाथ और बंगाल की ये पुण्य भूमि पश्चिम बंग दिवस की ये ऐतिहासिक तारीख और इतनी बड़ी संख्या में आप सभी की उपस्थिति आज चुनाव और शपथ ग्रहण के बाद मुझे पहली बार आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। बंगाल की हवा में अब एक नई ताजगी है, यहां के कण-कण से एक नई खुशबू आ रही है, ऐसा लग रहा है, जैसे बंगाल अब बेड़ियों से आजाद हो गया है। जैसे बंगाल का गौरव लौटने का काम आरंभ हो गया है। आज का ये कार्यक्रम साक्षी है, इन परियोजनाओं का शुभारंभ गवाह है कि हमारा बंगाल अपने नए भविष्य के निर्माण में जुट गया है। बंगाल के लोगों के चेहरों की ये चमक, गाँव-गाँव में खुशी और विश्वास का भाव, मैं आपके इस आनंद में भागीदार बनने के लिए आया हूं। आपका एक वोट, एक चुनाव, कितना कुछ परिवर्तन कर सकता है, ये बंगाल में साफ-साफ नजर आ रहा है।
पोरिबोर्तोन भालो लागछे तो ?
मैं इस अवसर पर बंगाल के लोगों को और सभी देशवासियों को इस आयोजन की, पश्चिम बंग दिवस की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
आज आप सभी की मैं स्वच्छता से स्वागत पहल के लिए भी सराहना करना चाहता हूं, भूरी-भरी प्रशंसा करता हूं। स्वच्छता हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। जहां स्वच्छता होगी, वहीं विकास भी उतना ही सुंदर दिखेगा। मैं आपको स्वच्छता से स्वागत के लिए भी बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
इस बार पश्चिम बंग दिवस की ये तारीख और भी खास है। आज़ादी के बाद बंगाल के उज्ज्वल भविष्य के लिए जो सपना देखा गया था, बंगाल की महान आत्माओं ने जो परिकल्पना की थी, आज एक तरह से पहली बार हम पश्चिम बंग दिवस पर उन सपनों को सच्चाई में बदलते देख रहे हैं। ये ऐतिहासिक तारीख पश्चिम बंगाल के विकास की प्रेरणा बने, हम एक नया और गौरवशाली इतिहास रचें, आज बीजेपी-एनडीए सरकार में इसके लिए विकास के महाअभियान की शुरुआत हो रही है।
साथियों,
बंगाल में दशकों तक पहले लेफ्ट और फिर टीएमसी ने जो गड्ढे बनाए, उन्हें भरने के लिए डबल इंजन सरकार ने सुपर फास्ट स्पीड से काम करना शुरू कर दिया है, बिजली की रफ्तार से फैसले हो रहे हैं, रुकी हुई योजनाओं पर काम आगे बढ़ने लगा है। इसी कड़ी में, आज यहाँ सैकड़ों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। रेल, रोड, कृषि, मछली पालन, इससे जुड़ी ये परियोजनाएं बंगाल के विकास को नई गति देंगी। इन परियोजनाओं से यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मैं बंगाल के लोगों को इन विकास परियोजनाओं की बधाई देता हूं। आज पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त भी जारी की गई है। देशभर के 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में लगभग 19 हजार करोड़ रुपये सीधे भेजे गए हैं। मैं देश के सभी लाभार्थी, मेरे किसान परिवारों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।
साथियों,
गुलामी के दौर में हमारे बंगाल ने क्या-कुछ नहीं सहा, कितने बलिदान दिये, कितने त्याग किए। 1946 में कोलकाता में हुई हिंसा, नोआखली के दंगे, कितने निर्दोष बंगाली मानुष, बंगाल के लोग उसकी भेंट चढ़ गए।
भाइयों-बहनों,
बंगाल ने रक्तपात सहा, बंगाल ने अपनों को खोया, अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखे, लेकिन बंगाल ने अपनी अस्मिता और पहचान को नष्ट नहीं होने दिया। इसी का परिणाम था, जब पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश हो रही थी, तब अलग पश्चिम बंगाल बनाकर उन मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया गया। हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और संस्कृति, यहाँ की मूल आस्था और परंपरा, तब अनेक संघर्षों के बाद बच गए थे। और आज भी वो मूल्य, इस धरती के संस्कार, आज पश्चिम बंगाल के रूप में न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि जीवंत भी हैं। इसलिए, पश्चिम बंग दिवस के रूप में हम केवल एक तारीख को याद नहीं कर रहे हैं, हम पूरे इतिहास को याद कर रहे हैं। हम हजारों साल पुरानी बंगाल की विरासत को नमन कर रहे हैं।
