Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

02/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/20/2026 09:53

एआई सुरक्षा और मानकों को आकार देने हेतु वैश्विक दक्षिण ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय

एआई सुरक्षा और मानकों को आकार देने हेतु वैश्विक दक्षिण ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया


मंत्रियों और वैश्विक नेताओं ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से समन्वित एआई सुरक्षा रूपरेखा तैयार करने पर जोर दिया

सामूहिक शासन मॉडल की वकालत करते हुए विकासशील देशों का ध्यान मुख्यत: एआई सुरक्षा और संप्रभुता पर केंद्रित

उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से एआई का विस्तार: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं ने साझा सुरक्षा मानदंडों और समन्वित निगरानी व्यवस्था के लिए जोर दिया

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 7:54PM by PIB Delhi

ऐसे समय में जब अत्याधुनिक एआई क्षमताएँ उन्हें विनियमित करने के लिए स्थापित संस्थागत व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक तीव्र गति से विकसित हो रही हैं, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत आयोजित सत्र "इंटरनेशनल एआई सेफ्टी कोऑर्डिनेशन: व्हाट पॉलिसीमेकर्स नीड टू नो" में इस बात पर विचार किया गया कि विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ खंडित वैश्विक परिदृश्य में केवल नियम-ग्राही बने रहने के बजाय सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सुरक्षा, मानकों और परिनियोजन मार्गों को किस प्रकार आकार दे सकती हैं। इंटरनेशनल एआई सेफ्टी कोऑर्डिनेशन ट्रैक के समापन संवाद के रूप में आयोजित इस चर्चा में मंत्रियों, बहुपक्षीय संगठनों के नेताओं तथा एआई सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया और नवाचार को जनविश्वास, मौलिक अधिकारों तथा दीर्घकालिक स्थिरता के साथ संरेखित करने हेतु आवश्यक व्यावहारिक तंत्रों पर ध्यान केंद्रित किया।

चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि वैश्विक दक्षिण के लिए सहयोग अब केवल कूटनीतिक संरेखण का विषय नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकीय और आर्थिक आवश्यकता बन चुका है। चूँकि एआई का उपयोग स्वास्थ्य, कृषि तथा लोक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में वास्तविक परिस्थितियों में पहले से ही किया जा रहा है, वक्ताओं ने पृथक राष्ट्रीय प्रयासों से आगे बढ़कर साझा जोखिम आकलन, पारस्परिक रूप से संगत शासन रूपरेखाओं तथा समन्वित सुरक्षा उपकरणों की दिशा में अग्रसर होने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अगला चरण इस बात से परिभाषित होगा कि देश संस्थागत क्षमता का विकास, साक्ष्यों का आदान-प्रदान तथा साझा मानकों का त्वरित क्रियान्वयन किस सीमा तक कर पाते हैं, जिससे तीव्र गति से विकसित हो रही अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ कदम मिलाया जा सके।

सत्र में सिंगापुर की डिजिटल विकास एवं सूचना मंत्री, जोसेफिन टियो, ने साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण तथा वैश्विक स्तर पर पारस्परिक रूप से संगत मानकों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। विमानन सुरक्षा से समानता स्थापित करते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि प्रभावी विनियमन अंतर्ज्ञान के बजाय परीक्षण और सिमुलेशन पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि अंतरराष्ट्रीय समन्वय के अभाव में "खंडन बना रहेगा, विश्वास कमजोर होगा और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का सुरक्षित विस्तार कहीं अधिक कठिन हो जाएगा।"

सत्र में मलेशिया के डिजिटल विकास एवं सूचना मंत्री, गोबिंद सिंह देव, ने इस बात पर बल दिया कि विश्वसनीय क्षेत्रीय सहयोग सुदृढ़ राष्ट्रीय आधारों पर निर्भर करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि मध्यम शक्तियों को पहले घरेलू संस्थागत क्षमता तथा प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ करना होगा, साथ ही आसियान एआई सेफ्टी नेटवर्क जैसे क्षेत्रीय मंचों का उपयोग करते हुए साझा प्रतिबद्धताओं को जोखिम-साझाकरण और तत्‍परता हेतु परिचालन तंत्रों में रूपांतरित करना होगा।

ओईसीडी के महासचिव, मथियास कॉरमैन, ने इस बात पर बल दिया कि एआई के अंगीकरण की दिशा को जनविश्वास निर्धारित करेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि "एआई में विश्वास समावेशन और वस्तुनिष्ठ साक्ष्यों के माध्यम से निर्मित होता है।" उन्होंने नवाचार और निगरानी के बीच की खाई को पाटने के लिए सरकारों, उद्योग और नागरिक समाज के बीच संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ अवसरों पर "यह आवश्यक होगा कि गति को धीमा किया जाए, परीक्षण किया जाए, निगरानी की जाए और जानकारी साझा की जाए, जिससेयह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई प्रणालियाँ अभिप्रेत रूप में कार्य करें और मौलिक अधिकारों का सम्मान करें।"

विश्व बैंक के डिजिटल एवं एआई उपाध्यक्ष, सांगबू किम, ने एआई प्रणालियों के आरंभिक चरण से ही सुरक्षा उपायों को अभिकल्पना में सम्मिलित करने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया, विशेषकर सीमित संस्थागत क्षमता वाले परिवेशों में। उन्होंने उल्लेख किया कि साझेदारियाँ देशों को रेड-टीमिंग जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से उभरते जोखिमों का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम बनाती हैं। उन्होंने एआई को "बरछा और ढाल" दोनों के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि व्यापक स्तर पर परिनियोजन से पूर्व जोखिमों के प्रभावी प्रबंधन के लिए सतत् अधिगम और साझा अनुभव आवश्यक हैं।

एआई निवेशक, स्काइप के संस्थापक अभियंता तथा फ्यूचर ऑफ लाइफ इंस्टीट्यूट के सह-संस्थापक, जान टालिन ने चर्चा को अत्याधुनिक एआई विकास के संदर्भ में स्थापित करते हुए चेतावनी दी कि अग्रणी प्रयोगशालाओं पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव एकपक्षीय संयम को अल्पसंभावित बनाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक जागरूकता और समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी अवलोकन किया कि उन्नत एआई में पूंजी और संगणन संसाधनों का केंद्रीकरण "यदि पर्याप्त वैश्विक समन्वय हो, तो शासन को कठिन नहीं बल्कि अधिक सुगम बनाता है।"

विभिन्न क्षेत्रों और संस्थागत दृष्टिकोणों के पार, सत्र ने आगामी 12-18 महीनों के लिए एक स्पष्ट निकट-अवधि कार्यसूची प्रस्तुत की: साझा सुरक्षा मानदंडों, संरचित सूचना-साझाकरण तथा समन्वित संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से सिद्धांतों से आगे बढ़कर परिचालन सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाना। वक्ताओं ने बल देते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग एआई शासन को केवल अपनाने के बजाय उसे आकार देने का मार्ग प्रदान करता है, जिससे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियाँ इस तरह से विस्तृत हों,जो जनविश्वास को सुदृढ़ करे, मौलिक अधिकारों की रक्षा करे और दीर्घकालिक वैश्विक स्थिरता का समर्थन करे।

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पीके/केसी/पीके


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