Amar Ujala Ltd

08/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/21/2026 05:19

AI: दो युवा टेक विशेषज्ञों ने बनाई 'मानव-प्रथम' तकनीक, दावा- मशीन नहीं करेगी अंतिम फैसला

{"_id":"6a882e8586d4e6eab605315c","slug":"ai-young-innovators-develop-human-first-tech-say-machines-will-not-make-the-final-decision-2026-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"AI: दो युवा टेक विशेषज्ञों ने बनाई 'मानव-प्रथम' तकनीक, दावा- मशीन नहीं करेगी अंतिम फैसला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}

AI: दो युवा टेक विशेषज्ञों ने बनाई 'मानव-प्रथम' तकनीक, दावा- मशीन नहीं करेगी अंतिम फैसला

Fri, 21 Aug 2026 04:25 PM IST
एन अर्जुन अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता।
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता। Published by: एन अर्जुन Updated Fri, 21 Aug 2026 04:25 PM IST
सार

कोलकाता के सत्यव्रत और हैदराबाद के नवीन बाबू गरिकपाटी ने 'हिमिररली' नाम की एक नई तकनीक विकसित की है। इसका मूल विचार मशीन को इंसान के ऊपर नहीं, बल्कि इंसान की मदद के लिए इस्तेमाल करना है।

विज्ञापन
नवीन बाबू गरिकपाटी और सत्यव्रत निराला। - फोटो : अमर उजाला
  • Link Copied

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

यह खबर एप पर पढ़ें

या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

संक्षिप्त विज्ञापन देखें विज्ञापन लोड हो रहा है

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

लॉगिन करें

विस्तार

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानि एआई के दौर में दुनिया मशीनों को लगातार अधिक सक्षम और निर्णायक बनाने की दौड़ में है। इसी बीच भारत के दो युवा तकनीकी नवोन्मेषकों ने इससे अलग सोच के साथ नई तकनीक विकसित करने का दावा किया है।

विज्ञापन


कोलकाता के सत्यव्रत निराला और हैदराबाद के नवीन बाबू गरिकपाटी ने 'हिमिररली' नाम की एक नई तकनीक विकसित की है। इसका मूल विचार मशीन को इंसान के ऊपर नहीं, बल्कि इंसान की मदद के लिए इस्तेमाल करना है। नवोन्मेषकों का दावा है कि हिमिररली इसी दिशा में एक नई शुरुआत है।
विज्ञापन


हालांकि, इसे 'दुनिया की पहली' ऐसी तकनीक बताने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। फिर भी, इसका विचार एआई के भविष्य को लेकर एक अहम सवाल जरूर उठाता है, क्या आने वाली तकनीक इंसान की जगह लेगी या उसे खुद को बेहतर समझने में मदद करेगी?
विज्ञापन
विज्ञापन


नवोन्मेषकों के अनुसार, हिमिररली में मानवीय बुद्धिमत्ता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ऊपर रखा गया है। इसकी अवधारणा को एचआई-ईआई-एआई की त्रयी कहा गया है। एचआई यानी मानवीय बुद्धिमत्ता, ईआई यानी भावनात्मक बुद्धिमत्ता और एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता। इसमें एआई को अंतिम निर्णयकर्ता बनाने के बजाय उपयोगकर्ता को स्वयं को समझने में मदद करने वाली तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

नवोन्मेषकों के अनुसार, हिमिररली उपयोगकर्ता की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर उसकी भावनात्मक समझ, संवाद शैली और व्यवहार का प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है। इसमें चेहरे के भाव पढ़ने, आवाज का जैविक विश्लेषण करने या व्यक्ति की लगातार निगरानी करने पर निर्भरता नहीं है। इस तकनीक की खासियत यह बताई गई है कि पर्याप्त जानकारी नहीं होने पर यह निश्चित निष्कर्ष देने के बजाय 'नहीं मालूम' कह सकती है। संस्थापकों के अनुसार, मशीन की अपनी सीमाओं को स्वीकार करना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि
भरोसेमंद तकनीक की पहचान है।

'मिशी' : आत्म-समझ का डिजिटल तंत्र
हिमिररली के मूल्यांकन तंत्र को 'मिशी' नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को अच्छा-बुरा या सक्षम-अक्षम घोषित करना नहीं, बल्कि उसे अपनी भावनाओं, संवाद और व्यवहार के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने में मदद करना है।

निजता भी प्राथमिकता
नवोन्मेषकों का दावा है कि तकनीक में अनावश्यक डेटा संग्रह, विज्ञापन के लिए व्यक्तिगत विश्लेषण और लगातार डिजिटल निगरानी से दूरी रखी गई है। सांस्कृतिक संदर्भ को भी ध्यान में रखने का प्रयास किया गया है। सत्यव्रत निराला असम के तिनसुकिया जिले के बलिजान गांव में पले-बढ़े और सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है, जबकि नवीन बाबू गरिकपाटी तकनीक और प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े रहे हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on August 21, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 21, 2026 at 11:19 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]