Amar Ujala Ltd

09/04/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/03/2026 19:02

अल नीनो और सूखे का असर: इंडोनेशिया में घटेगा पाम तेल उत्पादन; क्या भारत में बढ़ेंगी कीमतें

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अल नीनो और सूखे का असर: इंडोनेशिया में घटेगा पाम तेल उत्पादन; क्या भारत में बढ़ेंगी कीमतें?

Fri, 04 Sep 2026 06:18 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 04 Sep 2026 06:18 AM IST
सार

इंडोनेशिया में अल नीनो और सूखे से पाम तेल का उत्पादन 50 लाख टन तक घटने का अनुमान है। ऊपर से बी50 नीति से घरेलू खपत बढ़ने वाली है। ऐसे में वैश्विक बाजार में आपूर्ति घट सकती है और भारत की चिंता बढ़ सकती है। क्या इसका असर आपकी रसोई के तेल के दाम पर भी पड़ेगा? पढ़िए रिपोर्ट

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क्या सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर बढ़ेगी निर्भरता? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन (गैपकी)ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो और सूखे के चलते इंडोनेशिया में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) उत्पादन में 50 लाख टन तक की भारी गिरावट आ सकती है। इसका असर अगले साल की शुरुआत से ही वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर साफ दिखने लगेगा।
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इंडोनेशिया में एक तरफ मौसम की मार से फसल पर खतरा है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के नेतृत्व में सरकार डीजल आयात घटाने के लिए पाम-आधारित बायोडीजल की ब्लेंडिंग 40 फीसदी (बी40) से बढ़ाकर 50 फीसदी (बी50) करने जा रही है।
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गैपकी के चेयरमैन एडी मार्टोनो के अनुसार, देश में कुल 5.3 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है लेकिन बी50 नीति लागू होने से अकेले बायोडीजल के लिए 1.63 से 1.70 करोड़ टन पाम तेल की खपत घरेलू स्तर पर ही हो जाएगी। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाने वाले निर्यात मात्रा में भारी कटौती होगी यानी वैश्विक बाजार के लिए पाम तेल की उपलब्धता तेजी से घटेगी।
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अन्य तेलों पर भी दिखेगा असर : पाम तेल दुनिया का सबसे सस्ता खाद्य तेल है। जब पाम तेल महंगा होता है, तो मांग तुरंत सोयाबीन और घरेलू सरसों तेल की तरफ शिफ्ट होती है। नतीजतन, सरसों और रिफाइंड तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

भारत में कितना असर पड़ेगा?
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का लगभग 55 से 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा (सालाना करीब 90-100 लाख टन) पाम तेल का होता है। भारत अपनी पाम तेल की जरूरतें मुख्य रूप से दो ही देशों, इंडोनेशिया और मलेशिया, से पूरी करता है। यदि इंडोनेशिया में निर्यात घटता है और साथ ही दूसरे बड़े उत्पादक मलेशिया में भी अल-नीनो के कारण फसल कमजोर होती है, तो भारत पर इसका असर गंभीर होगा।

खाद्य तेल का डेढ़ महीने का स्टॉक
सरकार ने कहा कि देश में खाद्य तेल पर चिंता की कोई बात नहीं है। बाजार में 14-15 लाख टन खाद्य तेल का स्टॉक है, जो करीब डेढ़ महीने की घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है। सितंबर से सोयाबीन और मूंगफली की नई फसल की आवक शुरू होने की उम्मीद है।
  • 50 लाख टन तक उत्पादन में गिरावट आने का अनुमान
  • 60% हिस्सा आयात करता है भारत इंडोनेशिया से कुल तेल का

आयात में बढ़ोतरी...
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 से अब तक देश में 120 लाख टन खाद्य तेल का आयात हो चुका है। पिछले साल इसी अवधि में करीब 116 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ था। इस तरह इस साल अब तक आयात करीब 4 लाख टन अधिक रहा है। भारत हर साल करीब 160 लाख टन खाद्य तेल का आयात करता है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 04, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 04, 2026 at 01:02 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]