Amar Ujala Ltd

07/28/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/27/2026 20:04

फैसले लेने में देर करते हैं? घबराइए नहीं यह कमजोरी नहीं, हो सकती है तेज दिमाग की निशानी

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फैसले लेने में देर करते हैं? घबराइए नहीं यह कमजोरी नहीं, हो सकती है तेज दिमाग की निशानी

Tue, 28 Jul 2026 06:25 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 28 Jul 2026 06:25 AM IST
सार

शोधों के अनुसार फैसले लेने में अधिक समय लगाना या किसी विषय की गहराई तक जाने की आदत हमेशा कमजोरी नहीं होती। जर्नल ऑफ इंटेलिजेंस में प्रकाशित 25 हजार से अधिक प्रतिभागियों पर आधारित विश्लेषण बताता है कि उच्च बुद्धिमत्ता वाले लोग अधूरे तर्कों को आसानी से नहीं छोड़ते और छोटी-छोटी बातों पर भी गहराई से विचार करते हैं। यह उनकी मजबूत संज्ञानात्मक क्षमता और विश्लेषणात्मक सोच का संकेत है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

आमतौर पर यदि कोई व्यक्ति छोटे-मोटे फैसले लेने में ज्यादा समय लगाता है या किसी मामूली-सी बात में उलझा रहता है, तो लोग उसे कम समझदार मान लेते हैं। लेकिन कई अध्ययन बताते हैं कि फैसले लेने में थोड़ा अधिक समय लगाना कमजोरी नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता की पहचान हो सकता है।

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क्या वजह है कि बुद्धिमान लोग किसी बात को जल्दी छोड़ नहीं पाते?
अध्ययनों से पता चलता है कि तेज दिमाग वाले कई लोगों में अक्सर दो ऐसी आदतें पाई जाती हैं, जो पहली नजर में बेवकूफी भरी या कमजोरी जैसी लग सकती हैं। आमतौर पर लोग किसी बहस के खत्म होने, फैसला हो जाने या बातचीत पूरी होने के बाद तुरंत आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन तेज दिमाग वाले व्यक्ति का ध्यान उसी मुद्दे पर अटका रहता है। इसकी वजह यह है कि उन्हें कोई अधूरा तर्क, अजीब-सी बात या अस्पष्ट स्पष्टीकरण लगातार परेशान करता रहता है, जिस पर शायद बाकी लोगों ने ध्यान भी नहीं दिया होता।
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छोटी-सी बात पर घंटों सोचते क्यों रहते हैं समझदार लोग?
दूसरा दिलचस्प पैटर्न तब देखने को मिलता है, जब कोई समझदार व्यक्ति बेहद छोटी-सी बात पर घंटों सोचता रहता है, जैसे कौन-सी फिल्म देखनी है या क्या खाना ऑर्डर करना है। यह किसी तरह की मानसिक कमजोरी नहीं होती, बल्कि उनके दिमाग की कार्यप्रणाली का हिस्सा होती है। ऐसे लोग हर परिस्थिति को समान गहराई से समझने और उसका विश्लेषण करने की कोशिश करते हैं।
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क्या कहते हैं 25 हजार से ज्यादा लोगों पर हुए अध्ययन?
जर्नल ऑफ इंटेलिजेंस में प्रकाशित एक प्री-रजिस्टर्ड मल्टी-लेवल मेटा-विश्लेषण में विभिन्न अध्ययनों के 25,000 से अधिक प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने यह जांचा कि जिन लोगों में किसी भी विषय को गहराई से समझने की तीव्र इच्छा होती है, उनका स्कोर फ्लुइड इंटेलिजेंस, क्रिस्टलाइज्ड इंटेलिजेंस और सामान्य बुद्धिमत्ता के परीक्षणों में कैसा रहता है। आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि उच्च संज्ञानात्मक क्षमता और छोटी-से-छोटी बात को भी तर्क के आधार पर समझने व सुलझाने की प्रवृत्ति के बीच गहरा संबंध होता है।
Amar Ujala Ltd published this content on July 28, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 28, 2026 at 02:04 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]