Amar Ujala Ltd

09/09/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/08/2026 13:09

कोलकाता में भूपेन दा को 100 दिये जलाकर संगीत प्रेमियों ने दी सबसे अनूठी श्रद्धांजलि, ऐसे किया याद

भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशती के अवसर पर कोलकाता में उन्हें बेहद अनूठे और भावपूर्ण अंदाज में याद किया गया। महान संगीतकार, गायक, गीतकार और मानवतावादी भूपेन दा की स्मृतियों को समर्पित इस कार्यक्रम में संगीतप्रेमियों ने सौ दीये जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन कोलकाता के टॉलीगंज स्थित उस ऐतिहासिक भवन के नीचे किया गया, जहां भूपेन हजारिका ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बिताए थे और लंबे समय तक संगीत की साधना की थी। सौ दीयों की रोशनी से जगमगाते इस परिसर में जब भूपेन दा के लोकप्रिय गीतों की गूंज सुनाई दी तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। असम और बंगाल के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए संगीतप्रेमियों और कलाकारों ने कार्यक्रम में हिस्सा लेकर महान कलाकार की स्मृतियों को नमन किया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भूपेन हजारिका के संगीत और उनके मानवीय संदेश को याद किया।
कार्यक्रम के दौरान ऐसा लगा मानो उस ऐतिहासिक भवन में भूपेन दा की संगीत साधना की यादें फिर से जीवंत हो उठी हों। कोलकाता असमिया सांस्कृतिक संस्था की ओर से आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को भूपेन हजारिका के जीवन, संगीत और विचारों से परिचित कराना भी रहा। संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष हितेन हाटखुवा ने कहा कि भूपेन हजारिका का योगदान किसी एक राज्य, भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उनका संगीत मानवता, प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता की आवाज बना और देश-विदेश में लोगों के दिलों तक पहुंचा। उन्होंने बताया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस ऐतिहासिक भवन को स्मारक के रूप में विकसित करने के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से बातचीत की है। संस्था को उम्मीद है कि जिस घर में भूपेन हजारिका ने कई वर्षों तक रहकर संगीत की साधना की, उसे भविष्य में एक महत्वपूर्ण स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो यह न केवल असम और बंगाल के लोगों, बल्कि देशभर में भूपेन हजारिका के करोड़ों प्रशंसकों के लिए गौरव और खुशी का विषय होगा। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को भूपेन दा की कला, संघर्ष, संगीत साधना और मानवतावादी विचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। सौ दीयों की रोशनी और गूंजते गीतों के बीच दी गई यह श्रद्धांजलि इस बात का प्रतीक बनी कि भूपेन हजारिका आज भी अपने संगीत और विचारों के माध्यम से लोगों के दिलों में जीवित हैं।

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