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07/28/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/28/2026 07:57

'सुप्रीम कोर्ट की बात हमें मंजूर नहीं': सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास बोले- सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करे सरकार

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'सुप्रीम कोर्ट की बात हमें मंजूर नहीं': सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास बोले- सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करे सरकार

Tue, 28 Jul 2026 07:23 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 28 Jul 2026 07:23 PM IST
सार

सीजेपी ने छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई पर सरकार से लिखित आश्वासन की अपेक्षा जताई है। पार्टी का कहना है कि अगर वादे समय पर पूरे नहीं हुए तो आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है। वहीं, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया है।

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सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को कहा कि उन्हें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने और हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार लोगों की रिहाई को लेकर आज लिखित गारंटी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ''हमारी मांग थी कि सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहमति भी जताई गई थी। अगर सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि जिनके ऊपर पहले से एफआईआर हैं, उन्हें मत छोड़िए तो ये हमें मंजूर नहीं है।''
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सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के छात्रों को रिहा किया जाए, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो।
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सीजेपी प्रवक्ता ने कहा, "अगर सुप्रीम कोर्ट युवाओं के हित में काम कर रहा है तो हम ऐसे आदेशों या फैसलों का स्वागत करते हैं। दूसरी ओर, हम लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं और हमारी कुछ मांगें हैं, जिन्हें पूरा किया जाना सबसे महत्वपूर्ण है। हमारी प्रमुख मांगों में से एक यह थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं और सरकार भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न करे। हमें उम्मीद थी कि आज (मंगलवार) तक इस संबंध में लिखित गारंटी जारी कर दी जाएगी और हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार सभी लोगों को रिहा कर दिया जाएगा।"
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सीजेपी ने देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के लिए मंगलवार तक की समयसीमा तय की थी। सौरव दास ने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो युवाओं को फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट जो भी कहे, वह हमारी मांगों के 'अतिरिक्त' होना चाहिए। पहले हमारी मांगें पूरी की जाएं, उसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों या उससे मिलने वाली किसी भी राहत का पालन करे। यही हमारी मांग है।"

सीजेपी ने जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक प्रदर्शन करने के बाद सरकार ने उनकी मांगें मान ली थीं। इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सरकार ने आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने पर भी सहमति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि फिलहाल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया और कहा कि उसके सामने रखे गए आरोप प्रथम दृष्टया स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।

अदालत ने कहा, "सभी राज्यों को निर्देश दिया जाता है कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।" सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में गिरफ्तार ऐसे लोगों को भी रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि, अदालत ने कानून के अनुसार जांच जारी रखने की अनुमति दी।

ये निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए, जिनमें जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य स्थानों से शुरू हुए तथा बाद में महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और केरल तक फैले छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया गया है।

वहीं, सौरव दास ने भाजपा सांसद कंगना रनौत की छात्र प्रदर्शनकारियों पर की गई टिप्पणी का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, "उनकी अपनी पार्टी के सदस्य भी कंगना रनौत की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते या उन्हें गंभीरता से नहीं लेते, तो हम क्यों लें? मुझे नहीं लगता कि जेन जी, जेन अल्फा या नई पीढ़ी का कोई भी व्यक्ति उन्हें गंभीरता से लेता है या उनकी बात सुनता है।"

उन्होंने कहा, "वह अब एक राजनेता हैं। हिमाचल प्रदेश में अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें लगा था कि सांसद का काम बहुत कम होगा, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि सांसद होना बहुत मेहनत का काम है। इससे उनकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।"

अभिनेत्री से राजनेता बनीं कंगना रनौत ने हाल ही में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रदर्शन के दौरान अशोभनीय भाषा और व्यक्तिगत हमले समाज के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। रनौत ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई पोस्ट साझा करते हुए प्रदर्शन के वीडियो को घिनौना बताया था। भाजपा सांसद ने प्रदर्शनकारियों के तौर-तरीकों और उनकी भाषा की भी आलोचना की थी।
Amar Ujala Ltd published this content on July 28, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 28, 2026 at 13:57 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]