09/02/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/02/2026 04:39
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लॉगिन करेंवैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय वायदा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार, 2 सितंबर को सोने के वायदा भाव लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई भारी तेजी ने वैश्विक बाजारों में महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं को हवा दे दी है। इसी का नतीजा है कि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर बिकवाली तेज कर दी है, जिससे घरेलू स्तर पर सोने के दाम गिरकर ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गए हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर बुधवार को सोने के अक्तूबर डिलीवरी वाले अनुबंध (वायदा भाव) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह अनुबंध अपने पिछले बंद स्तर 1,51,729 रुपये से 1,559 रुपये यानी 1.03 प्रतिशत गिरकर 1,50,170 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नए संकट में डाल दिया है। हाल ही में ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान की ओर से बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और इराक में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से एक बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि उसने ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हवाई हमलों का एक नया दौर पूरा कर लिया है। यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सेवा सदस्यों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा किए गए हमलों के प्रयासों के बाद की गई है।
इस सैन्य टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसने पूरी दुनिया में महंगाई के खतरे को बढ़ा दिया है। चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च (कमोडिटी एंड करेंसी) एनालिस्ट आमिर मकड़ा का कहना है, "पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और ब्याज दरें बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। इसी के चलते सोने के वायदा भाव पिछले तीन हफ्तों से अधिक के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं।"
निवेश प्लेटफॉर्म मुड्रेक्स के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने भी इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "अमेरिकी और ईरान के बीच नए सिरे से शुरू हुए सैन्य हमलों ने कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर धकेला है, जिससे विदेशों में सर्राफा बाजार में भारी बिकवाली हुई और सोना 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया।"न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार में दिसंबर अनुबंध वाला सोना लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज करते हुए 46.46 डॉलर यानी 1.06 प्रतिशत गिरकर 4,349.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
सामान्य तौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानकर इसमें निवेश करते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति थोड़ी अलग है। कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आधारित महंगाई की चिंताओं को गहरा कर दिया है। बाजार को डर है कि इस महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं या इनमें बढ़ोतरी कर सकते हैं। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए बढ़ती ब्याज दरों की आशंका सर्राफा बाजार के लिए नकारात्मक साबित हो रही है।
बाजार के निवेशक अब अमेरिका के आगामी रोजगार आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की नीति को लेकर स्पष्ट संकेत मिल सकेंगे। विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई आगामी 16 सितंबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की एफओएमसी बैठक में मौद्रिक नीति के फैसले को कैसे प्रभावित कर सकती है।