08/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/17/2026 03:10
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लॉगिन करेंभारत में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, आकलन वर्ष 2026 में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या 39 फीसदी बढ़कर 576 हो गई है। एक वर्ष पहले आकलन वर्ष 2025 में यह संख्या 415 थी। यह वृद्धि देश में बढ़ती आय, व्यावसायिक विस्तार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का स्पष्ट संकेत है।
एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या लगातार स्थिर गति से बढ़ती रही है। आकलन वर्ष 2022 में इस वर्ग में 1,93,800 करदाता थे। यह संख्या आकलन वर्ष 2023 में बढ़कर 2,69,184 हो गई। आकलन वर्ष 2024 में यह 3,49,974 तक पहुंच गई। आकलन वर्ष 2025 में यह संख्या 4,71,419 थी। आकलन वर्ष 2026 में यह बढ़कर 5,35,672 तक पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार, आकलन वर्ष 2022 के मुकाबले अब 1 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या दोगुने से भी अधिक हो चुकी है। वहीं, 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या चार गुना बढ़ गई है।
एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी सकारात्मक अनुमान जताए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर आठ फीसदी रहने का अनुमान है। इसके अलावा, ऋण वृद्धि 19.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक की एफसीएनआर(बी) जमा योजना के जरिये विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती आने की उम्मीद है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 707 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ये आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने का संकेत देते हैं।
रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में समान मजबूती नहीं दिखाई दे रही है। जून तिमाही के दौरान स्वास्थ्य सेवा, सीमेंट और मनोरंजन जैसे कुछ क्षेत्रों में लाभ पर दबाव देखने को मिला। इससे पता चलता है कि शीर्ष आय वर्ग और कुछ व्यवसायों की मजबूत आय वृद्धि के बावजूद। कॉरपोरेट जगत के सभी हिस्सों में समान प्रदर्शन नहीं हो रहा है। कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह दर्शाता है कि आर्थिक सुधार एक समान नहीं है।