09/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/21/2026 00:48
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भारत को सेमीकंडक्टर विकास के अगले चरण में केवल चिप उत्पादन क्षमता बढ़ाने से आगे बढ़ना होगा। EY-IESA (इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में डिजाइन, निर्मित और पैक किए गए चिप्स का उपयोग स्थानीय उत्पादों में बढ़ाना चाहिए। इससे एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनेगा जहां घरेलू स्तर पर बने उत्पादों में भारतीय चिप्स का अधिक इस्तेमाल हो।
रिपोर्ट ने भारत की तीन रणनीतिक ताकतों को उजागर किया है। इनमें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र शामिल है। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में से एक है। साथ ही, यहां प्रतिभाओं का बड़ा समूह एक आकर्षक विनिर्माण आधार प्रदान करता है। इन ताकतों का लाभ उठाकर भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं में विशिष्ट स्थान बना सकता है।
भारत के पास पारंपरिक चिप उत्पादक देशों से अलग एक मॉडल बनाने का अवसर है। यह मॉडल डिजाइन-नेतृत्व विनिर्माण और उन्नत पैकेजिंग पर केंद्रित होगा। इसमें कंपाउंड सेमीकंडक्टर, विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाएं और प्रणाली-स्तर नवाचार शामिल होंगे। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं भी विविधता ला रही हैं, जिससे भारत के लिए एक विश्वसनीय भागीदार बनने का अवसर है। यह दशक भारत को सेमीकंडक्टर नवाचार और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बना सकता है।