साथियों,
आज की पीढ़ी को हमें बार-बार पश्चिम बंग दिवस की अहमियत बताने की जरूरत है। उस दौरान क्या हो रहा था, ये युवा पीढ़ी को जानना जरूरी है। जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाए जाने की कोशिशें हो रही थीं, तो काँग्रेस उन षड्यंत्रकारियों के सामने घुटने टेके पड़ी थी। और यही वो समय था, जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उसके खिलाफ आवाज़ उठाई। अप्रैल 1947 में उन्होंने ऐतिहासिक resolution पास कराया। उन्होंने घोषणा की, पूरा बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा। इसके लिए बंगाली हिन्दू होमलैंड मूवमेंट शुरू किया गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसका नेतृत्व कर रहे थे। प्रसिद्ध वैज्ञानिक मेघनाद साहा, इतिहासकार आर सी माजूमदार, इतिहासकार जदुनाथ सरकार, सुनीति कुमार चट्टोपाद्ध्याय, बंगाल के ऐसे कितने प्रबुद्ध और प्रसिद्ध लोग इस मूवमेंट का हिस्सा बने। जी-डी बिरला जैसे उद्यमियों ने इसे आगे बढ़ाया। मतुआ लीडर पी-आर ठाकुर ने आगे आकर इस मूवमेंट को समर्थन दिया। अखबारों में लेख लिखे गए, किस्से-कहानियाँ लिखी गईं। वंदेमातरम की भावना को एक बार फिर स्फुरित किया गया। बंगाल की जिस आवाज़ को मजहबी एजेंडों से दबाया जा रहा था, इस जन-आंदोलन से वो स्वर फिर से मुखर हो उठे। इसी का नतीजा था, भारत विरोधी लोगों को ये पता चल गया, पूरे बंगाल को भारत से तोड़ना नामुमकिन होगा। और पश्चिम बंगाल के रूप में ये हिस्सा मां भारती के साथ रह गया।
साथियों,
जिस भावना से पश्चिम बंगाल को बचाया गया था, आज़ादी के बाद उसी भावना पर इसे आगे बढ़ाने की जरूरत थी, लेकिन दुर्भाग्य से ठीक इसके उलट काम हुआ। पश्चिम बंग दिवस और इसकी भावना को भुलाने की कोशिश हुई। सियासी एजेंडों के कारण इतिहास का 'व्हाइट वॉश' किया गया।
भाइयों-बहनों,
विभाजन के समय जो काँग्रेस बंगाल को लावारिस छोड़ना चाहती थी, विभाजन के बाद उसने बचे हुये पश्चिम बंगाल में भी तुष्टीकरण के खेल खेलने शुरू कर दिये। पश्चिम बंगाल के इस इतिहास को दबाया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक बने, इसलिए उनके योगदान को नकारा गया। जिस भावना को लेकर उन्होंने बंगाल के लिए लड़ाई लड़ी थी, उस विचार को भी खत्म करने की कोशिशें होती रहीं। गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसे, जिस धरती का ऐसी महान संतानों से नाता रहा हो, उस पर विदेशी विचारधारा थोपी गई। पहले काँग्रेस, फिर लेफ्ट, फिर टीएमसी, दशकों तक पश्चिम बंगाल को सहेजने और सँवारने की जगह, इसे अवैध घुसपैठियों का अड्डा बनने दिया गया। जो बंगाल भारत के विकास का नेतृत्व कर सकता था, वो आगे बढ़ने की जगह पिछड़ता चला गया।
साथियों,
आज पश्चिम बंग दिवस पर हमारा कर्तव्य है, हम संकल्प लें, अब इतिहास की वो गलतियां दोहराई नहीं जाएंगी। अब पश्चिम बंग दिवस से प्रेरणा लेकर नया इतिहास रचा जाएगा।
साथियों,
दशकों के कुशासन ने पश्चिम बंगाल को मीलों पीछे पहुंचा दिया है। आप सबने देखा है, पुरानी सरकारों के समय में कैसे हालात हो गए थे? यहाँ से बड़े उद्योगों का पलायन हुआ, छोटे उद्योग धंधे ठप्प पड़ते चले गए, युवाओं का रोजगार छिनता गया, संसाधनों पर घुसपैठियों का कब्जा होता चला गया। जो पश्चिम बंगाल कभी अवसरों की भूमि होती थी, वो पलायन का केंद्र बनती चली गई। इसी माहौल में आपने एक संकल्प लिया, टीएमसी सरकार को पलटने का, उसे हटाने का। आपने बीजेपी को आशीर्वाद दिया, रिकॉर्ड सीटों के साथ हमें विजयी बनाया और आज पूरा देश