Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

04/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/01/2026 09:43

‘शिक्षा के लिए एआई, शिक्षा में एआई’ के अनुरूप, नया पाठ्यक्रम शिक्षा की दिशा में भविष्य के लिए तैयार एक परिवर्तनकारी कदम है – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान

शिक्षा मंत्रालय

'शिक्षा के लिए एआई, शिक्षा में एआई' के अनुरूप, नया पाठ्यक्रम शिक्षा की दिशा में भविष्य के लिए तैयार एक परिवर्तनकारी कदम है - केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान


केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कक्षा तीसरी से आठवीं के लिए सीबीएसई के गणनात्मक सोच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित नए पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया

प्रविष्टि तिथि: 01 APR 2026 7:41PM by PIB Delhi

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) के गणनात्मक सोच(सीटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी, विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, सीबीएसई के अध्यक्ष श्री राहुल सिंह, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) के निदेशक श्री दिनेश प्रकाश सकलानी और शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

श्री प्रधान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कक्षा तीसरी से आठवीं तक के लिए गणनात्मक सोच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित नए पाठ्यक्रम का शुभारंभ शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में भविष्य के लिए तैयार शिक्षा की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने कहा कि इस पहल ने औपचारिक रूप से स्कूलों में संरचित एआई शिक्षा को व्यापक स्तर पर स्थापित किया है। श्री प्रधान ने कहा कि पाठ्यक्रम संरचित मॉड्यूल, व्यापक शिक्षक पुस्तिकाओं और मजबूत विद्यार्थी मूल्यांकन ढांचों द्वारा समर्थित है, जो उभरती प्रौद्योगिकियों से प्रारंभिक और व्यवस्थित रूप से परिचित होने को सुनिश्चित करता है और भावी शिक्षार्थियों के लिए एक मजबूत नींव रखता है।

शिक्षा मंत्री महोदय ने कहा कि"शिक्षा के लिए एआई, शिक्षा में एआई" की परिकल्पना के अनुरूप, यह पहल युवा मन में आलोचनात्मक सोच, डिजाइन अभिविन्यास और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देकर संवर्धित शिक्षा की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है। श्री प्रधान ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी-आधारित गणना में भारत का नेतृत्व वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रहा है, यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल भविष्य से सार्थक रूप से जुड़ने और उसे आकार देने में सक्षम बनाएगा।

श्री प्रधान ने इस दूरदर्शी ढांचे को संस्थागत रूप देने और अधिक अनुकूलनीय, प्रौद्योगिकी-एकीकृत शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को बधाई दी।

श्री जयंत चौधरी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा को अब युवा प्रतिभाओं को केवल बदलती दुनिया के लिए, बल्कि ऐसी दुनिया के लिए तैयार करना होगा जो उन तरीकों से बदलेगी जिनकी हम अभी भविष्यवाणी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पहले से ही ज्ञान के सृजन, निर्णय लेने और अर्थव्यवस्थाओं के कामकाज के तरीके को नया आकार दे रही है, जिससे यह अनिवार्य हो जाता है कि हमारे बच्चे प्रौद्योगिकी के निष्क्रिय उपयोगकर्ता होकर, इसके विचारशील निर्माता और जिम्मेदार नेता बनें। प्रारंभिक चरण से ही गणनात्मक सोच को बढ़ावा देकर, हम एक ऐसी पीढ़ी की नींव रख रहे हैं जो निरंतर सीख सकती है, पुरानी बातों को भुला सकती है और फिर से सीख सकती है, अनिश्चितता का आत्मविश्वास से सामना कर सकती है और व्यवधान को अवसर में बदल सकती है। यह केवल एक अकादमिक सुधार नहीं है, बल्कि मानव क्षमता में एक राष्ट्रीय निवेश है- जो एनईपी2020 की परिकल्पना के अनुरूप है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत के शिक्षार्थी केवल कल की नौकरियों के लिए तैयार हों, बल्कि उन विचारों, प्रणालियों और समाधानों को आकार देने में सक्षम हों जो दुनिया के भविष्य को परिभाषित करेंगे।

सीबीएसई, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के तत्वावधान में स्कूली छात्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के प्रति तत्परता विकसित करने के लिए गणनात्मक सोच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(सीटी और एआई) पर आधारित एक पाठ्यक्रम लागू कर रहा है। यह पाठ्यक्रम सत्र2026-27 में कक्षा तीसरी से आठवीं तक लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य गणनात्मक सोच के कौशल पर ध्यान केंद्रित करके एआई-तैयार शिक्षार्थियों का विकास करना है। गणनात्मक सोच के कौशल के माध्यम से विकसित एआई-तत्परता, शिक्षार्थियों को तार्किक सोच, समस्या समाधान, पैटर्न पहचान आदि जैसी गणनात्मक सोच की क्षमताओं का उपयोग करने और दैनिक जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका और उपयोग को समझने में सहायता करेगी। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य नवाचार, आलोचनात्मक सोच और नैतिक निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ गणनात्मक सोच, डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग में मजबूत आधार तैयार करना है।

