03/10/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/10/2026 06:35
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीफ 2025 मौसम के दौरान यूरिया और डीएपी सहित प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा सहित सभी राज्यों में पर्याप्त रही। उर्वरक विभाग राज्य स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जबकि राज्यों के भीतर वितरण का प्रबंधन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। इस मौसम के लिए आवश्यकता, उपलब्धता और बिक्री के आँकड़े संतोषजनक आपूर्ति स्थिति को दर्शाते हैं।
इसके अतिरिक्त, वर्तमान रबी 2025-26 मौसम में1 अक्टूबर 2025 से 5 मार्च 2026 तक यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस उर्वरकों की उपलब्धता भी कृषि मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रही है और देश में इनका काफी भंडार बना हुआ है।
आयात के मुद्दे पर सरकार ने बताया कि चीन से डीएपी के आयात की वर्षवार मात्रा 2023-24 में22.28 लाख मीट्रिक टनऔर 2024-25 में8.47 लाख मीट्रिक टनरही। आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को कम करने और निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार संसाधनों से सम्पन्न देशों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है तथा भारतीय उर्वरक कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं के बीच दीर्घकालिक समझौते और समझौता ज्ञापन को प्रोत्साहित किया है। इन व्यवस्थाओं के तहत सऊदी अरब से प्रतिवर्ष 31 लाख टन, रूस से 30.10 लाख टन और मोरक्को से 25 लाख टनउर्वरक आपूर्ति की व्यवस्था की गई है, जिससे2025-26 के दौरान भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला और मजबूत होने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में कालाबाज़ारी और जबरन उत्पाद टैगिंग के संबंध में मंत्रालय ने दोहराया कि उर्वरकों का नियमन आवश्यक वस्तु कानून, 1955 और उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के तहत किया जाता है, जो राज्यों को सख्त कार्रवाई करने का अधिकार देता है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच कालाबाज़ारी के मामलों में 52 एफआईआरऔर जबरन टैगिंग के मामलों में 7 एफआईआरदर्ज की गईं। इसके अलावा, राज्य सरकार ने 9 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी कर सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए हैं।
भारत की फॉस्फेटिक उर्वरकों के आयात पर भारी निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन को मजबूत बनाने हेतु कई कदम उठाए हैं। इनमें18 जनवरी 2024 को जारी दिशानिर्देश शामिल हैं, जिनका उद्देश्य पीऔरके उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य की तार्किकता सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के तहत नई और विस्तारित विनिर्माण क्षमताओं को मान्यता दी गई है तथा एनबीएस के अंतर्गत आने वाले पीऔरके उर्वरकों की ग्रेड संख्या 22 से बढ़ाकर 28 कर दी गई है। घरेलू फॉस्फेटिक स्रोत के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए खरीफ 2022 से इसकी फ्रेट सब्सिडी भी जारी रखी गई है।
इसके अतिरिक्त, घरेलू डीएपी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य लागतों के लिए 3500 रुपये प्रति मीट्रिक टनका विशेष प्रावधान किया गया है। सरकार डीएपी के कम लागत वाले स्वदेशी विकल्प के रूप में एसएसपी को भी बढ़ावा दे रही है, जिसके लिए जिंक, बोरॉन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त फोर्टिफाइड एसएसपी पर अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही, कीमतों की स्थिरता बनाए रखने के लिए समय-समय पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों में संशोधन किया जाता है। इन सभी कदमों के परिणामस्वरूप देश में पी और के उर्वरकों का घरेलू उत्पादन बढ़कर2014-15 में 159.54 लाख मीट्रिक टन से2024-25 में 211.22 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
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रबी 2025-26 के लिए अखिल भारतीय उर्वरक स्थिति (05/03/2026 तक) |
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आँकड़े लाख मीट्रिक टन में |
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क्रम संख्या |
उत्पाद |
रबी के लिए आवश्यकता 2025-26 |
01/10/25 से05/03/26 तक अनुपातिक आवश्यकता |
01/10/25 से05/03/26 तक उपलब्धता |
01/10/25 से05/03/26 तक बिक्री |
05/03/26 को उपलब्ध स्टॉक |
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1 |
यूरिया |
196.06 |
183.51 |
235.33 |
186.33 |
49.01 |
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2 |
डीएपी |
53.43 |
51.38 |
71.89 |
50.28 |
21.61 |
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3 |
एमओपी |
15.69 |
14.18 |
18.18 |
10.18 |
8.00 |
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4 |
एनपीकेएस |
82.38 |
76.48 |
108.41 |
62.90 |
45.51 |
तदनुसार, वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान देश में चीन से आयातित डीएपी की वर्षवार मात्रा निम्नलिखित है:
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यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/केपी
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