देख रहा है, कैसे तुरंत ही इसका नतीजा भी बंगाल को मिलने लगा है। जिन अधिकार से आपको बरसों तक दूर रखा गया, आज वो हक आपके द्वार तक पहुंच रहा है। मैंने चुनाव के समय आपको आयुष्मान भारत योजना की गारंटी दी थी, अब बंगाल के हर गरीब को आयुष्मान भारत का लाभ मिलना तय हो गया है। माताओं-बहनों को अन्नपूर्णा योजना का सीधा लाभ मिलना शुरू हो गया है। हर घर स्वच्छ पानी पहुंचे, इसके लिए भी पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच जल जीवन मिशन को लेकर MoU साइन हो गया है। हमने चुनाव के समय बंगाल के युवाओं से वादा किया था, वो वादा पूरा करते हुये, नौकरियों में आयु की सीमा में ढील दी गई है। महिलाओं को फ्री बस यात्रा का वादा भी पूरा हो चुका है।
साथियों,
सालों-साल राजनीतिक दुश्मनी में जिन योजनाओं को रास्ते में ही अटकाया गया, लटकाया गया, आज उन सारी बंदिशों को तोड़कर जनकल्याण शिविरों के जरिए हर सरकारी योजना का लाभ सीधे आप तक पहुंचाया जा रहा है। अब कोई बिचौलिया नहीं, कोई रुकावट नहीं, सिर्फ आपके अधिकार पर फोकस है, बंगाल के विकास पर फोकस है, बंगाल और देश की सुरक्षा पर फोकस है। आपने देखा होगा, सीमा पर फेंसिंग के लिए पिछली सरकारों ने जमीन ट्रांसफर का जो काम दशकों से रोक रखा था, नई सरकार बनते ही वो काम भी पूरा करने का काम शुरू हुआ है।
भाइयों-बहनों,
मुझे खुशी है कि पश्चिम बंगाल में औद्योगिक प्रगति की नींव फिर से बननी शुरू हो गई है। इस नींव के दो अभिन्न अंग हैं- ईमानदार और पारदर्शी शासन! और दूसरा- कानून का राज! पश्चिम बंगाल ही नहीं, पूरा देश आज इस बदलाव को देख रहा है। जिन्होंने आपको लूटा, वो खुद आकर लूट के पैसे लौटा रहे हैं। बड़े-बड़े लुटेरों को जेल भेजा जा रहा है। सिंडीकेट वाले जनता से माफी मांग रहे हैं। टोल नाकों पर अवैध वसूली करने वाले गुंडे नाके छोड़कर भाग गए हैं। बंगाल के लोग बिना रोक-टोक के आ-जा रहे हैं। एखोन काटमानी शेष, काज शुरू होए गेछे।
साथियों,
जो बंगाल अभी तक खराब सड़कों और खस्ताहाल इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझ रहा था, वहाँ अब वर्षों से लटके-अटके प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ने लगे हैं। आप देखिए, चिंगरीघाटा क्रॉसिंग पर कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन का रुका हुआ काम पूरा भी हो गया है। हावड़ा में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से नए डिवीजनल रेलवे अस्पताल की नींव भी रखी गई है। यहां इमरजेंसी सेवाएँ होंगी और गंभीर बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। पूर्व मेदिनीपुर में हौर और राधामोहनपुर के बीच रोड ओवर ब्रिज, संकरैल-संतरागाछी लिंक लाइन, ऐसे प्रोजेक्ट से यहां के लोगों को सुविधा होने वाली है।
साथियों,
आज पीएम किसान सम्मान निधि के तहत देशभर के 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में पैसे भेजे गए हैं, और पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए एक और खुशी की खबर है। आज से राज्य में पीएम फसल बीमा योजना शुरू की जा रही है। फसल बीमा योजना मुश्किल समय में किसान के परिवार को सहारा देगी। फसल को नुकसान होने पर किसान पर बोझ नहीं पड़ेगा।
साथियों,
अब पश्चिम बंगाल डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से भी जुड़ रहा है, एग्री-स्टैक के माध्यम से किसान रजिस्ट्री बनेगी। गाँवों के नक्शे और बोई गई फसल की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी। खाद की खरीद, किसान क्रेडिट कार्ड, डीबीटी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जैसी सेवाओं में इससे आसानी होगी।
साथियों,
