10/06/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/06/2026 07:07
Link Copied
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की संभावित पब्लिक लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर गहरे मतभेद सामने आए हैं। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टियों ने साथी ट्रस्टियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमजोर करने और न्यासी दायित्वों का उल्लंघन करने का आरोप है। यह घटनाक्रम टाटा संस की स्वामित्व संरचना और उसकी सूचीबद्धता की स्थिति को लेकर बढ़ती बहस को दर्शाता है।
वरिष्ठ ट्रस्टियों ने कहा कि जुलाई 2025 के प्रस्तावों को कभी वापस नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने अपनी राय बदली। उन्होंने इसे ट्रस्टियों के समक्ष सामूहिक चर्चा के लिए नहीं रखा। पूर्व निर्णयों की पुनर्समीक्षा की मांग करने के बजाय, उन्होंने सार्वजनिक रूप से सूचीबद्धता का समर्थन किया। पत्र में कहा गया है कि ऐसे सार्वजनिक बयान ट्रस्ट्स के आधिकारिक निर्णयों को कमजोर करते हैं। ये बयान टाटा संस की आरबीआई के समक्ष लंबित प्रक्रियाओं और आवेदनों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
वरिष्ठ ट्रस्टियों ने 28 सितंबर को एक प्रस्ताव का उल्लेख किया है। इसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के टाटा संस में विलय का सुझाव दिया गया था। इसे एक संभावित विकल्प माना गया है। यह कंपनी को आरबीआई के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) संबंधी मानदंडों को पूरा करने में मदद कर सकता है। इससे सार्वजनिक सूचीबद्धता का रास्ता अपनाने से बचा जा सकता है। टाटा संस के बोर्ड ने ट्रस्ट्स से केवल सूचीबद्धता विकल्प पर विचार करने के बजाय सभी उपलब्ध विकल्पों की जांच करने को कहा था।
ट्रस्टियों ने पत्र में बताया कि उन्होंने वही किया जिसकी अपेक्षा टाटा संस के बोर्ड ने उनसे की थी। उन्होंने सार्वजनिक सूचीबद्धता के विकल्पों के अलावा अन्य संभावित रास्तों की तलाश की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा संस के सामने आरबीआई से जुड़े नियामकीय मुद्दों के समाधान का प्रश्न बना हुआ है। इसी संदर्भ में यह बहस तेज हुई है कि कंपनी को गैर-सूचीबद्ध ही रखा जाए या फिर सार्वजनिक सूचीबद्धता की दिशा में कदम बढ़ाया जाए।