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09/13/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/13/2026 10:43

'पुरानी बातों को पीछे छोड़ें': पेजेश्कियान ने यूएई के साथ रिश्ते सुधारने पर दिया जोर; भारत की क्या भूमिका रही

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'पुरानी बातों को पीछे छोड़ें': पेजेश्कियान ने यूएई के साथ रिश्ते सुधारने पर दिया जोर; भारत की क्या भूमिका रही?

Sun, 13 Sep 2026 09:54 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 13 Sep 2026 09:54 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद ईरान और यूएई के रिश्तों में तनाव बढ़ा था। अब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि दोनों देश पुरानी बातों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखना चाहते हैं। नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पेजेशकियान और अबू धाबी के युवराज की मुलाकात हुई। दोनों ने तनाव कम करने और शांति पर बात की। ऐसे में सवाल है कि भारत में हुई यह मुलाकात रिश्तों में बदलाव का रास्ता कैसे खोल सकती है? इन दोनों में ये आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...

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ब्रिक्स के दौरान मुलाकात - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़े तनाव के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने रविवार को कहा कि दोनों देश अब पुरानी बातों को पीछे छोड़ना चाहते हैं और भविष्य की ओर देखना चाहते हैं। उनका यह बयान नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान यूएई के अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात के एक दिन बाद आया। ऐसे में भारत में हुई यह उच्चस्तरीय मुलाकात दोनों देशों के बीच नई शुरुआत के संकेत के तौर पर अहम हो गई है।
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पेजेशकियान ने यूएई के साथ रिश्तों को लेकर क्या कहा?

पेजेशकियान ने कहा कि युद्ध और फारस की खाड़ी में हुई घटनाओं के बाद पहली बार अबू धाबी के युवराज के साथ उनकी रचनात्मक बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि अब पुरानी बातों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखा जाए और उसे मिलकर बनाया जाए। ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संबंधों पर पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर पड़ा है। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान अब तनाव कम करने और आगे की ओर देखने पर जोर दे रहा है।
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नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई?

पेजेशकियान और अबू धाबी के युवराज की मुलाकात ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन नई दिल्ली में हुई। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद यह दोनों देशों के बीच उच्चतम स्तर की मुलाकात थी। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ तनाव कम करने, स्थिरता तथा क्षेत्र में शांति और विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चर्चा की। हालांकि, बैठक के बाद किसी खास फैसले या समझौते का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया।

भारत की भूमिका इस घटनाक्रम में क्यों अहम रही?

इस घटनाक्रम में भारत की भूमिका इसलिए अहम है, क्योंकि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई। यानी भारत में आयोजित बहुपक्षीय बैठक के दौरान ईरान और यूएई को सीधे बातचीत का अवसर मिला। इसी सम्मेलन के दौरान ईरान और यूएई ने अन्य ब्रिक्स देशों के साथ पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर संयुक्त बयान पर भी हस्ताक्षर किए। बयान में युद्ध के दौरान संयम बरतने की अपील की गई। इसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जिससे कूटनीतिक संपर्क की संभावना मजबूत होती दिखी।

ईरान और यूएई के रिश्तों में तनाव क्यों बढ़ा था?

पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान और यूएई के रिश्तों पर असर पड़ा था। इनपुट के अनुसार, फरवरी में अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमलों के बाद तेहरान ने क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों को निशाना बनाकर जवाब दिया था और यूएई भी इससे प्रभावित हुआ था। अगस्त में यूएई ने ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेनदेन रोकने की बात कही थी। ऐसे माहौल में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बातचीत तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम है।

ईरान के लिए यूएई के साथ रिश्ते क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ईरान और यूएई के बीच आर्थिक संबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। दुबई में लंबे समय से ईरानी समुदाय मौजूद है और वह ईरान के लिए एक अहम आर्थिक रास्ता भी बना हुआ है। ईरान पर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर है। ऐसे में यूएई के साथ संबंधों में सुधार आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। पेजेशकियन का भविष्य की ओर देखने और दोनों देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कहना इसी संदर्भ में अहम है।

होर्मुज को लेकर ईरान और खाड़ी देशों की बैठक क्यों अहम?

ईरान और खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी एक बैठक प्रस्तावित है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को इस प्रस्तावित बैठक को लेकर कहा कि उन्हें इसकी चिंता नहीं है और यह संबंधित देशों पर निर्भर है। यह बैठक ओमान में होने की योजना है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज को लेकर बातचीत का क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री आवाजाही के लिहाज से महत्व है।

क्या ईरान-यूएई रिश्तों में सचमुच नई शुरुआत हो सकती है?

पेजेशकियान के बयान और नई दिल्ली में हुई मुलाकात से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की इच्छा का संकेत मिलता है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता, तनाव कम करने, शांति और विकास पर बातचीत की है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे दोनों देशों के सभी मतभेद खत्म हो गए हैं। बैठक से किसी खास समझौते का विवरण भी सामने नहीं आया है। इसलिए आगे की बातचीत और दोनों देशों के अगले कदम से ही पता चलेगा कि 'पुरानी बातों को पीछे छोड़ने' की यह बात रिश्तों में कितनी बड़ी नई शुरुआत बनती है।

Amar Ujala Ltd published this content on September 13, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 13, 2026 at 16:44 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]