07/29/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/29/2026 11:31
गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है, गलियां सूनी पड़ी हैं और जिन रास्तों पर कभी खेती-किसानी की हलचल नजर आती थी, वहां अब परिवारों को अपने अपनों की वापसी का इंतजार है। किसान आंदोलन में गए हैं, लेकिन पीछे घरों में उनकी जिम्मेदारियां और परेशानियां रह गई हैं। कहीं बच्चे अपने पिता के लौटने की राह देख रहे हैं तो कहीं महिलाएं अकेले खेत, घर और पशुओं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कहीं तो घरवालों के गले से निवाला नहीं निगला जा रहा तो कहीं खाना ही नहीं बन रहा।
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