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09/14/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/13/2026 19:53

भारत-ईयू एफटीए: यूरोप में भारतीय कारों पर घटेगा शुल्क, कितनी और कौन सी कारें होंगी सस्ती, देश को कितना फायदा

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भारत-ईयू एफटीए: यूरोप में भारतीय कारों पर घटेगा शुल्क, कितनी और कौन सी कारें होंगी सस्ती, देश को कितना फायदा?

Mon, 14 Sep 2026 06:48 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 14 Sep 2026 06:48 AM IST
सार

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय कारों के लिए यूरोपीय बाजार में बड़ी संभावनाएं बन सकती हैं। पहले साल 2.5 लाख भारतीय कारों को 8 प्रतिशत शुल्क पर प्रवेश मिलेगा और 10वें साल यह संख्या 4 लाख तक पहुंच जाएगी। शुल्क भी पांचवें साल शून्य हो जाएगा। लेकिन इसका फायदा किन कारों को मिलेगा, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए क्या व्यवस्था है और इससे भारत को कितना लाभ हो सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...

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इलेक्ट्रॉनिक कार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए में भारतीय कारों के लिए यूरोपीय बाजार का रास्ता आसान करने का प्रावधान किया गया है। समझौते के मसौदे के अनुसार, पहले साल भारत में बनी 2.5 लाख यात्री कारों को यूरोपीय संघ के बाजार में 8 प्रतिशत रियायती शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। यह संख्या धीरे-धीरे बढ़कर समझौते के 10वें साल से 4 लाख वाहन सालाना हो जाएगी। खास बात यह है कि इन कारों पर लगने वाला शुल्क भी चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा और पांचवें साल से शून्य हो जाएगा।
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कितनी भारतीय कारों को मिलेगा कम शुल्क का फायदा?

पहले साल 2.5 लाख भारतीय कारों को रियायती शुल्क पर यूरोपीय बाजार में प्रवेश मिलेगा। यह व्यवस्था भारतीय मूल की आंतरिक दहन इंजन यानी आईसीई कारों और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों यानी एचईवी के लिए है। हालांकि, इसके लिए कार की सीआईएफ कीमत 50 हजार यूरो तक होनी चाहिए। सीआईएफ कीमत में वाहन की वास्तविक खरीद कीमत के साथ उसे यूरोपीय संघ के बंदरगाह तक पहुंचाने का माल ढुलाई खर्च और बीमा शामिल होता है। इस तय कोटे के भीतर आने वाली कारों पर पहले साल 8 प्रतिशत शुल्क लगेगा।
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शुल्क 8 प्रतिशत से शून्य तक कैसे पहुंचेगा?

  • भारतीय कारों के लिए शुल्क में एक साथ कटौती नहीं होगी। इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा। समझौता लागू होने के पहले साल शुल्क 8 प्रतिशत रहेगा। दूसरे साल यह घटकर 6 प्रतिशत हो जाएगा। तीसरे साल 4 प्रतिशत और चौथे साल 2 प्रतिशत रह जाएगा।
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  • पांचवें साल से यह शुल्क पूरी तरह शून्य हो जाएगा। यानी तय कोटे के भीतर आने वाली पात्र भारतीय कारों को पांचवें साल से यूरोपीय बाजार में बिना आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा।

10 साल में कितनी कारें यूरोप भेजी जा सकेंगी?

  • रियायती शुल्क के साथ कारों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। पहले साल 2.5 लाख वाहनों से शुरुआत होगी। इसके बाद हर साल कोटा बढ़ता जाएगा और 10वें साल से यह 4 लाख वाहन सालाना हो जाएगा।
  • इसका मतलब है कि समझौते के शुरुआती वर्षों की तुलना में भारतीय कारों के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच काफी बढ़ सकती है। हालांकि, तय कोटे से ज्यादा वाहनों पर सामान्य एमएफएन यानी सबसे पसंदीदा देश वाला शुल्क लागू होगा।

50 हजार यूरो से महंगी कारों का क्या होगा?

50 हजार यूरो से ज्यादा कीमत वाली कारों को इस कोटा आधारित रियायती शुल्क का फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि, ऐसी कारों के लिए भी शुल्क में धीरे-धीरे कमी का प्रावधान है। इन वाहनों पर पहले साल 8 प्रतिशत शुल्क रहेगा और समझौते के 10वें साल यह शुल्क शून्य हो जाएगा। यानी कीमत के आधार पर कारों के लिए अलग-अलग व्यवस्था रखी गई है। 50 हजार यूरो तक की कारों को शुरुआती वर्षों में कोटा के भीतर विशेष रियायत मिलेगी।

इलेक्ट्रिक कारों के लिए क्या अलग व्यवस्था है?

बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन यानी बीईवी, प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन यानी पीएचईवी और आईसीई तथा एचईवी के अलावा दूसरी तकनीक वाली यात्री कारों के लिए अलग टैरिफ रेट कोटा रखा गया है। 40 हजार यूरो तक की सीआईएफ कीमत वाली इन कारों के लिए यह व्यवस्था समझौते के पांचवें साल से शुरू होगी। शुरुआत में 27,500 वाहनों को 8 प्रतिशत शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। यह कोटा नौवें साल 60,500 और 14वें साल से 1.25 लाख वाहन सालाना हो जाएगा। इस श्रेणी का शुल्क नौवें साल से खत्म हो जाएगा।

महंगी इलेक्ट्रिक और दूसरी तकनीक वाली कारों पर क्या नियम हैं?

  • 40 हजार यूरो से ज्यादा और 60 हजार यूरो तक की सीआईएफ कीमत वाली कारों के लिए पांचवें साल से 16,250 वाहनों का कोटा होगा। यह संख्या 14वें साल से 75 हजार वाहन सालाना हो जाएगी और शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा।
  • वहीं 60 हजार यूरो से ज्यादा कीमत वाली कारों के लिए पांचवें साल 6,250 वाहनों का कोटा होगा। यह नौवें साल 13,250 और 14वें साल से 25 हजार वाहन सालाना हो जाएगा। इस श्रेणी में भी नौवें साल से शुल्क खत्म कर दिया जाएगा।

भारत को कारों के अलावा और किन क्षेत्रों में फायदा मिल सकता है?

समझौते के मसौदे में कुछ भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए भी कोटा आधारित शुल्क रियायत का प्रावधान है। इनमें टेबल अंगूर, सूखे प्याज, खीरा और घेरकिन, शीरे से बनी रम और घी शामिल हैं। घी के लिए प्रभावी होने की तारीख से हर साल 1,000 मीट्रिक टन की कुल मात्रा पर आधार सीमा शुल्क की 50 प्रतिशत दर का प्रावधान किया गया है। ऐसे में एफटीए का असर केवल कारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कुछ भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों को भी यूरोपीय बाजार में रियायती प्रवेश का रास्ता मिल सकता है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है?

इस समझौते से भारतीय वाहन निर्माताओं को यूरोपीय बाजार में अधिक संख्या में कारें भेजने का मौका मिल सकता है। पहले साल 2.5 लाख वाहनों का कोटा और 10वें साल से 4 लाख वाहनों का कोटा इस बाजार में भारतीय कारों की पहुंच बढ़ाने की संभावना पैदा करता है। शुल्क का पांचवें साल शून्य होना भी भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय कंपनियां तय कीमत और तकनीक की शर्तों के भीतर कितनी कारें यूरोपीय बाजार में बेच पाती हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on September 14, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 14, 2026 at 01:53 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]