Amar Ujala Ltd

11/04/2026 | Press release | Distributed by Public on 11/04/2026 08:26

ईडी: तीन फर्जी कॉल सेंटर, 220 लोग और निशाने पर 20 लाख अमेरिकन; अमेरिकी एजेंसी का अफसर बताकर लोगों से वसूली

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ईडी: तीन फर्जी कॉल सेंटर, 220 लोग और निशाने पर 20 लाख अमेरिकन; अमेरिकी एजेंसी का अफसर बताकर लोगों से वसूली

Wed, 04 Nov 2026 07:45 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 04 Nov 2026 07:45 PM IST
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने मंगलवार को चार आरोपियों हर्षिल नयनभाई रावल, जसवंत सिंह, चेतन मुंजाल और प्रणव पिठाडिया को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई है। इन आरोपियों को हैदराबाद के नामपल्ली स्थित विशेष अदालत (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपियों ने तीन जगहों पर फर्जी कॉल सेंटर खोल रखा था। उसमें 220 लोग काम कर रहे थे। कॉल सेंटर से अमेरिकन लोगों को यह कह कर फोन किया जाता था कि वे यूएस की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बोल रहे हैं। अमेरिकन लोगों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर उनसे वसूली की जाती थी।
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65 मोबाइल फोन और 13 लैपटॉप, कंप्यूटर जब्त
ईडी ने इसी मामले में पहले विकास निमार (27.07.2026 को), ताराचंद निमार (05.08.2026 को) और मो. इरफान अंसारी (10.08.2026 को) को गिरफ्तार किया था। ये तीनों फिलहाल चंचलगुडा सेंट्रल जेल में बंद हैं। इन नई गिरफ्तारियों के साथ, इस मामले में गिरफ्तार किए गए कुल लोगों की संख्या सात हो गई है। इससे पहले, 15 सितंबर को ईडी ने पुणे और चंडीगढ़ में चार जगहों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान तीन सक्रिय कॉल सेंटर (दो पटियाला में और एक पुणे में) मिले, जहां छापेमारी के समय लगभग 220 लोग काम कर रहे थे। तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस, नकदी और कुछ रिकॉर्ड जब्त किए गए। अब तक 79 डिजिटल डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच पूरी हो चुकी है, जिनमें 65 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप/कंप्यूटर और एक डेटा स्टोरेज डिस्क शामिल हैं। इनमें इस गिरोह (सिंडिकेट) से जुड़ी चैट, लेजर, कॉलिंग डेटा, पीड़ितों के रिकॉर्ड और क्रिप्टो वॉलेट मिले हैं।
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जाली पहचान पत्र, बैज और आधिकारिक दस्तावेज
ये अपराध भारत से चलाए जा रहे कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिका के निवासियों के खिलाफ किए गए थे। इनमें सरकारी अधिकारियों का रूप धरने और जाली सरकारी दस्तावेजों व पहचान पत्रों का इस्तेमाल करने जैसी बातें शामिल थीं। जांच से पता चला है कि यह गिरोह संगठित तरीके से 'फेक कॉल सेंटर' चलाता था, जिसमें कर्मचारी 'डायलर्स', 'बैंकर्स' और 'क्लोजर्स' के रूप में काम करते थे। वे अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करके उन्हें बताते थे कि उनके खातों से कोई फर्जी खरीदारी हुई है या कोई शुल्क काटा गया है। इसके बाद, कॉल करने वाले खुद को अमेरिकी एजेंसियों-जैसे ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन, डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस, फेडरल ट्रेड कमीशन और डिपार्टमेंट ऑफ द ट्रेजरी के अधिकारी बताकर उन्हें डराते-धमकाते थे। इसके लिए वे जाली पहचान पत्रों, बैज, आधिकारिक पत्रों और अदालती दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे।
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'पिक-अप' करने वालों को सौंप दें नकदी व सोना
कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर वे पीड़ितों को इस बात के लिए मजबूर करते थे कि वे 'पिक-अप' करने वालों को नकद और सोना सौंप दें, कूरियर सेवाओं के जरिए नकद भेजें, 'मनी म्यूल्स' (धोखाधड़ी में शामिल लोगों) के अमेरिकी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करें, या गिफ्ट कार्ड खरीदें। इस तरह जुटाई गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी और हवाला चैनलों के जरिए भारतीय रुपयों में बदल लिया जाता था। इसे दुबई तथा अन्य देशों के खातों के जरिए भी भेजा जाता था। डिजिटल सबूतों से पता चलता है कि इस गिरोह ने अमेरिकी संघीय अधिकारियों का रूप धरकर, पहचान छिपाकर धोखाधड़ी की, अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों और अदालती आदेशों में जालसाजी की, पहचान की चोरी की और पीड़ितों के बैंक खातों पर कब्जा कर लिया।

