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झांसी में साइबर ठगी करने वाले गिरोह के भंडाफोड़ के बाद इसमें शामिल आरोपियों के आर्थिक साम्राज्य को देख पुलिस अफसर भी हैरान रह गए। पूछताछ में मालूम चला कि गिरोह के मास्टरमाइंड अरमान करोड़ों रुपये का मालिक है, जबकि पिछले साल तक उसके पिता ऑटो चलाते थे।
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एक साल पहले वह गढिया फाटक में एक छोटे मकान में परिवार के साथ रहता था। साइबर जालसाजों के संपर्क में आने के बाद से उसके रहन-सहन में तेजी से बदलाव आया। कुछ महीनों में प्रेमनगर इलाके में दो फ्लैट ले लिए। झांसी के पॉश इलाके में भी घर खरीद लिया।
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अब वह लग्जरी कार से चलता है। अदनाम अपना गेमिंग पैनल भी चलाता था, इसकी आड़ में वह म्यूल खाते लेता था। पुलिस को उसके कई सारे बैंक खातों को खंगालने पर अरमान के पास ही करीब 20 करोड़ रुपये की संपत्ति मिली।
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पुलिस का कहना है कि पिछले महीने ही हर तीन दिन में उसके खाते में 6.75 लाख रुपये क्रेडिट हो रहे थे। अरमान ने ही गिरोह में सत्यम, अदनाम, आदिल, जान पाल, अभिषेक और अर्चित को जोड़ा। इसमें इनमें सबके काम बंटे हुए थे। सत्यम उसका सबसे करीबी था। उसके जिम्मे ही अंतिम तौर पर डेबिट कार्ड से पैसा निकालने का होता था।
गिरोह के भंडाफोड़ होने के वह भाग निकला वहीं, गिरोह के अन्य सदस्य भी शाही अंदाज के साथ रहते थे। खाती बाबा निवासी अर्श एवं मो. फैज भी यूएसटीडी बदलने में माहिर थे। इस वजह से अरमान ने इन दोनों को अपने गिरोह में शामिल किया हुआ था। आदिल और अदनान पहले भी सट्टे के आरोप में जेल जा चुके।
इस वजह से साइबर जालसाजों की पसंद है यूएसडीटी
साइबर जालसाज क्रिप्टो करेंसी के तौर पर सबसे अधिक यूएसडीटी का इस्तेमाल करते हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक यूएसडीटी कई खूबियों की वजह से साइबर जालसाजों द्वारा पसंद किया जाता है। इसके जरिये न सिर्फ तेजी से पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है, बल्कि अलग-अलग देशों के वॉलेट में भी इसे भेजना सबसे अधिक आसान है। लेनदेन के लिए पारंपरिक बैंक खाते की भी जरूरत नहीं पड़ती। ठग अपने असली नाम के बजाय अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि जालसाज एक के बाद एक जल्दी से रकम को आगे भेजते जाते हैं, इस वजह से स्रोत का पता लगा पाना पुलिस के लिए भी आसान नहीं रह जाता। इसकी कीमत भी डॉलर के करीब स्थित रहती है, जबकि बिट कॉइन जैसी क्रिप्टो अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाली मुद्रा होती है। इस वजह से इसमें खतरा भी कम रहता है। पिछली माह पकड़े गए साइबर जालसाज भी यूएसडीटी में ही पैसों को बदलते थे। इसके लिए यूमनी नामक एप का इस्तेमाल करते थे।
चाइनीज गेमिंग का सर्वर हैक करने वाले गिरोह से जुड़े तार भी खंगाल रही पुलिस
प्रेमनगर पुलिस ने ही मई महीने में चाइनीज गेमिंग का सर्वर हैंक करके करोड़ों रुपये की ठगी का भंडाफोड़ किया था। इनमें भी पकड़े गए सभी आरोपी प्रेमनगर के ही रहने वाले थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही कि अरमान के गैंग के सहारे ही यह जालसाज भी करोड़ों रुपये खपाने का काम करते थे।
पुलिस इनके आपसी तार भी खंगालने में जुटी है। प्रेमनगर पुलिस ने प्रेमनगर पुलिस ने 27 मई को प्रेमनगर के स्कूलपुरा मोहल्ला निवासी रागिब अहमद को गिरफ्तार करके गिरोह का भंडाफोड़ किया था। इस गिरोह के लोग चाइनीज गेमिंग वेबसाइट के पेमेंट सर्वर को हैक करके उसका पैसा अपने खातों में ट्रांसफर कराते थे। गिरोह के साथ मिशन कंपाउंड निवासी सनी अमराया, पानी की टंकी निवासी सोहिल खान, नगरा निवासी अनुभव सिंह, ईसाई टोला निवासी दानिश खान, महावीरन निवासी सौरभ विश्वकर्मा एवं सुमेर नगर निवासी देवेश कुमार को गिरफ्तार किया था जबकि पुलिस हर्ष एवं सलाम को पुलिस अभी तक तलाश कर रही है।
