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08/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/24/2026 10:40

पुणे में 10 दिन से भूख हड़ताल पर आदिवासी छात्र: राहुल गांधी ने फडणवीस को लिखा पत्र, उठाए किन नियमों पर सवाल

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पुणे में 10 दिन से भूख हड़ताल पर आदिवासी छात्र: राहुल गांधी ने फडणवीस को लिखा पत्र, उठाए किन नियमों पर सवाल?

Mon, 24 Aug 2026 09:57 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 24 Aug 2026 09:57 PM IST
सार

पुणे के सरकारी आदिवासी छात्रावासों में रह रहे छात्रों की समस्याओं को लेकर राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने छात्रों से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनने और समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। छात्रों ने शिक्षा, छात्रावास सुविधाओं, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार और आरक्षण से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं।

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लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर सरकारी आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों के आदिवासी छात्र पिछले 10 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
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राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि पुणे में छात्रों ने उन्हें उन नियमों के बारे में बताया, जिनसे उनकी गरिमा प्रभावित हो रही है और शिक्षा का रास्ता भी बाधित हो रहा है। उन्होंने फडणवीस से प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने और तत्काल समाधान करने का अनुरोध किया।
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राहुल गांधी ने सीएम फडणवीस से की क्या मांग?
कांग्रेस सांसद ने सीएम फडणवीस को संबोधित करते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ''महाराष्ट्र के अनेक आदिवासी छात्र 10 दिनों से अधिक से अपने अधिकारों के लिए भूख हड़ताल पर हैं। पुणे में 'छात्रों की गूंज' के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावासों में 30 वर्ष की अनावश्यक उम्र सीमा, अपमानजनक नियम, असुरक्षित सुविधाएं और महिलाओं के लिए गर्भावस्था जांच जैसे अमानवीय प्रावधान लागू हैं।''
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उन्होंने कहा, ''सुदूर गांवों-कस्बों से आने वाले ये छात्र कोई दान नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं। अपेक्षा है कि आप उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करेंगे।''

कांग्रेस सांसद ने किन नियमों पर उठाए सवाल?
राहुल गांधी ने कहा कि कई आदिवासी छात्र दूरदराज के गांवों से आते हैं और शहरों में पढ़ाई के लिए सरकारी छात्रावासों पर निर्भर हैं। नए नियम के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को इन छात्रावासों में प्रवेश नहीं मिल सकता। इससे ऐसे कई छात्र प्रभावित हो रहे हैं, जो अभी अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं या परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं।

राहुल गांधी ने छात्रावासों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई छात्रावास असुरक्षित हैं और वहां भोजन, स्वच्छता तथा चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। छात्रों को सांप के काटने जैसी घटनाओं में चोट और मौत का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि महिला छात्रों के लिए सुविधाओं की स्थिति और भी खराब है।

राहुल गांधी ने महिला छात्रों से जुड़े एक नियम पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बाद लौटने वाली छात्राओं को गर्भावस्था परीक्षण समेत कई तरह की मेडिकल जांच से गुजरना पड़ता है। उन्होंने इसे छात्राओं की गरिमा और मानवता पर हमला बताया।

छात्रों ने राहुल गांधी को सौंपा 11 सूत्रीय मांगपत्र
पुणे के सरकारी आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी 11 प्रमुख मांगें रखी गई हैं।
  • ज्ञापन में 5 अगस्त 2026 और 14 अगस्त 2026 को जारी सरकारी प्रस्तावों को रद्द करने तथा 11 नवंबर 2011 के सरकारी प्रस्ताव को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट करने की मांग की गई है।
  • छात्रों ने छात्रावास में प्रवेश की 30 वर्ष की उम्र सीमा हटाने या इसे बढ़ाकर 36 वर्ष करने की मांग भी की है।
  • छात्रों ने जिला स्तर के सरकारी आदिवासी छात्रावासों को शहरों में ऐसे स्थानों पर बनाने की मांग की है, जहां शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों, अस्पतालों और सार्वजनिक परिवहन तक आसानी से पहुंच हो।
  • ज्ञापन में आदिवासी आश्रम स्कूल या सरकारी छात्रावास में किसी छात्र की मौत होने पर परिवार को एक करोड़ रुपये, स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 50 लाख रुपये और गंभीर चोट लगने पर 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है।
  • छात्रों ने आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित 95,000 पदों को फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए हासिल किए जाने का आरोप लगाते हुए इन्हें सुरक्षित करने की मांग की है।
  • इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार लंबित 12,500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल पूरी करने की मांग की गई है।
  • फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में की गई है।
  • छात्रों ने कहा है कि सेवा में नियुक्ति के छह महीने के भीतर जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा नहीं करने वाले कर्मचारियों पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाए और उनकी सेवाएं समाप्त की जाएं।

डीबीटी की जगह सीधे भोजन देने की मांग
छात्रों ने जिला स्तर के सरकारी आदिवासी छात्रावासों में लागू डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) आधारित भोजन व्यवस्था खत्म कर सीधे भोजन उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही आदिवासी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों में सर्पदंश की घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त एंटी-स्नेक वेनम और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

ज्ञापन में निर्धारित प्रक्रिया के तहत PESA भर्ती के जरिए नियुक्त किए गए और बाद में सेवा से हटाए गए कर्मचारियों के मामलों पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है। छात्रों ने आदिवासी आश्रम स्कूलों और सरकारी छात्रावासों में लागू सेंट्रल किचन व्यवस्था को खत्म कर संबंधित संस्थानों में ताजा, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है।

छात्रों ने की और क्या मांग?
इसके अलावा महाराष्ट्र के आदिवासी एवरेस्ट पर्वतारोहियों को सरकार की ओर से सम्मानित करने और विशेष नीति के तहत सरकारी नौकरी के अवसर देने की मांग की गई है। इसके लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 1 फरवरी 2018 के एक फैसले में दिए गए निर्देशों और टिप्पणियों पर भी विचार करने का आग्रह किया गया है।

छात्र प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मांग की है कि वे इन मुद्दों को संबंधित अधिकारियों और सरकार के समक्ष उठाएं। साथ ही छात्र प्रतिनिधियों के साथ तत्काल बैठक कराने और मांगों पर संबंधित अधिकारियों से ठोस निर्णय तथा लिखित आश्वासन दिलाने में सहयोग करने का अनुरोध किया है।
Amar Ujala Ltd published this content on August 24, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 24, 2026 at 16:41 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]