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10/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/07/2026 03:07

कैंसर से जंग में विज्ञान की जीत: 50 साल में बदली तस्वीर, मरीजों की बढ़ी उम्र; फेफड़े और ल्यूकेमिया में सुधार

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कैंसर से जंग में विज्ञान की जीत: 50 साल में बदली तस्वीर, मरीजों की बढ़ी उम्र; फेफड़े और ल्यूकेमिया में सुधार

Wed, 07 Oct 2026 02:29 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 07 Oct 2026 02:29 PM IST
सार

पिछले 50 वर्षों में कैंसर के इलाज में बड़ी प्रगति हुई है। अमेरिका में पांच साल की औसत जीवन-दर 49% से बढ़कर 71% हुई। फेफड़े के कैंसर और बच्चों के ल्यूकेमिया में उल्लेखनीय सुधार हुआ, जबकि लिवर कैंसर की जीवन-दर भी बढ़ी। हालांकि पेंक्रियाज कैंसर अब भी बड़ी चुनौती बना है।

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50 साल में कैंसर इलाज ने बदली तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

फिलाडेल्फिया। कैंसर के खिलाफ पिछले पांच दशकों में चिकित्सा विज्ञान ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। अमेरिका में कैंसर से पीड़ित लोगों की पांच साल तक जीवित रहने की औसत दर 1970 के दशक के अंत में 49% थी, जो 2016-22 के दौरान बढ़कर 71% हो गई। हालांकि यह प्रगति सभी कैंसर में समान नहीं रही है। कुछ कैंसर में इलाज के बेहतर विकल्पों ने मरीजों की जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है, जबकि अग्न्याशय (पेंक्रियाज) जैसे कैंसर अब भी चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
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अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च की 2026 की रिपोर्ट में पिछले करीब 50 वर्षों के कैंसर उपचार और मरीजों के परिणामों का आकलन किया गया है। नेचर में प्रकाशित विश्लेषण के मुताबिक फेफड़े के कैंसर में जीवन-दर में हुआ सुधार सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है। 1975-79 में फेफड़े के कैंसर से पीड़ित केवल 13% मरीज निदान के बाद पांच साल तक जीवित रहते थे। 2016-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 29% हो गया।विशेषज्ञों के मुताबिक फेफड़े के कैंसर में यह सुधार कई मोर्चों पर हुई प्रगति का नतीजा है। सर्जरी की तकनीकों में सुधार, बेहतर रेडिएशन उपचार और ऐसी दवाओं का विकास, जो कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास बदलावों को निशाना बनाती हैं या शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्यूमर के खिलाफ सक्रिय करती हैं, इस बदलाव में महत्वपूर्ण रहे हैं।कैंसर उपचार में इम्यूनोथेरेपी और लक्षित उपचार के बढ़ते इस्तेमाल ने ऐसे मरीजों के लिए भी नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जिनके लिए पहले उपचार के साधन सीमित थे। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में भी कैंसर मरीजों के जीवित रहने की दर में दीर्घकालिक सुधार का रुझान दिखाई देता है।
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बच्चों के ल्यूकेमिया में सबसे बड़ी सफलताओं में से एक
  • बचपन में होने वाले कैंसर, खासकर लिम्फॉयड ल्यूकेमिया, के इलाज को कैंसर शोध की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जाता है। 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों में इस बीमारी की पांच साल की जीवन-दर 57% से बढ़कर 90% हो गई है।
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  • दिलचस्प बात यह है कि इस उपलब्धि के पीछे केवल किसी एक क्रांतिकारी दवा की खोज नहीं थी। उपचार में पहले से उपलब्ध दवाओं की खुराक, उनके संयोजन और इलाज के समय में लगातार छोटे-छोटे बदलाव किए गए। शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लंबे सहयोग से उपचार की रणनीति बेहतर हुई और इससे मरीजों के परिणामों में बड़ा बदलाव आया।

लिवर कैंसर में जीवन-दर तीन गुना
लिवर कैंसर में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 1990 के दशक के मध्य से इस कैंसर की पांच साल की जीवन-दर करीब तीन गुना बढ़कर 22% तक पहुंच गई है। मल्टीपल मायलोमा जैसे रक्त कैंसर में भी उपचार के परिणामों में बड़ा सुधार हुआ है। इसमें ऐसी दवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ सक्रिय करती हैं।

हर आंकड़ा सफलता की पूरी कहानी नहीं
कुछ कैंसर के आंकड़ों की तस्वीर अधिक जटिल है। प्रोस्टेट कैंसर की पांच साल की जीवन-दर अब करीब 98% है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी ऊंची दर का एक कारण यह भी हो सकता है कि स्क्रीनिंग के दौरान ऐसे ट्यूमर भी पकड़ में आ जाते हैं, जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप नहीं लेते।सर्वाइकल कैंसर के आंकड़े भी इसी तरह सावधानी से समझने की जरूरत बताते हैं। इसकी पांच साल की जीवन-दर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखता, लेकिन व्यापक स्क्रीनिंग ने इसके सबसे आम रूप को शुरुआती स्तर पर पहचानकर रोकने में मदद की है। परिणामस्वरूप अब दर्ज होने वाले मामलों में अपेक्षाकृत अधिक आक्रामक एडेनोकार्सिनोमा का अनुपात बढ़ा है, जिससे कुल जीवन-दर का आंकड़ा प्रभावित होता है।

पेंक्रियाज कैंसर सबसे बड़ी चुनौती
सभी प्रमुख कैंसरों में पेंक्रियाज कैंसर अब भी सबसे कठिन बीमारियों में शामिल है। इसकी पांच साल की औसत जीवन-दर केवल 14% है। बीमारी की शुरुआती पहचान मुश्किल होने और प्रभावी उपचार विकल्प सीमित होने के कारण मरीजों के परिणाम अभी भी कमजोर हैं। हालांकि हाल के शोध और नई उपचार रणनीतियों से वैज्ञानिकों को भविष्य में इस स्थिति में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।

50 साल में बदली कैंसर की तस्वीर
पिछली आधी सदी में कैंसर उपचार की सफलता केवल नई दवाओं तक सीमित नहीं रही। शुरुआती पहचान, बेहतर सर्जरी, रेडिएशन तकनीक, लक्षित उपचार, इम्यूनोथेरेपी और मौजूदा उपचार पद्धतियों को लगातार बेहतर बनाने ने मिलकर मरीजों के जीवित रहने की संभावना बढ़ाई है। हालांकि अलग-अलग कैंसर के बीच सफलता का अंतर अब भी काफी बड़ा है। यही अंतर कैंसर अनुसंधान के अगले चरण की सबसे बड़ी चुनौतियों को भी सामने रखता है।
Amar Ujala Ltd published this content on October 07, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on October 07, 2026 at 09:08 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]