07/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/07/2026 11:44
PM's Address to the Indonesian Parliament
इंडोनेशिया के माननीय राष्ट्रपति जी,
उप-राष्ट्रपति जी,
माननीय Speakers,
पार्लियामेंट के सम्मानित सदस्य
Excellencies,
इंडोनेशिया के मेरे प्रिय भाइयों और बहनों,
आप सबको नमस्कार।
सलामत सियांग!
अपने 'सहाबत सेजाती' के बीच आकर मैं बहुत ही आनंदित हूं।
आपके बीच आना मेरे लिए बहुत सौभाग्य का विषय है। मैं 140 करोड़ भारतवासियों के प्रतिनिधि के रूप में मदर ऑफ डेमोक्रेसी के एक भाग्यशाली नागरिक के रूप में आपको सभी भारतीयों की तरफ से शुभकामनाएं देता हूं।
Hon'ble members,
इंडोनेशिया के लोगों ने, यहाँ के बच्चों ने, युवाओं और महिलाओं ने, आज के दिन को मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बना दिया है। आज की सुबह जिस तरह इंडोनेशिया के लोगों ने मुझे अपना प्रेम दिखाया है, जिस तरह स्वागत किया है, वह मैं कभी भूल नहीं सकता। आज सुबह President Prabowo ने copyright की बात कही थी। मैं उन्हें यही कहूंगा की इस प्रेम पर, इस स्नेह पर, इस दोस्ती पर, इस आदरभाव पर, किसी का copyright हो ही नहीं सकता। President Prabowo से मेरी मित्रता copyright की सारी सीमाओं से परे हैं।
साथियों,
आज सुबह मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पाने का भी सौभाग्य मिला। मैं कोटि कोटि भारतीयों के प्रति इंडोनेशिया के लोगों के स्नेह को, ह्रदय से, नमृता से, स्वीकार करता हूँ। यह सम्मान, हम दोनों देशों के डेमोक्रेटिक वैल्यूज का है, साझी विरासत का है, और दोनों देशों के मज़बूत होते रिश्तों का है। मैं आप सभी साथियों का, President Prabowo ji का, इंडोनेशिया की सरकार, और यहाँ की जनता का, ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
Honourable Members,
आज भारत और इंडोनेशिया, इतिहास के एक अहम पड़ाव पर एक साथ खड़े हैं। इस सदी का पहला क्वार्टर बीत चुका है, और अब आने वाले 25 वर्ष हम दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। आज इंडोनेशिया की इस महान धरती पर मैं आपके समक्ष दोनों देशों के साझा विकास का विश्वास लेकर के आय़ा हूं। मैं ये संकल्प लेकर आया हूं कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर पूरी मानवता को एक नई ऊर्जा से भर सकते हैं।
जब भारत के 140 करोड़ नागरिक, इंडोनेशिया के 29 करोड़ नागरिक, साझा प्रयासों से मिलकर आगे बढ़ेंगे, तो दुनिया एक नया इतिहास रचते हुए देखेगी।
भारत दुनिया का वो देश है, जो विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है और इसलिए हम भारत में कहते हैं- सबका साथ-सबका विकास : Together with all, development for all.
