08/10/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/10/2026 11:45
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लॉगिन करेंकंधों पर कांवड़... पैरों में छाले... आंखों में पढ़ाई फिर शुरू होने की उम्मीद और दिल में भोलेनाथ पर भरोसा। बठैन गेट निवासी दिव्यांग दंपती के तीन बच्चे इन दिनों इसी आस के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल अपने घर की ओर बढ़ रहे हैं। बच्चों की मनौती है कि भोलेनाथ उनकी पुकार सुनें और उनकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो जाए। मंगलवार को चारों भाई-बहन शिवालय पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
तालाबशाही निवासी भरतलाल की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। बच्चों के माता-पिता दोनों दिव्यांग हैं। परिवार की आमदनी सीमित होने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो सकी। बच्चों का आरोप है कि फीस जमा न होने के कारण निजी स्कूल से उनकी पढ़ाई छूट गई। पढ़ाई छूटने का दर्द बच्चों को इस कदर परेशान कर रहा है कि उन्होंने भगवान शिव को अपनी फरियाद सुनाने के लिए कांवड़ यात्रा की मनौती मांगी।
भरतलाल तीन बच्चों समेत ई-रिक्शा से 30 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले थे। सबसे बड़ी बहन कक्षा 11 में सरकारी स्कूल में पढ़ती है। दूसरे नंबर का बालिका कक्षा नौ, तीसरे नंबर का पुत्र कक्षा छह और सबसे छोटी बहन कक्षा तीन में पढ़ती है। मासूमों का कहना है कि वे पढ़-लिखकर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं। उनकी बस इतनी इच्छा है कि किसी तरह उनकी पढ़ाई फिर से शुरू हो जाए। कांवड़ यात्रा के दौरान बच्चों के चेहरे पर थकान साफ दिखाई देती है, लेकिन पढ़ाई दोबारा शुरू होने की उम्मीद उन्हें लगातार आगे बढ़ा रही है। बच्चों की इस मनौती ने परिवार की आर्थिक स्थिति और शिक्षा के लिए जूझ रहे बच्चों की पीड़ा को सामने ला दिया है।
वहीं, वही प्रबंधक तरूण गुप्ता ने बच्चों को फीस जमा न करने के कारण निकाले जाने के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। चार में से तीन बच्चे उनके विद्यालय में पढ़ते हैं। तीनों बच्चे 24 जुलाई से स्कूल नहीं आ रहे हैं। फीस जमा न करने पर भी बच्चों को परीक्षा दिलाई गई। लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।