कृषि क्षेत्र में जो सबसे पिछड़े जिले हैं, उन्हें आगे लाने के लिए सरकार ने पीएम धन-धान्य कृषि योजना शुरू की है। इसमें पश्चिम बंगाल के चार जिले- पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झाड़ग्राम शामिल हैं। इन जिलों में खेती की उत्पादकता बढ़ाने, स्टोरेज की सुविधा बनाने और किसानों के लिए लोन आसान करने पर काम होगा। बंगाल में मछली पालन से किसान, मछुआरे, व्यापारी सब जुड़े हैं। इसलिए, दक्षिण 24 परगना के फ्रेसरगंज फिशिंग हार्बर की क्षमता बढ़ाई गई है। बीरभूम में आधुनिक फिश मार्केट बनाने का भी काम हुआ है। अब बंगाल थमेगा नहीं, बंगाल अब इतिहास रचेगा, एबार बांग्ला थामबे ना एखोन इतिहास गोरबे।
साथियों,
आज इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों के लाखों किसान साथी भी जुड़े हुए हैं, वहां के मुख्यमंत्री, गवर्नर भी जुड़े हुए हैं, देशभर की सरकारों के मंत्री भी जुड़े हुए हैं। इसके साथ-साथ लाखों किसान भी आज हमारे इस दिवस को मनाने में, वो वहां भी भागीदार बने हैं। ये सभी किसान पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थी हैं। आज अपने इन सभी किसान भाइयों-बहनों से मैं एक आग्रह भी करना चाहता हूं, और मेरे किसान भाई-बहन मेरी बात को जरा गौर से सुनिए, मैं आपको हाथ जोड़के विनती कर रहा हूं, क्योंकि हमें अपने बच्चों को बर्बाद होते खेत नहीं देने हैं, हमें अपने बच्चों को उपजाऊ खेत देने हैं, हमें, हमारी इस धरती माता को बचाना है। इस समय भारत सरकार खेत बचाओ अभियान चला रही है, इसके तहत मिट्टी की सेहत बचाने, केमिकल खाद का इस्तेमाल कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। आप भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में खेत बचाओ अभियान से जुड़ें, खुद का खेत बचाने का संकल्प करें। आसपास के किसानों को खेत बचाने के लिए प्रेरित करें और हम सब मिलकर हमारी इस धरती मां की रक्षा करें, वो हमारी मां है, हम केमिकल से हमारी मां को मारने का पाप नहीं कर सकते हैं। हमें, हमारी इस धरती मां को बचाना होगा।
साथियों,
भारत 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। विकसित भारत के इस संकल्प का सबसे बड़ा आधार है- पूर्वी भारत का विकास! इसके लिए हम मिशन पूर्वोदय पर काम कर रहे हैं। इसमें बंगाल की भूमिका बहुत बड़ी है। बंगाल की प्रगति से पूर्वी भारत की गति बढ़ेगी।
भाइयों-बहनों,
विकास के इस अभियान में हमें एक और बात का ध्यान रखना है, विकास की पहली शर्त है, जिसे हमें कभी भूलना नहीं है, और वो है- शांति, सौहार्द और सामाजिक स्थिरता! हमें बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने को और मजबूती देनी है। हमें सबको साथ लेकर चलना है।
साथियों,
कल देश और दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। इस बार मैं बंगाल में ही योग दिवस का हिस्सा बनूँगा। स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद जैसे योगियों की ये भूमि, यहाँ से जो संदेश जाएगा, उससे पूरे विश्व का मार्गदर्शन होगा। मैं चाहूँगा, इस बार बंगाल और कोने-कोने में योग दिवस के आयोजन हों। आप सब योग करें, योग दिवस का हिस्सा बनें, इसी अनुरोध के साथ मैं एक बार फिर आप सभी को विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आज जब हम उत्साह और उमंग के साथ पश्चिम बंगाल दिवस मना रहे हैं, तो मेरा आप सबसे आग्रह है, अपना मोबाइल फोन निकालिए, अपने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट चालू कीजिए और हम सब मिलकर के आज ये बंग दिवस मनाएं, सबके मोबाइल फोन की लाइट चालू हो, मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।
वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम।
वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम।
वंदे मातरम।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
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MJPS/SS/ST/RK