आज मैं यही मंत्र, यही भावना लेकर, इंडोनेशिया के आप सभी संसद सदस्यों के बीच आया हूं।
Honourable Members,
हमारी राजधानियां भले ही हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन, समुद्र में हमारे बीच केवल 150 किलोमीटर की ही दूरी है। दूसरे देशों में समुद्र भले ही सीमाओं और दूरियों का कारण रहा हो, लेकिन, भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र दूरी का प्रतीक नहीं रहा। समुद्र हमारे बीच एक सेतु है। ये हमारे साझा भविष्य का केंद्र है।
India, Indonesia और Indian Ocean…. ये नाम हमारे आपसी जुड़ाव की गवाही देते हैं। हजारों वर्षों तक हमारे पोर्ट्स दुनिया को जोड़ते रहे। हमारे जहाज़, व्यापार और संस्कृति को दूर-दूर तक लेकर गए। हमारे पास समुद्र से जुड़ी भविष्य की अनेक संभावनाएं हैं। इसलिए मैं आज समुद्र की इसी विशालता को आधार बनाकर, आपसे भारत-इंडोनेशिया के संबंधों को नई उंचाई देने का आग्रह करूंगा।
Honourable Members,
इंडिया और इंडोनेशिया सिर्फ समुद्र ही शेयर नहीं करते, हमारी history भी shared है। हमारा संबंध रामायण और महाभारत की विरासत है। हमारा संबंध, सदियों पहले नालंदा के ज्ञान से है। हमारा संबंध, वायांग, नृत्य और संगीत से है।
हम बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसी अद्भुत स्मारकों के जरिए जुड़े हैं। हम इंडोनेशिया के राष्ट्रीय प्रतीक गरुडा से जुड़े हैं। हम बाली जात्रा के उत्सव और उसके उल्लास से जुड़े हैं। और, जब हम स्वाद की बात करते हैं तो, क्रुपुक और पापड़ में कौन ज्यादा crunchy है, ये कहना कठिन हो जाता है। लेकिन ये बात तो तय है मसाला और बुम्बु, दोनों हमारे जीवन में फ्लेवर लाते हैं।
साथियों,
भारत के पश्चिमी छोर पर स्थित गुजरात मेरा गृह राज्य है। कहा जाता है कि सदियों पहले गुजरात से कुछ व्यापारी और सूफी संत समुद्र के रास्ते ही इंडोनेशिया आए थे। वे अपने साथ इस्लाम के विचार और इस्लाम के जीवन-मूल्य भी लेकर यहाँ आए। आज भी गुजरात के पटोला वस्त्र यहाँ सम्मान और प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं। आज भी इंडोनेशिया की बाटिक कला में उनकी छाप दिखाई देती है।
और इसीलिए ही राष्ट्रपति सुकर्णो ने भी कहा था- "इंडोनेशिया और भारत के लोग रक्त और संस्कृति के संबंधों से जुड़े हैं।"
साथियों,
ऐसा कितना कुछ है, जो हमारे पूर्वजों ने साथ-साथ जिया है। हम लोगों ने लंबे समय तक विदेशी शासन का सामना किया। हम दोनों ही राष्ट्र लगभग एक ही समय स्वतंत्र हुये। इंडोनेशिया 1945 में, और भारत 1947 में! और, जब स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर संप्रभुता की बात आई तो भारत संयुक्त राष्ट्र में इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन की मजबूत आवाज़ बना।
उस दौर में,
आदरणीय बीजू पटनायक जी ने जो भूमिका निभाई जिस तरह उन्होंने प्रधानमंत्री सुतान शहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को सुरक्षित भारत पहुंचाया, वो घटना दोनों ही देशों को और करीब ले आई।
Honourable Members,
एक और बात जो हमें एक दूसरे के करीब लाती है वो है हमारा मजबूत लोकतंत्र और लोकतंत्र में विविधता। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है, Mother of Democracy है। और, इंडोनेशिया दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी डेमोक्रेसी है।
भारत में सैकड़ों भाषाएँ और अनेक परंपराएँ हैं, तो इंडोनेशिया में भी सैकड़ों भाषाएँ और अनेक परंपराएं हैं। भारत में वसुधैव कुटुम्बकम् का मंत्र है तो इंडोनेशिया में भिन्नेका तुंग्गल ईका का विचार है। हम दोनों ने अपने लोकतंत्र में इस विविधता को ही अपनी एकता की नींव बना लिया है।
Honourable Members,
1950 में जब भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था उस समारोह के मुख्य अतिथि भी राष्ट्रपति सुकर्णो ही थे, जिसका उल्लेख आदरणीय स्पीकर महोदय ने किया। और उस दौर में बांडुंग सम्मेलन में राष्ट्रपति सुकर्णो और प्रधानमंत्री नेहरू ने दुनिया को ये स्पष्ट संदेश दिया कि स्वतंत्र देशों को अपने निर्णय स्वयं लेने का अधिकार है।
Honourable Members,
लोकतन्त्र की ताकत क्या होती है इंडोनेशिया ने ये रेफॉर्मासी के जरिए दुनिया को दिखाया है। पिछले दो दशकों में इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है और करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
