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07/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/25/2026 05:50

Khabaron Ke Khiladi: चुनावी राज्यों में कितना असरदार होगा छात्रों का मुद्दा? विश्लेषकों से समझें

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Khabaron Ke Khiladi: चुनावी राज्यों में कितना असरदार होगा छात्रों का मुद्दा? विश्लेषकों से समझें

Sat, 25 Jul 2026 05:13 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 25 Jul 2026 05:13 PM IST
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अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। इन चुनावों में बीते डेढ़ महीने से ज्यादा समय से जारी छात्रों के आंदोलन का कितना असर होगा। इस विषय पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, सुनील शुक्ल और पूर्णिमा त्रिपाठी मौजूद रहीं।
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रामकृपाल सिंह: जिस तरह से अखिलेश ने संसद में कहा कि क्या कांग्रेस मिल गई है। जिस तरह से राहुल गांधी जंतर-मंतर नहीं गए। ये सब आगामी चुनाव पर असर डालेगा। विपक्ष कितनी सहानभूति ले पाता है। इंडिया गठबंधन जब से बना तब से इस गठबंधन के दल चुनाव के वक्त साथ में लड़ते हैं और चुनाव के बाद एक दूसरे से लड़ते दिखाई देते हैं। मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे का आगामी चुनाव में विपक्ष बहुत लाभ उठा पाएगा।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: INDIA नाम का कोई गठबंधन बचा ही नहीं है। अहम ये है कि आगामी चुनाव में क्या कांग्रेस और सपा साथ में मिलकर लड़ सकते हैं। अगर साथ नहीं लड़ेंगे तो मुझे नहीं लगता कि भाजपा को उत्तर प्रदेश में दोनों अलग-अलग रोक सकने की स्थिति में हैं। कांग्रेस जानबूझकर आम आदमी पार्टी से दूरी बनाने की कोशिश कर रही है। क्योंकि पंजाब में उसे आम आदमी पार्टी के खिलाफ लड़ना है।

सुनील शुक्ल: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे। INDIA गठबंधन की बात जहां तक है तो उसका गठन ही लोकसभा चुनाव के लिए हुआ था। दोनों दल उत्तर प्रदेश का चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे इसकी दूर-दूर तक कोई संभावना मुझे नहीं दिखाई देती है। विपक्ष के पास छात्रों के मुद्दे पर साथ रहने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है। जो इससे अलग होने की कोशिश करेगा वो हशिए पर चला जाएगा। बसपा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
विनोद अग्निहोत्री: दो तरह की एकता होती है। एक संघर्ष की एकता और दूसरी सत्ता की एकता। एनडीए की एकता सत्ता की एकता है। विपक्ष की मजबूरी है कि संघर्ष की एकता में साथ रहना। जो विपक्षी दल संघर्ष की एकता में साथ नहीं आते हैं वो हाशिए पर चले जाते हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच में छात्रों के मुद्दे पर एकता बनी हुई है। पेंच फंसेगा सीटों का। मुझे उम्मीद है कि वो भी आखिरी में हल हो जाएगा।
Amar Ujala Ltd published this content on July 25, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 25, 2026 at 11:50 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]