08/26/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/26/2026 09:18
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर तिब्बत सीमा से लगे सिंधुपालचोक और रसुवा जिलों में देखने को मिला है। अचानक आई बाढ़ ने घरों, गाड़ियों, पुलों और कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
रसुवा जिले में हालात बेहद गंभीर बताए जा रहे हैं। उत्तरी रसुवा की एक सीमा चौकी पर तैनात नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल यानी एपीएफ के चार जवान बाढ़ के बाद लापता हैं। इसके अलावा नेपाल पुलिस के 32 जवान और रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी भी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं।
बाढ़ की शुरुआत स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से हुई। अधिकारियों का कहना है कि पानी तिब्बत की तरफ से आया प्रतीत होता है। तिमुरे और स्याब्रुबेसी की सीमावर्ती बस्तियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। यहां कई वाहन, व्यावसायिक सामान और दूसरी संपत्तियां पानी में बह गईं। रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के परिसर में खड़े कई वाहन भी बाढ़ की चपेट में आ गए। हाल ही में बनाया गया एक पुल भी पूरी तरह नष्ट हो गया।
रसुवा के प्रशासनिक अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजना स्थलों के बह जाने की खबरें मिली हैं। उन्होंने भारी जानमाल के नुकसान की आशंका जताई, हालांकि तत्काल नुकसान का पूरा आंकड़ा सामने नहीं आया है। प्रभावित इलाकों में राहत और नुकसान के आकलन का काम जारी है।
बाढ़ ने नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर को भी बड़ा झटका दिया है। नेपाल के स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अनुसार, बाढ़ से 15 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 10 चालू परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। ऐसे में बाढ़ से जान-माल के साथ-साथ नेपाल के महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
हालात को देखते हुए नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भी हालात पर उच्चस्तरीय बैठक की। सिंह दरबार में हुई बैठक में प्रभावित जिलों के संघीय सांसदों के साथ राहत और बचाव अभियान पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने निचले इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने और विस्थापित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की संयुक्त टीमें जुटी हुई हैं। तलाशी और बचाव अभियान के लिए 14 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। बुधवार दोपहर तक 25 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई थी। अब तक चार शव नुवाकोट और तीन शव धाडिंग जिले में बरामद किए गए हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने करीब एक हजार लोगों के लिए जरूरी दवाएं और स्वास्थ्य उपकरण उपलब्ध कराने की घोषणा की है। काठमांडू के बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में बाढ़ पीड़ितों के लिए 100 इमरजेंसी बेड आरक्षित किए गए हैं। तीन गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट कर काठमांडू लाया जा चुका है।
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर बाढ़ में हुई मौतों पर दुख जताया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने नेपाल को हर संभव मानवीय और राहत सहायता देने का भरोसा दिया है।
फिलहाल नेपाल के कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और कई इलाकों के संपर्क से कटने के कारण राहत एवं बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती है। प्रशासन की प्राथमिकता अब ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना है।