भारत का लोकतांत्रिक अनुभव भी यही कहता है। आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। और हमारे यहां भी पिछले एक दशक में 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय, गरीबी से बाहर आए हैं।
और इसलिए मित्रों,
जब भारत और इंडोनेशिया साथ खड़े होते हैं, तो दुनिया का ये विश्वास मजबूत होता है कि लोकतंत्र अवसर देता है, लोकतंत्र विश्वास देता है,
और लोकतंत्र भविष्य बनाता है। और मुझे अटूट विश्वास है हमारे ये लोकतांत्रिक मूल्य और साझा आकांक्षाएँ भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगी।
Honourable Members,
एक साथ आजाद देशों के तौर पर हमने जो सफर शुरू किया था अब उस आजादी के सौ वर्ष भी हम एक साथ पूरे करने जा रहे हैं। यहाँ इंडोनेशिया में आप एमास 2045 के महत्वाकांक्षी विज़न पर चल रहे हैं। और भारत में हम 'विकसित भारत 2047' का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। अपने इन लक्ष्यों को हासिल करने में हम एक दूसरे के पूरक बन सकते हैं।
हम दुनिया की सबसे यूथफुल सोसायटीज हैं। हम दुनिया की सबसे तेज़ी से आगे बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में हैं। हम दोनों major maritime powers हैं। हम ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज़ हैं। हम प्राचीन सभ्यताएं भी हैं, और भविष्य के लिए नैचुरल पार्टनर्स भी हैं।
इस यात्रा में हम एक दूसरे के पार्टनर्स भी बनें, और स्ट्रेंथ भी बनें। इसी विज़न को लेकर आज राष्ट्रपति प्रबोवो से मेरी विस्तृत चर्चा भी हुई है। हमारे उद्देश्य बहुत स्पष्ट है। भारत और इंडोनेशिया के बीच जो सद्भाव और विश्वास है, हमें उसे अपने नागरिकों के लिए नए अवसरों में बदलना है।
पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंचा है। भारत की सौ से अधिक कंपनियां इंडोनेशिया में काम कर रही हैं। निश्चित तौर पर हम साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन, आगे अभी और भी असीमित संभावनाएं हमारा इंतज़ार कर रही हैं।
Honourable Members,
Futuristic सेक्टर्स में भारत और इंडोनेशिया के बीच अनंत आकाश को छूने का सामर्थ्य है। उदाहरण के तौर पर, स्पेस टेक्नालजी। आज पूरी दुनिया स्पेस में भारत की क्षमता का लोहा मान रही है। और, भारत, इसमें इंडोनेशिया को अपना natural पार्टनर मानता है।
बियाक में सैटेलाइट ट्रैकिंग सुविधाएँ, लंबे समय से भारत के स्पेस प्रोग्राम को सहयोग देती रही हैं। भारत ने भी इंडोनेशिया के कई सैटेलाइट लॉन्च किए हैं, और, capacity building में अपना योगदान दिया है। अब इस सहयोग को और आगे ले जाने का समय है। सैटेलाइट एप्लिकेशन्स में हम साथ काम कर सकते हैं। भारत, इंडोनेशिया में सैटेलाइट लॉन्च सुविधा विकसित करने में भी सहयोग देने के लिए तत्पर है।
साथियों,
हमारी समुद्री विरासत को सहेजने के लिए हम 5 हजार साल पुराने पोर्ट सिटी लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स बना रहे हैं।
मैं चाहूंगा कि इंडोनेशिया भी इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़े।
Honourable Members,
आतंकवाद जैसे विषयों पर भारत और इंडोनेशिया, दोनों की एक राय रही है। पिछले वर्ष पहलगाम में जब जघन्य आतंकवादी हमला हुआ, इंडोनेशिया तब भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहा। मैं इसके लिए, राष्ट्रपति प्रबोवो और आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।
हमारे दोनों देश काउंटर-टेररिज्म पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप के माध्यम से साथ काम कर रहे हैं। इंटेलिजेंस, साइबर थ्रेट्स, आतंकी फंडिंग और डी-रेडिकलाइज़ेशन इन क्षेत्रों में हम और सहयोग बढ़ाकर, दुनिया में शांतिवादी ताकतों को मजबूती दे सकते हैं।
Honourable Members,
आज ग्लोबल ऑर्डर तेजी से बदल रहा है, और ऐसे में हम जैसे विकासशील देश समान भागीदारी और अपनी बड़ी भूमिका मांग रहे हैं। इस वैश्विक परिदेश में, भारत का स्पष्ट मानना है यूएन सेक्योरिटी काउंसिल में रिफॉर्म को और टाला नहीं जा सकता।
2022 में इंडोनेशिया की जी-20 अध्यक्षता और, 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता, दोनों ने विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास किया।
इंडोनेशिया की बेबास-आक्टिफ की परंपरा और भारत का strategic autonomy के लिए कमिटमेंट वैश्विक विषयों पर हमें साथ खड़े होने के लिए मजबूत आधार देते हैं।
