Amar Ujala Ltd

09/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/19/2026 17:00

इंसानों में मिला 49वां ब्लड ग्रुप: इस्राइली महिला मरीज के खून से खुला राज, गलत रक्त चढ़ने का खतरा होगा कम

{"_id":"6aaf0e439341081136052420","slug":"new-jama-blood-group-identified-as-49th-human-blood-group-system-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंसानों में मिला 49वां ब्लड ग्रुप: इस्राइली महिला मरीज के खून से खुला राज, गलत रक्त चढ़ने का खतरा होगा कम","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}

इंसानों में मिला 49वां ब्लड ग्रुप: इस्राइली महिला मरीज के खून से खुला राज, गलत रक्त चढ़ने का खतरा होगा कम

Sun, 20 Sep 2026 04:05 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, लंदन।
एजेंसी, लंदन। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 20 Sep 2026 04:05 AM IST
सार

ब्रिटेन और इस्राइल के वैज्ञानिकों ने इंसानों में नए जामा ब्लड ग्रुप सिस्टम की पहचान की है, जिसे अंतरराष्ट्रीय सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन ने 49वें ब्लड ग्रुप सिस्टम के रूप में मान्यता दी है। इसकी खोज एक इस्राइली महिला और उसके भाई के रक्त प्लाज्मा में मिले दुर्लभ एंटीबॉडी के अध्ययन से हुई। वैज्ञानिकों ने एफ-11 आर जीन और जामा प्रोटीन से जुड़े आनुवंशिक बदलावों की पहचान की है।

विज्ञापन
नए ब्लड ग्रुप की खोज - फोटो : amarujala.com
  • Link Copied

विस्तार

ब्रिटेन की एनएचएस ब्लड एंड ट्रांसप्लांट और इस्राइल के शीर्ष अस्पतालों के वैज्ञानिकों के एक संयुक्त शोध दल ने जामा नामक नए ब्लड ग्रुप की खोज की है। अंतरराष्ट्रीय सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (आईएसबीची) ने जामा (जंक्शनल अधेशन मॉलिक्युल-ए) को मानव शरीर के 49वें ब्लड ग्रुप सिस्टम के रूप में मान्यता दी है। एफ-11 आर एक विशिष्ट जीन है, जो मानव शरीर में जामा नामक प्रोटीन का निर्माण करता है और इसी के आधार पर इस ब्लड ग्रुप का नाम जामा रखा गया है।
विज्ञापन


वैज्ञानिकों ने एफ-11 आर जीन और जंक्शनल अधेशन मॉलिक्युल-ए प्रोटीन के सटीक डीएनए म्यूटेशन की पूरी जेनेटिक और सेरोलॉजिकल मैपिंग करके इसका वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत किया है। इस्राइल व ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक इस्राइली महिला मरीज और उनके भाई के रक्त प्लाज्मा में एक दुर्लभ एंटीबॉडी का अध्ययन करके इसका पता लगाया। मरीज और उनके भाई में एफ-11 आर नामक विषिष्ट जीन पाया गया, और उनमें सामान्य एंटीजन अनुपस्थित थे। इस दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति वाले व्यक्ति जब एंटीजन के संपर्क में आते हैं, तो वे एक विशेष एंटीबॉडी बनाते हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स दोनों से बाइंड (संलग्न) हो सकती है।
विज्ञापन


एंटीबॉडीज का सटीक इलाज और प्रबंधन होगा : जामा ब्लड ग्रुप सिस्टम में एक ही हाई-प्रीवलेंस एंटीजन शामिल है। इससे साफ है कि यह एंटीजन दुनिया के लगभग सभी व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की सतह पर मौजूद होता है। इस खोज से मरीजों में लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स दोनों को प्रभावित करने वाली एंटीबॉडीज का सटीक इलाज और प्रबंधन संभव होगा। अमर उजाला रिसर्च
विज्ञापन
विज्ञापन


गलत रक्त चढ़ाने से नहीं जाएगी किसी की जान
एफ-11 आर एक विशिष्ट जीन है, जो मानव शरीर में जामा नामक प्रोटीन का निर्माण करता है। जब किसी दुर्लभ व्यक्ति के शरीर में यह व्यापक एंटीजन अनुपस्थित होता है, तो सामान्य खून चढ़ाने पर उनका इम्यून सिस्टम एंटीबॉडी बनाकर ट्रांसफ्यूज की गई लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला कर देता है जिससे जानलेवा ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन हो सकता है। इस नई जेनेटिक पहचान से अब डॉक्टर डीएनए टेस्ट से एनडब्ल्यूजे-नेगेटिव मरीजों और डोनर्स की तुरंत पहचान कर सकेंगे। इससे दुर्लभ मरीजों के इलाज और रक्तदान को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
Amar Ujala Ltd published this content on September 20, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 19, 2026 at 23:01 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]