09/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/17/2026 04:35
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया। 17 से 19 सितंबर तक चल रहे इस आयोजन में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की कंपनियां, सरकार, स्टार्टअप, अकादमिक संस्थान और निवेशक एक मंच पर हैं। इस बार की थीम 'सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण' है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं। लगभग 50,000 आगंतुकों को आकर्षित करने की उम्मीद है। इनमें 52 देशों के प्रतिनिधि, 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता शामिल होंगे। प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन का प्रतिनिधित्व करने वाले छह कंट्री पवेलियन, साथ ही 12 स्टेट बूथ, एक स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन होंगे।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्री समझना सही नहीं है। इसकी शुरुआत चिप के डिजाइन से होती है। डिजाइन के बाद वेफर पर चिप बनाने के लिए फैब की जरूरत होती है। इसके बाद चिप की पैकेजिंग और टेस्टिंग की जाती है।
इसके साथ चिप बनाने वाली मशीनें, विशेष गैस, रसायन, सामग्री और उपकरण भी इसी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। चिप डिजाइन के लिए ईडीए टूल्स, सेमीकंडक्टर आईपी, रिसर्च और डेवलपमेंट तथा प्रशिक्षित इंजीनियर भी इस पूरी वैल्यू चेन में शामिल होते हैं।
सेमीकंडक्टर की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में हुए बदलाव को देखना जरूरी है। सरकार के जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का निर्यात 47.96 अरब डॉलर रहा और इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनी। मोबाइल फोन 2014-15 में भारत की निर्यात सूची में 153वें स्थान पर थे, जबकि 2025-26 में वे भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गए।
देश में बिकने वाले करीब 99.2 फीसदी मोबाइल फोन भारत में ही बनाए जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े करीब 12 लाख रोजगारों में लगभग 70 फीसदी प्रत्यक्ष कार्यबल महिलाएं हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू वैल्यू एडिशन भी 15 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हुआ है। इसके अलावा 40 से ज्यादा प्रमुख कंपोनेंट निर्माता भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग स्थापित या विस्तारित कर चुके हैं।
भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 1.0 को ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग का घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना था। इसमें फैब, डिस्प्ले फैब, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और भारत में डिजाइन की गई चिपों को बढ़ावा देना शामिल था।
इस कार्यक्रम के तहत 12 मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं में कुल ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
इन 12 परियोजनाओं में:
इन परियोजनाओं से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों की चिप जरूरतों को पूरा करने की क्षमता विकसित की जानी है।
जुलाई 2026 तक तीन कंपनियों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया था। ये कंपनियां माइक्रोन, कायन्स सेमीकॉन और सीजी सेमी हैं। एक और कंपनी के 2026 में संचालन शुरू करने की उम्मीद सरकार ने जताई थी।
सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन में चिप डिजाइन भी अहम है। भारत बड़ी संख्या में सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों के लिए जाना जाता है। सरकार इस क्षमता को भारत में डिजाइन की गई चिप और उत्पादों में बदलने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है।
सरकार ने 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी। इसका कुल बजटीय परिव्यय ₹1,27,500 करोड़ है। इस चरण में केवल फैब लगाने के बजाय चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस पैकेजिंग, मशीन, गैस, सामग्री, उपकरण, रिसर्च और टैलेंट को एक साथ विकसित करने पर जोर दिया गया है।
1. चिप डिजाइन: भारतीय डिजाइन वाली चिप, सेमीकंडक्टर आईपी, सिस्टम ऑन चिप और दूसरी डिजाइन क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा।
2. मशीन और सामग्री: फैब के लिए जरूरी मशीनरी, विशेष गैस, रसायन और दूसरी सामग्री की घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर होगा।
3. ज्यादा फैब: सिलिकॉन के साथ कंपाउंड सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स, सेंसर, एमईएमएस, डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