भारत free, open और inclusive Indo-Pacific का प्रबल समर्थक है। भारत इंडो-पैसिफिक में freedom of navigation की बात करता है। इसके लिए हमने आसियान को केंद्र में रखा है। हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी भी आसियान सेंट्रिक है। भारत और आसियान की कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप लगातार आगे बढ़ रही है। इसलिए बहुत आवश्यक है कि भारत और इंडोनेशिया इस दिशा में निरंतर काम करते रहें।
Honourable Members,
हमारे सामने एक और बड़ा अवसर है। पिछले वर्ष इंडोनेशिया ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना है। इस वर्ष भारत ही ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। ब्रिक्स का ये मंच और अधिक व्यवहारिक हो, अधिक संतुलित हो, ग्लोबल साउथ की ज़रूरतों के प्रति और अधिक संवेदनशील हो,
हम इसके लिए साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
Honourable Members,
आज, इंडोनेशिया के सभी पार्लियामेंट मेंबर्स के सामने, मैं भारत-इंडोनेशिया साझेदारी के एक नए युग का आह्वान करता हूं। गंगा और महाकाम की धाराओं की तरह, हमारी सभ्यताओं ने सदियों से विचारों, आस्था, व्यापार और संस्कृति को जोड़ा है। आज, उसी ऐतिहासिक प्रवाह को भविष्य की नई ऊर्जा देने के लिए, मैं आप सभी के समक्ष Ganga-महाकाम Vision प्रस्तुत करना चाहता हूं।
यह vision हमारी साझेदारी को केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं रखता। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति, समृद्धि, सुरक्षा और shared progress का मार्ग प्रशस्त करता है।
पहला… Civilizational Connect
हम अपने सभ्यतागत जुड़ाव को नई पीढ़ियों की चेतना से जोड़ेंगे। रामायण से बोरोबुदुर तक, समुद्री यात्राओं से सांस्कृतिक संवाद तक -हम अपने साझा इतिहास को भविष्य की शक्ति बनाएंगे। इसके लिए हमें भारत-इंडोनेशिया Civilizational Dialogue शुरू करना चाहिए।
दूसरा… Shared Development
विकसित राष्ट्र बनने की अपनी-अपनी यात्राओं में भारत और इंडोनेशिया अटल साझेदार रहेंगे। इंडोनेशिया का "एमास" Vision और भारत का विकसित भारत संकल्प - एक-दूसरे को गति देंगे, एक-दूसरे को शक्ति देंगे, और हमारे लोगों के लिए नई opportunities का निर्माण करेंगे।
तीसरा… Security and Strategic Trust
हम defence और security cooperation को नई ऊंचाई देंगे। हम अपनी national capacities को मजबूत करेंगे, आतंकवाद, साइबर threats, समुद्री चुनौतियों और emerging security risks का हम मिलकर सामना करेंगे। भारत और इंडोनेशिया का strategic trust, Indo-Pacific में stability का मजबूत आधार बनेगा।
चौथा… Maritime Prosperity
दो महान समुद्री राष्ट्रों के रूप में, हम अपनी shared maritime geography को shared prosperity में बदलेंगे। साबांग से Great Nicobar तक, मलक्का gateway से Indo-Pacific तक - हम connectivity, logistics, blue economy, maritime security और trade resilience में नए अवसर पैदा करेंगे।
पांचवां… Voice of the Global South
हम Global South की आकांक्षाओं को और मजबूत आवाज़ देंगे। हम ऐसे world order के लिए काम करेंगे, जहां development inclusive हो, technology accessible हो, और global governance अधिक न्यायपूर्ण और representative हो।
साथियों,
भारत और इंडोनेशिया मिलकर मानवता के पांचवें हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारी साझेदारी केवल दो देशों का संबंध नहीं है, यह Indo-Pacific की stability, Global South की शक्ति, और विश्व के shared future में विश्वास का संकल्प है। आइए, अपनी ऐतिहासिक मित्रता को नए दौर में ले जाएं। आइए, Ganga-महाकम Vision को मिलकर साकार करें।
Honourable Members,
भारत में तुलसीदास जी ने लिखा था…
जानें बिनु न होइ परतीती।
जानें बिनु न होइ परतीती।
बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती॥
यानि, जब तक लोग एक-दूसरे को जानेंगे नहीं, तब तक उनके बीच अपनापन नहीं बढ़ेगा। मुझे बताया गया है, इंडोनेशिया में एक कहावत हैं और इसका अर्थ भी यही है।
" ताक केनाल माका ताक सायांग"
इसलिए,
हमने तय किया है, हम एक दूसरे से मिलने जुलने का सिलसिला और तेज करेंगे। आज शाम मैं और राष्ट्रपति प्रबोवो यहाँ रह रहे भारतीयों से मिलेंगे। कल राष्ट्रपति प्रबोवो और मैं प्रम्बानन भी जाएंगे। हम इस वर्ल्ड हेरिटेज साइट के कंजर्वेशन और रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे। भारत और इंडोनेशिया उस विरासत को सहेजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जिसे इतिहास ने हमें सौंपा है।