प्रासंगिकता: गणनात्मक सोच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का परिचय देना महत्वपूर्ण है

छात्रों को भविष्य के लिए तैयार डिजिटल नागरिक बनाने के लिए गणनात्मक सोच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का परिचय देना अत्यंत आवश्यक है।

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नींव: गणनात्मक सोच बौद्धिक आधारशिला और संज्ञानात्मक ढांचा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित समाधानों को समझने और अंततः विकसित करने के लिए आवश्यक है।
  • संज्ञानात्मक विकास: यह तार्किक सोच, व्यवस्थित समस्या-समाधान और पैटर्न पहचान जैसी आवश्यक मानवीय क्षमताओं को बढ़ावा देता है।
  • भविष्य की तैयारी: प्रारंभिक अनुभव व्यक्तियों को डेटा का प्रभावी ढंग से उपयोग करने और प्रौद्योगिकी को नैतिक रूप से लागू करने की क्षमता प्रदान करता है, जो आधुनिक कार्य जगत के लिए आवश्यक है।
  • समग्र विकास: यह अंतःविषयक शिक्षा को बढ़ावा देता है, जिससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि ज्ञान खंडित नहीं है, बल्कि गणित, विज्ञान और मानविकी को आपस में जोड़ता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली2023 के अनुरूप

पाठ्यक्रम सीधे राष्ट्रीय शिक्षा सुधारों के साथ संरेखित है:

  • एनईपी2020 परिकल्पना: यह शिक्षा में एआई और मशीन लर्निंग जैसे उभरते क्षेत्रों को एकीकृत करके भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लक्ष्य को पूरा करता है।
  • एनसीएफ-एसई2023 संरेखण: शिक्षण मानक(लक्ष्य, योग्यताएं, परिणाम) राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा ढांचा2023 में सुझाए गए ढांचे से लिए गए हैं।
  • चरणबद्ध कार्यान्वयन: एनसीएफ की सिफारिशों के अनुसार, पाठ्यक्रम में पहले सीटी को आधार बनाया गया है ताकि बाद में उच्च कक्षाओं में एआई को पढ़ाया जा सके।

शिक्षण पद्धति/दृष्टिकोण

शिक्षण पद्धति को मनोरंजक और अनुभवात्मक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:

  • गतिविधि-आधारित: सीखने की प्रक्रिया मजेदार गणित के खेल, पहेलियाँ और विशेष वर्कशीट का उपयोग करके व्यावहारिक अभ्यासों पर आधारित है।
  • समस्या-समाधान पर केंद्रित: शिक्षक छात्रों को बड़ी समस्याओं को छोटे भागों में विभाजित करने और चार्ट और आरेख जैसे दृश्य निरूपणों की व्याख्या करने में मार्गदर्शन करते हैं।
  • सहयोगात्मक अधिगम: पाठ्यक्रम में सहपाठियों के साथ चर्चा और सामूहिक रूप से समस्याओं को हल करने के लिए समूह कार्यों पर जोर दिया गया है।

मूल्यांकन

मूल्यांकन में रटने की पद्धति से हटकर सतत और योग्यता-आधारित पद्धतियों की ओर बदलाव आया है:

  • अंतःक्रियात्मक उपकरण: विधियों में सीटी पहेलियों के साथ लिखित परीक्षाएँ, अंतःक्रियात्मक समूह गतिविधियाँ और प्रगति पर नज़र रखने के लिए शिक्षक अवलोकन डायरी का उपयोग शामिल हैं।
  • गुणात्मक फोकस: लक्ष्य छात्र की ज्ञान को लागू करने और रचनात्मक रूप से सोचने की क्षमता का आकलन करना है।

Launched the AI & Computational Thinking curriculum for Classes III to VIII, along with Minister of State Shri @jayantrld ji, marking a transformative step towards future-ready learning at the start of the academic year. This initiative formally introduces structured AI education… pic.twitter.com/9R7UnDWs3W

- Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) April 1, 2026

At the launch of Computational Thinking and Artificial Intelligence (CT & AI) Curriculum of CBSE https://t.co/h3KUFiOR3t

- Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) April 1, 2026

***

पीके/केसी/एमकेएस/डीके


(रिलीज़ आईडी: 2248040) आगंतुक पटल : 8
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: Urdu , English
Ministry of Heavy Industries of the Republic of India published this content on April 01, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on April 01, 2026 at 15:43 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]