07/29/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/29/2026 16:54
जेल जाते सातों हत्यारे। - फोटो : अमर उजाला
कोतवाली शहर के मोहल्ला जाटान निवासी प्रबल अग्रवाल पुत्र आलोक अग्रवाल 19 दिसंबर 2012 की रात शहनाई बैंक्वेट हॉल में अग्रसेन जयंती कार्यक्रम में शामिल हुआ था। इस दौरान युवती से बात करने को लेकर वहां मौजूद कई लोगों ने उसे पीटा था। हालत बिगड़ी तो उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद हत्या के इस पूरे मामले को दबाने के लिए प्रबल के शव को गंगा में फेंक दिया गया था। करीब एक माह बाद उसका शव पुलिस ने हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा से बरामद किया था।
हत्यारों को जेल ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर कोर्ट में यह मामला तभी से चल रहा था। इस मामले में पुलिस ने संजय गुप्ता एडवोकेट, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता, आशीष उर्फ आशु के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. शहजजाद अली ने इन सभी सात अभियुक्तों को प्रबल की हत्या में दोषी करार दिया है। कोर्ट में मौजूद सभी अभियुक्तों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल पंवार ने बताया कि इस मामले में सजा पर फैसला अब 31 जुलाई को आएगा।
जेल जाते हत्यारे। - फोटो : अमर उजाला
कई दिन चला था धरन-प्रदर्शन, छह माह बाद हो गई थी पिता की मौत
प्रबल हत्याकांड में शहर में खूब बवाल रहा था। कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन हुआ था और शहर भर में प्रबल के परिवार और नागरिकों ने कैंडल मार्च निकाले। करीब एक माह बाद शव मिला तो पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी थी। प्रबल की हत्या से उसके पिता आलोक अग्रवाल सदमे में थे और घटना के छह माह बाद ही उनकी मौत हो गई थी।
बिलख पड़ी बहन प्राची। - फोटो : अमर उजाला
प्रबल की बहन बोली, लालच दिया, पर संघर्ष जारी रहा
प्रबल की बहन प्राची बुधवार को कोर्ट में मौजूद रही। अभियुक्त कोर्ट रूम में उससे माफी मांगते रहे, लेकिन प्राची ने साफ कहा कि वह उन्हें सजा दिलाना चाहती है। कोर्ट से बाहर आकर प्राची ने कहा कि 14 साल यह लड़ाई चली। शुरू में कोई वकील उनका केस लेने तक को तैयार नहीं था। इसके बाद अधिवक्ता अहमद जकावत ने उनके केस में पैरवी की। इस दौरान उसे रिश्तदारों और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से खूब लालच दिया गया, लेकिन वह डटी रही। आज यह न्याय की जीत है।