Honourable Members,
मैं आज आप सभी सदस्यों को भारत आने के लिए भी विशेष निमंत्रण भी दे रहा हूं। आप जरूर भारत आएं, अपने परिवार और दोस्तों के साथ आएं, भारत के लोगों को आपका स्वागत करते हुए बहुत अच्छा लगेगा।
मुझे विश्वास है हम मित्रा सेलामान्या, Partners forever बनकर काम करेंगे। हम मिलकर भारत और इंडोनेशिया के लोगों के लिए साझा समृद्धि का भविष्य बनाएंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
दीर्घायु इंडोनेशिया!
भारत माता की जय!
धन्यवाद
Honoured to address the Indonesia Parliament. Do watch. https://t.co/zapE5i8onx
- Narendra Modi (@narendramodi) July 7, 2026India is a nation that follows the path of development, not expansionism. pic.twitter.com/M52IfCj4Fl
- PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026For India and Indonesia, the sea has never represented distance. It has always been a bridge between our nations and remains central to our shared future. pic.twitter.com/8hU3umJ855
- PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026India, Indonesia and the Indian Ocean... these names themselves reflect the deep ties that bind us. pic.twitter.com/Wvg4Ng1UjI
- PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026When India and Indonesia stand together, they strengthen the world's faith that democracy creates opportunities, democracy builds trust and democracy shapes the future. pic.twitter.com/boZB8tqO2R
- PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026The goodwill and trust that India and Indonesia share must create new opportunities for our citizens. pic.twitter.com/l2LCy9ihXC
- PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026India firmly believes that reform of the UN Security Council can no longer be delayed. pic.twitter.com/OcReGxfkG1
- PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
India is a strong advocate of a free, open and inclusive Indo-Pacific.
India believes in freedom of navigation in the Indo-Pacific. pic.twitter.com/IiopDi2UtC
Delhi and Jakarta may be thousands of kilometres apart, but by sea, the distance between our nations is only about 150 kms.
For India and Indonesia, the sea serves as a vital bridge, which is at the core of our shared future.
Equally noteworthy is the shared bonds of history… pic.twitter.com/o7MXJptrg5
Our democracies and diversity bring India and Indonesia closer. pic.twitter.com/tYmwbF8zBG
- Narendra Modi (@narendramodi) July 7, 2026There are sectors such as space, maritime technology and more that are futuristic and offer immense scope for India and Indonesia to work closely. pic.twitter.com/20rg0sTzri
- Narendra Modi (@narendramodi) July 7, 2026
Be it Indonesia's G20 Presidency in 2022 or India's G20 Presidency in 2023, both sought to bring the priorities of the Global South to the centre of the global agenda.
In the coming times as well, India and Indonesia will continue working together in this direction. pic.twitter.com/FUeV5PJAO7
Now is a new era in the India-Indonesia partnership. And, it can be achieved through the Ganga-Mahakam vision, which emphasises:
Civilisational Connect.
Shared Development.
Security and Strategic Trust.
Maritime Prosperity.
Voice of the Global South. pic.twitter.com/u3AUyHKz9i
Merupakan suatu kehormatan dapat berpidato di hadapan Parlemen Indonesia. India dan Indonesia terhubung oleh sejarah, budaya, dan hubungan antar-masyarakat yang telah terjalin selama berabad-abad. Bersama-sama, kita akan terus bekerja sama demi mewujudkan masa depan yang… pic.twitter.com/TVNWUIm1Ng
- Narendra Modi (@narendramodi) July 7, 2026