अमेरिका में रहने वाले बुजुर्ग लोगों को निशाना
इन अपराधों का शिकार मुख्य रूप से अमेरिका में रहने वाले बुजुर्ग लोग बने, जिनमें से कई 1940 के दशक में जन्मे थे। बरामद किए गए जाली दस्तावेजों में अमेरिकी न्याय विभाग का 'वित्तीय खातों को जब्त करने और उन पर अधिकार जताने का नोटिस', अमेरिकी ट्रेजरी के 'आश्वासन पत्र', 'संपत्ति जब्त करने' के नोटिस, अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स का एक फर्जी आदेश और फेडरल ट्रेड कमीशन तथा अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फर्जी कानूनी नोटिस शामिल हैं। डिवाइस की फोन गैलरी में 'स्पेशल एजेंट' और ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन, डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस, फेडरल ट्रेड कमीशन तथा डिपार्टमेंट ऑफ द ट्रेजरी के अधिकारियों के नाम से कम से कम 11 फर्जी पहचान पत्र और बैज भी मिले हैं। यह ऑपरेशन कई देशों में फैला हुआ था। भारत से अमेरिका के निवासियों को कॉल किए जाते थे। इसके लिए लगभग 20 लाख लोगों की सूची (लीड लिस्ट) और अमेरिकी टेलीफोन नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था। ऑटो डायलर सर्वर जर्मनी और फिनलैंड में होस्ट किए गए थे।

हवाला के माध्यम से भारत पहुंचता था पैसा
जांच से पता चला है कि रकम अमेरिका में इकट्ठा की गई और इसे संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) तथा हांगकांग की कंपनियों के खातों और क्रिप्टो-एसेट्स के जरिए घुमाया गया। इसके बाद, हवाला और अंगड़िया चैनलों के माध्यम से यह रकम भारत पहुंची। प्रणव पिठाडिया पटियाला में चल रहे 'कॉलिंग फ्लोर' (फर्जी कॉल सेंटर) का मालिक और मैनेजर था। यहां 242 कर्मचारी काम करते थे, जिनमें 110 'डायलर्स' शामिल थे। ये लोग पेमेंट अप्रूवल और सेटलमेंट का काम संभालते थे और अवैध तरीके से कमाई गई रकम को अमेरिका के 'म्यूल अकाउंट्स' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) और दुबई के खातों के जरिए इधर-उधर भेजते थे। हर्षिल नयनभाई रावल इन फर्जी कॉल सेंटर्स के मास्टर अकाउंट्स संभालता था। वह फर्जी कॉल सेंटर्स की कमाई, पार्टनर्स के हिस्से और दुबई भेजी गई अवैध रकम का हिसाब-किताब रखता था।

'पिक-अप टीम' और पार्सल का इंतजाम
आरोपी रावल, इस पैसे को प्रॉपर्टी में निवेश करता था। जसवंत सिंह अमेरिका में पीड़ितों से कैश इकट्ठा करने के लिए 'पिक-अप टीमों' और पार्सल का इंतजाम करता था। वह इस कैश को नेटवर्क तक पहुंचाता था, जहां इसे टोकन और हवाला के जरिए भारतीय रुपयों में बदल दिया जाता था। चेतन मुंजाल, 'मैसर्स रबदित्ता कॉरपोरेट्स' में 25% का पार्टनर है। यह कंपनी 'काला घोड़ा' रेस्टोरेंट चलाती है, जिसे अपराध से कमाई गई 23.19 लाख रुपये की रकम मिली थी। चेतन मुंजाल ने इस कॉल सेंटर को सुरक्षा प्रदान की और इन कॉल सेंटर्स के लिए अवैध कमाई का हिस्सा प्राप्त किया।

