Amar Ujala Ltd

09/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/24/2026 19:45

बीमा खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: कमीशन पर कैंची चलाने की तैयारी में आईआरडीएआई, क्या सस्ती होगी पॉलिसी

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बीमा खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: कमीशन पर कैंची चलाने की तैयारी में आईआरडीएआई, क्या सस्ती होगी पॉलिसी?

Fri, 25 Sep 2026 05:31 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 25 Sep 2026 05:31 AM IST
सार

आईआरडीएआई के प्रस्तावित बदलावों से लाइफ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस और बैंकाश्योरेंस में कमीशन की मौजूदा व्यवस्था बदल सकती है। कमीशन की सीमा घटने और भुगतान को पॉलिसी अवधि में फैलाने से डिस्ट्रीब्यूशन लागत पर असर पड़ सकता है। इसका फायदा भविष्य में ग्राहकों को कम प्रीमियम के रूप में मिल सकता है, हालांकि इसका अंतिम प्रभाव नए नियमों के लागू होने और बीमा कंपनियों व डिस्ट्रीब्यूटरों के व्यवहार पर निर्भर करेगा।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

आपने कभी सोचा है कि आप जो बीमा पॉलिसी खरीदते हैं, उसका प्रीमियम इतना ज्यादा क्यों होता है? इसका एक बड़ा कारण छिपा हुआ कमीशन होता है, जो बीमा कंपनियां बैंक, ब्रोकर और एजेंटों को देती हैं। बीमा नियामक इरडा ने अब इस व्यवस्था को बदलने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

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कमीशन की सीमा तय करने की तैयारी
नियामक ने कमीशन में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, लाइफ इंश्योरेंस के लिए बैंकों और ब्रोकरों के लिए पहले साल के प्रीमियम का कमीशन, जो कई उत्पादों में 40% से ज्यादा था, उसे घटाकर 5 से 20% के बीच किया जा सकता है। साथ ही, भारी-भरकम शुरुआती भुगतान के बजाय इसे पॉलिसी की अवधि में फैलाने का प्रस्ताव है।
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क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
नियामक के आंकड़े बताते हैं कि डिस्ट्रीब्यूटरों का मुआवजा वास्तविक बिजनेस की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने केवल कमीशन के रूप में 60,800 करोड़ रुपये चुकाए, जो कि 18% की वृद्धि है। जबकि प्रीमियम में बढ़ोतरी महज 6.73 फीसदी ही रही। भारत दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार है, लेकिन वैश्विक औसत के मुकाबले यहां बीमा की पहुंच अभी भी काफी कम है। इसी असंतुलन को दूर करने और बाजार को पारदर्शी बनाने के लिए ये नए नियम लाए जा रहे हैं।
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बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर बढ़ेगा दबाव?
विश्लेषकों के मुताबिक, इस बदलाव से सबसे ज्यादा दबाव उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर आएगा जो बैंकाश्योरेंस (बैंकों के जरिये बीमा बेचना) के दम पर मोटा मुनाफा कमाते हैं। इसके अलावा, डीलर-लिंक मोटर ब्रोकर और वे बीमा कंपनियां जो पूरी तरह बैंक-केंद्रित सेल्स मॉडल पर निर्भर हैं, उनके कारोबार में कमी आ सकती है।

मोटर इंश्योरेंस के कमीशन पर भी बड़ा बदलाव
मोटर व्हीकल इंश्योरेंस में नए वाहनों के अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर बीमा पर मिलने वाला 25 से 50 फीसदी तक का कमीशन पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। पुराने वाहनों के नवीनीकरण पर भी बहुत सीमित भुगतान की अनुमति होगी।

ग्रामीण इलाकों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन
ग्रामीण व छोटे कस्बों में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए इन दरों पर 10 फीसदी से 20 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

क्या ग्राहकों के लिए सस्ता हो सकता है बीमा?
कमीशन सीधे तौर पर प्रीमियम के भीतर छिपा होता है, इसलिए वितरण लागत घटने से भविष्य में पॉलिसियां सस्ती हो सकती हैं।

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बैंक नहीं थोप सकेंगे बीमा
नए नियमों के तहत बैंक ग्राहकों को लोन देने के लिए बीमा खरीदने को बाध्य नहीं कर सकेंगे। यदि कोई बैंक बीमा के साथ कम ब्याज दर का ऑफर देता है, तो उसे दोनों दरें साफ बतानी होंगी और ग्राहक को किसी भी अन्य कंपनी से बीमा चुनने की पूरी आजादी देनी होगी। इससे मिस-सेलिंग पर लगाम लगेगी।
Amar Ujala Ltd published this content on September 25, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 25, 2026 at 01:45 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]