4. एटीएमपी और ओएसएटी: चिप बनने के बाद उसकी असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग होती है। सेमीकॉन 2.0 में एडवांस पैकेजिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर है।
5. रिसर्च एंड डेवलपमेंट: नई सेमीकंडक्टर तकनीक, चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।
6. टैलेंट डेवलपमेंट: विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योग के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किया जाएगा।
सेमीकॉन 2.0 के व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से 50,000 से 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना बताई गई है। यह पूरे सेमीकॉन 2.0 इकोसिस्टम से जुड़ी रोजगार की अपेक्षा है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में स्टार्टअप और कंपनियों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य बताया। उनके मुताबिक, सेमीकॉन 2.0 के तहत कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों के भारत में चिप डिजाइन करने का लक्ष्य रखा गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेजी आने के बावजूद भारत की सेमीकंडक्टर जरूरत का बड़ा हिस्सा अभी आयात से पूरा होता है। नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की मौजूदा सेमीकंडक्टर मांग का करीब 90 से 95 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की सेमीकंडक्टर मांग:
नीति आयोग ने सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता को चरणों में बढ़ाने का सुझाव दिया है। घरेलू मांग पूरी करने का लक्ष्य
इसका मतलब सिर्फ यह नहीं है कि चिप भारत में बने। डिजाइन, आईपी, पैकेजिंग, सामग्री और दूसरी महत्वपूर्ण गतिविधियों से पैदा होने वाली वैल्यू का बड़ा हिस्सा भी भारत में रहे।
नीति आयोग के रोडमैप में भारत के लिए हर तरह की अत्याधुनिक चिप बनाने की दौड़ में सीधे उतरने के बजाय उन क्षेत्रों पर ध्यान देने की बात कही गई है, जहां घरेलू मांग और रणनीतिक जरूरत दोनों मजबूत हैं। इनमें शामिल हैं:
इसके अलावा एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए उन्नत चिप डिजाइन पर भी जोर दिया गया है। 2035 तक 100 से ज्यादा ब्रेकथ्रू सेमीकंडक्टर आईपी विकसित करने की महत्वाकांक्षा रखी गई है।
2035 रोडमैप में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए पांच रणनीतिक स्तंभ रखे गए हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की रणनीति केवल फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं है। चिप्स टू स्टार्टअप यानी सी2एस कार्यक्रम के तहत 332 शैक्षणिक संस्थानों को अत्याधुनिक चिप डिजाइन टूल्स मुफ्त उपलब्ध कराए गए हैं। इन टूल्स का इस्तेमाल 240 लाख घंटे से ज्यादा हो चुका है और करीब 68,000 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। एससीएल मोहाली से 175 डिजाइन टेप-आउट भी किए जा चुके हैं।
इसके अलावा सरकार ने एनआईईएलआईटी कालीकट में स्मार्ट लैब के जरिए वीएलएसआई, एम्बेडेड सिस्टम और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे क्षेत्रों में 1 लाख इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की पहल की है। 12 अगस्त को लोकसभा में सरकार ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत 1 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका था।
एनआईईएलआईटी गुवाहाटी में एटीएमपी के लिए ट्रेनिंग लैब स्थापित करने की परियोजना भी मंजूर की गई है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और लैम रिसर्च की साझेदारी के तहत नैनोफैब्रिकेशन और प्रोसेस इंजीनियरिंग में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 10 वर्षों में 60,000 प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है।
फ्यूचरस्किल्स प्राइम कार्यक्रम के जरिए सेमीकंडक्टर समेत उभरती तकनीकों में स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग के ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं। वहीं इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और नैमटेक के समझौते के तहत अगले पांच वर्षों में करीब 5,000 प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। इसमें प्रमाणन कार्यक्रम, फैकल्टी एक्सचेंज, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और फैब, एटीएमपी, ओएसएटी तथा डिजाइन हाउस में इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप शामिल हैं।
आईबीएम के साथ समझौते के तहत भारत में सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाना है। इसमें अनुसंधान एवं विकास, आईपी साझा करने, चिप प्रोटोटाइप और उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर नवाचार पर ध्यान दिया जाएगा।