दोनों ही गिरोह के अधिकांश सदस्य एक ही मोहल्ले के रहने वाले हैं। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि दूसरे सर्वर हैक करके उससे भी इन जालसाजों ने उगाही की। पुलिस इसको भी खंगालने में जुटी है।
114 म्यूल खातों को खंगाल रही पुलिस
करोड़ों रुपये खपाने वाले साइबर जालसाज इसके लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल करते थे। यह सारे म्यूल खाते प्रेमनगर के गढिया गांव, ईसाई टोला, सुम्मेर नगर आदि इलाकों के लोगों के खोले गए। पुलिस को अभी तक 114 म्यूल खातों का पता चला है। इसके जरिए ही जालसाजी की रकम को मंगवाया जाता था।
साइबर ठगी के 403 करोड़ रुपये खपाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार
साइबर फ्रॉड की रकम को निकालकर उसे यूएसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) में बदलने वाले गिरोह का प्रेमनगर पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए शुक्रवार को छह जालसाज गिरफ्तार कर लिए, जबकि तीन आरोपी अभी वांछित हैं। छानबीन में मालूम चला कि 56 बैंक खातों में साइबर ठगी करके करीब 403 करोड़ रुपये जमा कराए गए। इनमें झांसी में ही 35 बैंक खाते पाए गए, इनका संचालन गिरफ्तार आरोपी कर रहे थे।
पुलिस ने इनसे मिले 500 यूएसडीटी सीज कराने के साथ ही सात मोबाइल फोन, डायरी भी बरामद की है। प्रेमनगर थाने में नौ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। पुलिस वांछितों को तलाश रही है। एसपी (साइबर) अरीबा नोमान के मुताबिक समन्वय पोर्टल में 325 साइबर फ्रॉड की शिकायतें की छानबीन करने पर 56 बैंक खातों का पता चला, जिनमें पैसा भेजा जाता था। करीब 403 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल सामने आई।
प्रेमनगर थाने के साइबर शाखा प्रभारी उपनिरीक्षक शिवकांत शुक्ल की टीम ने सुरागकशी करके ईसाईटोला निवासी दीपक वर्मा उर्फ सत्यम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जान पाल निवासी कृष्णानगर कॉलोनी खेरा, अभिषेक चौधरी निवासी सुम्मेर नगर और अर्चित श्रीवास्तव निवासी लहर गिर्द का पता लगाकर शुक्रवार को इनको गिरफ्तार कर लिया।
अरमान है मास्टरमाइंड
पूछताछ में मालूम चला कि गिरोह का मास्टरमाइंड गढिया फाटक निवासी अरमान है। उसके साथ ही अर्श एवं मो.फैज भी शामिल हैं। इन तीनों को पुलिस तलाश रही है। छानबीन में मालूम चला कि गिरोह के सदस्य देश भर में साइबर ठगी करने वाले गिरोहों से रकम अपने नियंत्रण वाले बैंक खातों में मंगाते थे। इसके बाद रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाने के बाद उससे यूएसडीटी खरीदते थे। रकम को नंबर एक में बदलने और अपना कमीशन काटने के बाद साइबर ठगों तक रकम पहुंचाते थे।
सत्यम को रंगे हाथ पकड़ा
साइबर शाखा प्रभारी उपनिरीक्षक शिवकांत शुक्ला को भनक लगने के बाद उन्होंने सत्यम समेत अन्य आरोपियों के बैंक खातों एवं लेनदेन की निगरानी शुरू की। शुक्रवार को सत्यम को साइबर ठगी की रकम को यूएसटीडी में बदलते रंगे हाथ पकड़ा। पिछले एक सप्ताह में ही आरोपियों ने करीब 9.75 लाख रुपये उस खाते में बदले थे। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क, देशभर में जुड़े साइबर ठगों, बैंक खातों और रकम को इधर-उधर करने वाले अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क की कड़ियां कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं। पुलिस आगे मामले की छानबीन कर रही है।