15 अमेरिकी बैंकों के 397 खातों का पता
कॉलिंग फ्लोर' के व्हाट्सएप ग्रुपों में जुलाई 2025 से सितंबर 2026 के बीच लगभग 27.39 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 261 करोड़ रुपये) की 927 'स्वीकृत' वसूलियों का रिकॉर्ड मिला है। यह रकम पीड़ितों से सोने, नकद पिक-अप, कूरियर के जरिए भेजे गए नकद पार्सल, वायर ट्रांसफर, बिटकॉइन और गिफ्ट कार्ड के रूप में ली गई थी। जब्त किए गए उपकरणों से कम से कम 15 अमेरिकी बैंकों में मौजूद 397 अमेरिकी बैंक खातों का पता चला है। इनमें वेल्स फार्गो (313 खाते), एसएसबी बैंक, बैंक ऑफ अमेरिका, थ्रेड बैंक, कॉलम एन.ए. और लीड बैंक शामिल हैं। पीड़ितों को इन्हीं खातों में पैसे वायर करने या जमा करने के लिए मजबूर किया गया था। ये खाते 'मनी म्यूल' (पैसे इधर-उधर करने वाले लोग) से संबंधित थे। यानी इनके खातों पर दूसरों ने कब्जा कर लिया था। ये खाते चुराई गई या फर्जी पहचानों के जरिए खोले गए थे। चार मामलों में तो पीड़ितों के ऑनलाइन बैंकिंग लॉग-इन विवरण भी मिले हैं।

140 यूएस नागरिकों के सोशल सिक्योरिटी नंबर
इन उपकरणों में 140 अमेरिकी नागरिकों के सोशल सिक्योरिटी नंबर भी मिले हैं (4 मामलों में पूरे नंबर और 136 मामलों में आखिरी चार अंक)। इसके साथ ही उनकी जन्म तिथि, पता, बैंक विवरण, अमेरिकी ड्राइविंग लाइसेंस की तस्वीरें और पहचान दस्तावेजों की 92 अन्य तस्वीरें भी मिली हैं। इनका इस्तेमाल पीड़ितों की प्रोफाइल बनाने, दूसरों के नाम पर कूरियर स्टोर से नकद पार्सल लेने और ऐसी अमेरिकी कंपनियों को सामने रखने के लिए किया जाता था, जो इन पार्सल और वायर ट्रांसफर को प्राप्त करती थीं। जिन लोगों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया, उनकी पहचान की जा रही है।

पीड़ितों से बिटकॉइन एटीएम में जमा कराते थे नकदी
अवैध रूप से जुटाई गई रकम को इधर-उधर करने के लिए क्रिप्टो-एसेट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। वसूली गई रकम को ट्रोन नेटवर्क पर यूएसडीटी (टेथर) और बिटकॉइन में बदल दिया जाता था। इसके अलावा, पीड़ितों से बिटकॉइन एटीएम में भी नकद जमा करवाया जाता था। तलाशी के दौरान जब्त किए गए डिजिटल सबूतों के विश्लेषण से अब तक 549 अमेरिकी नागरिकों की पहचान हुई है, जो इस गिरोह के शिकार या निशाने पर थे। जब्त किए गए उपकरणों में इनके नाम और अन्य विवरण दर्ज मिले हैं। इसके अलावा, जब्त किए गए फोन से 6,463 अमेरिकी फोन नंबरों पर कॉल या मैसेज किए गए थे। ईडी की जांच अभी जारी है, जिसका मकसद अपराध से जुड़ी और अधिक रकम का पता लगाना, पैसों के लेन-देन के रास्ते (मनी ट्रेल) को खोजना और मनी लॉन्ड्रिंग के इस अपराध में शामिल अन्य लोगों या संस्थाओं की भूमिका का पता लगाना है।
Amar Ujala Ltd published this content on November 04, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on November 04, 2026 at 14:26 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]