Amar Ujala Ltd

09/16/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/15/2026 16:25

यूपीआई को लेकर आरबीआई का बड़ा प्लान: शुल्क से मिलने वाले पैसे से तकनीक और नेटवर्क होगा मजबूत; क्या बदलेगा

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यूपीआई को लेकर आरबीआई का बड़ा प्लान: शुल्क से मिलने वाले पैसे से तकनीक और नेटवर्क होगा मजबूत; क्या बदलेगा?

Wed, 16 Sep 2026 01:39 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 16 Sep 2026 01:39 AM IST
सार

2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर 15 अक्तूबर से 0.4 फीसदी शुल्क लगेगा, लेकिन ग्राहकों से पैसा नहीं लिया जाएगा। आरबीआई का कहना है कि इस शुल्क से यूपीआई में तकनीक और बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ेगा। तो क्या इस बदलाव से यूपीआई और ज्यादा मजबूत हो पाएगा? पढ़िए रिपोर्ट

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UPI - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा कि बड़े मूल्य वाले यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करना अहम कदम है। इससे भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली लंबे समय तक मजबूत रहेगी। 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 0.4 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
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आरबीआई ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, 'इससे यूपीआई आगे बढ़ सकेगा। नई सुविधाएं आ सकेंगी। इससे देशभर में ग्राहकों और कारोबारियों को सेवा देने में मदद मिलेगी।'
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छह साल से पूरी तरह मुफ्त था यूपीआई भुगतान
करीब छह साल से यूपीआई भुगतान पूरी तरह मुफ्त था। अब इसमें बदलाव किया गया है। सरकार ने मंगलवार को 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। यह शुल्क कारोबारियों को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर लगेगा। यह नियम 15 अक्तूबर से लागू होगा। हालांकि, ग्राहकों को यह शुल्क नहीं देना होगा। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। छोटे भुगतान भी शुल्क से बाहर रहेंगे।
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वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा, ग्राहकों को यूपीआई के जरिये ऐसे भुगतान करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। मंत्रालय ने यह बात भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की मंगलवार को जारी अधिसूचना के हवाले से कही। मंत्रालय ने एक और बात साफ की। एमडीआर ग्राहकों से लिया जाने वाला शुल्क नहीं है। यह कारोबारियों के बीच होने वाली भुगतान व्यवस्था में लिया जाने वाला शुल्क है।

आरबीआई ने क्या कहा?
आरबीआई ने कहा कि एमडीआर की रकम उचित तरीके से बांटी जानी चाहिए। इसमें भुगतान प्रणाली से जुड़े सभी पक्ष शामिल होंगे। इससे तकनीक में निवेश जारी रखने में मदद मिलेगी। बुनियादी ढांचे में भी निवेश हो सकेगा। भुगतान स्वीकार करने वाले नेटवर्क को भी मजबूत किया जा सकेगा।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि इससे ज्यादा जगहों पर यूपीआई स्वीकार किया जा सकेगा। इससे ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। लेनदेन की संख्या भी बढ़ सकती है। इससे यूपीआई का लगातार विकास हो सकेगा। आरबीआई ने खास तौर पर कहा कि सभी यूपीआई लेनदेन उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) के लिए मुफ्त रहेंगे। इसमें व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान शामिल है। इसमें व्यक्ति से कारोबारी भुगतान भी शामिल है।

ये भी पढ़ें: यूपीआई का नया नियम: 15 अक्तूबर से 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4% शुल्क, लेकिन इसका भार कारोबारियों पर

कारोबारियों के लिए भी 2,000 रुपये से कम के व्यक्ति से कारोबारी भुगतान मुफ्त रहेंगे। आरबीआई ने कहा, आरबीआई यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि यूपीआई सुरक्षित, आसान, सस्ता और सभी के लिए उपलब्ध रहे। आरबीआई ने कहा कि वह डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत बनाने के लिए काम करता रहेगा। इसके विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।

यूपीआई का संचालन एनपीसीआई करता है। यह आरबीआई और भारतीय बैंक संघ की पहल है। यूपीआई लोगों के बीच तुरंत भुगतान की सुविधा देता है। इसके जरिये ग्राहक खरीदारी के समय सीधे कारोबारियों को भुगतान कर सकते हैं।

यूपीआई किन देशों में स्वीकार किया जाता है?
विदेश में भी यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। अब 11 देशों में यूपीआई स्वीकार किया जाता है। उज्बेकिस्तान इस सूची में सबसे नया देश है। यूपीआई स्वीकार करने वाले दूसरे देशों में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस शामिल हैं।

10 साल में कितना बढ़ा डिजिटल लेनदेन?
यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को हुई थी। इसके बाद इसने भारत के डिजिटल भुगतान का तरीका बदल दिया। वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई लेनदेन का मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी एक दशक में यूपीआई लेनदेन के मूल्य में 4,000 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 16, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 15, 2026 at 22:26 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]