Amar Ujala Ltd

09/15/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/15/2026 12:26

फास्टैग के लिए OneTag सुविधा क्या है?: बिना टैग बदले अपना फास्टैग बैंक कैसे बदलें?, जानिए इस नई सर्विस की पांच खास बातें


विंडस्क्रीन पर लगे एक छोटे से स्टिकर फास्टैग (FASTag) ने भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि, अब तक अपने फास्टैग से जुड़े बैंक को बदलना वाहन मालिकों के लिए काफी पेचीदा काम रहता था। केंद्र सरकार और एनएचएआई (NHAI) द्वारा शुरू की गई नई वनटैग (OneTag) सुविधा इसी समस्या का समाधान करती है। इस पोर्टेबिलिटी सर्विस के जरिए यूजर्स अपनी गाड़ी पर लगे मौजूदा फास्टैग स्टिकर को हटाए बिना ही, इसे जारी करने वाले अपने बैंक को बदल सकते हैं।

Toll plaza - फोटो : Adobe Stock

OneTag की कार्यप्रणाली से जुड़ी 5 मुख्य बातें क्या हैं?

फास्टैग पोर्टेबिलिटी की इस नई व्यवस्था को समझने के लिए ये 5 प्रमुख बातें जानना जरूरी हैं:
  • पुराना स्टिकर ही रहेगा जारी: बैंक बदलने के बाद भी वाहन मालिक को गाड़ी की विंडस्क्रीन से फास्टैग स्टिकर हटाने की जरूरत नहीं होगी। टैग आईडी और वाहन पंजीकरण विवरण पहले जैसा ही रहेगा।
  • मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी जैसी व्यवस्था: OneTag ठीक उसी सिद्धांत पर काम करता है जैसे लोग बिना नंबर बदले अपनी टेलीकॉम कंपनी (SIM) बदलते हैं। बैकएंड रिकॉर्ड अपडेट होने के बाद जारीकर्ता बैंक बदल जाता है।
  • पोर्टिंग और पेमेंट की प्रक्रिया: यूजर्स एनएचएआई के 'राजमार्ग यात्रा' (RajmargYatra) एप के जरिए पोर्टेबिलिटी का लाभ उठा सकते हैं। इस दौरान टोल कलेक्शन का काम पहले की तरह एनईटीसी (NETC) इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ही होता रहेगा।
  • मौजूदा बैलेंस का क्या होगा?: बैंक बदलने से पुराना वॉलेट बैलेंस नए बैंक में ट्रांसफर नहीं होगा। पुराने फास्टैग का बचा हुआ बैलेंस, रिफंड या पेंडिंग ट्रांजेक्शन की जिम्मेदारी पहले वाले बैंक की ही रहेगी।
  • बैंक बदलने की आजादी: अगर यूजर अपने मौजूदा बैंक की सेवाओं से असंतुष्ट हैं या किसी अन्य बैंक का ऑफर पसंद करते हैं, तो वे आसानी से प्रदाता बदल सकते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नया बैंक ऑनबोर्डिंग और अकाउंट सर्विसेज की जिम्मेदारी संभाल लेगा।

Toll plaza - फोटो : Adobe Stock

डिजिटल टोल कलेक्शन में फास्टैग कैसे काम करता है?

  • फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर काम करता है। यह स्टिकर वाहन की विंडस्क्रीन पर चिपकाया जाता है और यूजर के प्रीपेड वॉलेट या बैंक खाते से जुड़ा होता है।
  • जब वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, तो टोल टैक्स अपने आप कट जाता है। इससे टोल प्लाजा पर रुकने का समय बचता है, गाड़ियों के खड़े रहने से होने वाली ईंधन की खपत कम होती है और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिलता है। बिना वैध फास्टैग के टोल प्लाजा से गुजरने पर दो गुना टोल टैक्स देना अनिवार्य है।

Toll plaza - फोटो : Adobe Stock

राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन सुरक्षा को कैसे बेहतर बनाया जा रहा है?

सड़क दुर्घटनाओं और आपातकालीन स्थितियों में तेजी से मदद पहुंचाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अपनी '1033 नेशनल हाईवे हेल्पलाइन' को अपग्रेड करने जा रहा है। इस आधुनिकीकरण के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग और ऑटोमेटेड डिस्पैच सिस्टम को जोड़ा जाएगा, ताकि यात्रियों को त्वरित और सटीक सहायता मिल सके।
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