Amar Ujala Ltd

09/18/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/17/2026 20:49

'अच्छा समझौता होगा या कोई समझौता नहीं होगा': ट्रंप का ईरान को बड़ा संदेश; क्या जल्द खत्म होगा युद्ध

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'अच्छा समझौता होगा या कोई समझौता नहीं होगा': ट्रंप का ईरान को बड़ा संदेश; क्या जल्द खत्म होगा युद्ध?

Fri, 18 Sep 2026 07:27 AM IST
निर्मल कांत एएनआई, वाशिंगटन।
एएनआई, वाशिंगटन। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 18 Sep 2026 07:27 AM IST
सार

ईरान के साथ समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका सिर्फ अच्छे समझौते पर ही राजी होगा। उन्होंने कहा कि तेहरान समझौता चाहता है, लेकिन अभी तैयार नहीं है। अब जीसीसी देशों के नेताओं के साथ होने वाली बैठक पर नजर है, क्या यहां से युद्ध खत्म करने का रास्ता निकलेगा? पढ़िए रिपोर्ट

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ईरान को लेकर ट्रंप का सख्त संदेश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान वाशिंगटन के साथ समझौता करना चाहता है। लेकिन उनकी राय में ईरान अभी इसके लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि कोई भी समझौता अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप की खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी के सदस्य देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों से मुलाकात होने की उम्मीद है।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने 'एबीसी 11' से बातचीत में कहा, ईरान समझौता करना चाहता है। मेरी राय में, वे तैयार नहीं हैं। हम या तो ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा हो या फिर कोई समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनका प्रशासन ईरान के साथ जारी संघर्ष के अगले चरण का आकलन कर रहा है। प्रशासन युद्ध के बाद की रणनीति भी तैयार कर रहा है।
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एक्सिओस ने तीन सूत्रों के हवाले से बताा कि ट्रंप की छह जीसीसी देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात होने की उम्मीद है। इन छह देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। प्रस्तावित बैठक में युद्ध के बाद की रणनीति को लेकर वाशिंगटन के विचारों पर चर्चा हो सकती है। संघर्ष में अगले कदमों पर भी बात हो सकती है।
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ये भी पढ़ें: ईरान पर प्रतिबंधों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में टकराव: रूस और चीन का अमेरिकी प्रस्ताव पर वीटो, ट्रंप को झटका

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को शुरुआती निमंत्रण भेजे थे। इस बैठक में दूसरे अरब और इस्लामी देशों के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है। ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वाशिंगटन 'युद्ध के अंत की ओर' बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अमेरिका को ईरान की ओर से सीधे संदेश मिला है कि तेहरान समझौता करना चाहता है।

खाड़ी देशों में अमेरिका के कई सैन्य अड्डे हैं। संघर्ष के दौरान इन देशों पर ईरान की ओर से हमले हुए हैं। तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में रुकावटों का असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है।

ट्रंप ने किन सरकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए?
ट्रंप ने गुरुवार शाम (स्थानीय समय) व्हाइट हाउस में 100 से ज्यादा शिकार करने वालों, मछली पकड़ने वालों और बाहरी गतिविधियों से जुड़े उद्योग (आउटडोर) के प्रतिनिधियों की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। इन आदेशों का मकसद शिकार और मछली पकड़ने के अवसरों को बढ़ाना है। कुछ संघीय नियमों में बदलाव करना भी इसका हिस्सा है।

मछली पकड़ने के नियमों पर बात करते हुए ट्रंप ने राष्ट्रपति के अधिकारों के दायरे का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, इस पद की ताकत बहुत ज्यादा है। मैं मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा सकता था और जॉनी का कारोबार पूरी तरह बंद कर सकता था। मुझे लगता है कि मैं ऐसा सिर्फ एक या दो दिन के लिए करने जा रहा हूं। जब तक वह मुझे फोन करके नहीं कहता- राष्ट्रपति जी, आप मेरा कारोबार बंद कर रहे हैं।

ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत लाखों एकड़ संघीय जमीन शिकारियों और मछली पकड़ने वालों के लिए खोली जाएगी। उन्होंने एक और आदेश पर भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य समुद्री मछली पकड़ने वालों, नाव चलाने वालों, चार्टर कैप्टनों और तटीय समुदायों पर लागू संघीय नियमों को कम करना है।

ट्रंप की शक्ति सीमित करने वाला प्रस्ताव
इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पर मतदान किया। प्रस्ताव के पक्ष में 220 और विरोध में 204 वोट पड़े। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने के ट्रंप के अधिकार को सीमित करना है। यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद सेठ मौल्टन ने पेश किया था। इसमें प्रशासन से कहा गया है कि वह ईरान के साथ संघर्ष से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाए। हालांकि, इसमें कुछ खास रक्षात्मक परिस्थितियों को अपवाद रखा गया है। प्रस्ताव के समर्थन में सात रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ वोट किया।

अलग से, प्रतिनिधि सभा ने 2026 का लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध कानून भी पारित कर दिया। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को कुछ शर्तों के आधार पर उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on September 18, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 18, 2026 at 02:49 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]