01/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 01/20/2026 06:28
राज्यसभा के माननीय उपसभापति हरिवंश ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) के पूर्ण सत्र को संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए विधानसभाओं को अधिक सक्षम बनाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर बल दिया और साथ ही इस तकनीक को सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाए जाने वाले विभिन्न आवश्यक कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने संसद में एआई के उपयोग के विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों और तौर-तरीकों को प्रस्तुत करने के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं और संसद के बीच अधिक तालमेल का आह्वान किया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विधानसभाओं के संस्थागत ज्ञान का प्रभावी ढंग से उपयोग संसद और राज्य विधानसभाओं दोनों के लिए किया जा सके।
उन्होंने नीतिगत सूचनाओं के सामंजस्यपूर्ण समन्वय और सुलभता के दृष्टिकोण पर बल देते हुए कहा, "विधानमंडल उन सभी आधिकारिक नीतिगत दस्तावेजों के संरक्षक होते हैं जिनमें कानून, बजट आदि पर विभिन्न बहसें शामिल हैं। ये दस्तावेज सदन में पेश किए जाने पर सदन का हिस्सा बन जाते हैं। यह जानकारी अक्सर विभिन्न मंत्रालयों में बिखरी रहती है। संसद और राज्य विधानसभाएं एआई का उपयोग करके ऐसे मंच का निर्माण कर सकती हैं जिससे ये सभी के लिए आसानी से सुलभ हो सकें। इससे इन संवैधानिक संस्थाओं को ज्ञान के केंद्र के रूप में निर्मित करने को बढ़ावा मिलेगा।"उन्होंने एक 'डेटा लेक' की आवश्यकता पर भी बल दिया जिसमें विधायी बहसों की अनूठी भाषा, शब्दावली और देश भर के दस्तावेजों का उपयोग भारतीय संदर्भ के लिए सबसे उपयुक्त तकनीक को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा सके।
हरिवंश ने एक हाइब्रिड तंत्र बनाने का आह्वान किया जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रशिक्षण और उससे प्राप्त होने वाले परिणामों पर मानव की निगरानी रहे। उन्होंने इस पर बल देते हुए कहा, "संसदीय उपयोग के लिए एआई की उपयुक्तता केवल उसकी एल्गोरिथम क्षमता के कारण नहीं है। यह वह ज्ञान है जिस पर इस तकनीक को प्रशिक्षित किया जाता है। इसलिए संसदीय एआई को संसद के भीतर ही प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और उसे सावधानीपूर्वक संकलित संसदीय आंकड़ों से पोषित किया जाना चाहिए। कौशल अर्जित किए जा सकते हैं, स्थानांतरित किए जा सकते हैं या बाहरी स्रोतों से प्राप्त किए जा सकते हैं। लेकिन, ज्ञान संदर्भ से जुड़ा होता है और संस्था में गहराई से समाहित होता है। संसदीय ज्ञान अद्वितीय है। यह दशकों से बहसों, निर्णयों, परंपराओं और संवैधानिक कामकाज के तौर-तरीकों के माध्यम से निर्मित होता है।"
उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि संसद में विभिन्न भाषाओं में सेवाएं प्रदान करने के लिए एआई-आधारित ट्रांसक्रिप्शन और एक ही समय में एक साथ अनुवाद का परीक्षण किया जा रहा है। अभी सांसद सदन की कार्यवाही और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों को अपनी पसंद की भाषा में देख सकते हैं। यह सुविधा एआई की मदद से उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त उपसभापति ने यह भी बताया कि प्रश्नकाल के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों की स्वीकार्यता की जांच, पिछले उदाहरणों और निर्णयों की खोज जैसे नियमित प्रशासनिक कार्य भी एआई की मदद से किए जा सकते हैं। उन्होंने कर्मचारियों और विधायकों के लिए अधिक जागरूकता और प्रशिक्षण सत्र शुरु करने का भी आह्वान किया ताकि वे अपनी-अपनी भूमिकाओं को कुशलतापूर्वक निभा सकें।
इस दौरान डिजिटल उपकरणों के उपयोग के अतिरिक्त, विधायकों का उत्तरदायित्व बढ़ाने और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। यह सम्मेलन 19 जनवरी को माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति में शुरू हुआ था।
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