02/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/11/2026 00:27
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित साझा किया:
"यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।
यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"
इसमें कहा गया है कि जिस राष्ट्र की महिमा का वर्णन स्वयं हिमालय करता है, जिसकी कीर्ति नदियों के साथ समुद्र तक प्रवाहित होती है और जिसकी भुजाओं के समान दिशाएं उसे नमन करती हैं, उस राष्ट्र को हम अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।
श्री मोदी ने कहा कि अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भी इसी भावना के साथ अपना संपूर्ण जीवन देश के हर नागरिक को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया था।
प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा:
"सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।
यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"
सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।
यस्येमाः… pic.twitter.com/VPMkqiLWiq
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