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07/26/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/26/2026 14:35

US कोर्ट ने ट्रंप को दिया झटका: मिड-टर्म चुनावों में मेल बैलेट नियम नहीं होंगे लागू, क्या था आदेश

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US कोर्ट ने ट्रंप को दिया झटका: मिड-टर्म चुनावों में मेल बैलेट नियम नहीं होंगे लागू, क्या था आदेश?

Sun, 26 Jul 2026 11:38 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 26 Jul 2026 11:38 PM IST
सार

अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने उस आदेश पर लगी रोक को बरकरार रखा है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप योग्य मतदाताओं की एक संघीय वोटर लिस्ट तैयार कराना चाहते थे और मेल बैलेट केवल उसी सूची में शामिल लोगों को भेजने का प्रावधान करना चाहते थे। अदालत के इस फैसले से ट्रंप प्रशासन को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है।

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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका की संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर लगी रोक बरकरार रखी है, जिसके तहत योग्य मतदाताओं की संघीय सूची बनाकर मेल बैलेट केवल उन्हीं लोगों को भेजे जाने थे। अदालत ने माना कि चुनावी नियम तय करने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं, बल्कि राज्यों और कांग्रेस के पास है। 23 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया ने इस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी।

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आखिर अपील कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की दलील क्यों खारिज कर दी?
शनिवार को प्रथम अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स के जजों ने ट्रंप प्रशासन की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसके जरिए नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से पहले 23 अमेरिकी राज्यों में मेल-इन वोटिंग पर प्रस्तावित पाबंदियों को लागू करने की कोशिश की जा रही थी। इन राज्यों ने ट्रंप के आदेश के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
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ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में क्या प्रावधान किए गए थे?
ट्रंप ने मार्च में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया था, जिसमें अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के निदेशक और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन के आयुक्त को योग्य मतदाताओं की "स्टेट सिटिजनशिप लिस्ट" तैयार करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, अमेरिकी डाक सेवा को आदेश दिया गया था कि वह मेल बैलेट केवल उसी सूची में शामिल लोगों को भेजे।
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क्या ट्रंप का दावा और राज्यों की चिंता अलग-अलग थी?
ट्रंप ने इन प्रस्तावित बदलावों को गैर-अमेरिकी नागरिकों को मतदान से रोकने के उपाय के रूप में पेश किया था। हालांकि, राज्यों के चुनाव अधिकारियों का कहना था कि इन प्रावधानों का गलत इस्तेमाल हो सकता है और इससे चुनावी प्रक्रिया में भ्रम तथा अव्यवस्था फैल सकती है।

किन राज्यों ने ट्रंप के आदेश को अदालत में चुनौती दी थी?
23 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के डेमोक्रेटिक अधिकारियों ने बोस्टन की अमेरिकी जिला अदालत में मुकदमा दायर कर ट्रंप के आदेश को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि यह आदेश असंवैधानिक है, क्योंकि चुनाव संबंधी नियम बनाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि राज्यों और अमेरिकी कांग्रेस के पास है।

जिला अदालत ने ट्रंप के आदेश पर रोक क्यों लगाई थी?
डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नियुक्त अमेरिकी जिला न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने राज्यों के इस तर्क से सहमति जताई। उन्होंने 3 नवंबर को होने वाले चुनावों के मद्देनज़र ट्रंप के आदेश के अमल पर रोक लगा दी थी, हालांकि यह रोक केवल उन राज्यों पर लागू की गई थी जिन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी।

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क्या व्हाइट हाउस ने अदालत के फैसले पर कोई प्रतिक्रिया दी?
व्हाइट हाउस और अमेरिकी न्याय विभाग ने रविवार को टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
Amar Ujala Ltd published this content on July 26, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 26, 2026 at 20:35 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]