06/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 06/24/2026 08:03
कोयला मंत्रालय ने स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों पर एक ब्रिक्स साइड इवेंट का आयोजन किया, जिसमें कोयला गैसीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया और इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के प्रतिनिधियों, उद्योग, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और रूस, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल को एक मंच उपलब्ध कराया गया।
कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री सनोज कुमार झा ने मुख्य भाषण देते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में कोयला गैसीकरण की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण से कोयले को सिंथेटिक गैस में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसका उपयोग अमोनिया, मेथनॉल, हाइड्रोजन, सिंथेटिक ईंधन, डीआरआई और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन में किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तकनीक में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू कोयला संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने की क्षमता है।
श्री झा ने नीतिगत समर्थन, वित्तीय प्रोत्साहन, सुनिश्चित कोयला संपर्क और मंत्रालयों के बीच समन्वित प्रयासों के माध्यम से 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने विभिन्न कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के माध्यम से हो रही प्रगति पर भी प्रकाश डाला और स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
बीएचईएल ने कार्यशाला के दौरान कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी पर जिंदल स्टील लिमिटेड (जेएसएल) और ग्रेटा एनर्जी ने अपनी कोयला गैसीकरण परियोजनाओं पर और ब्रिक्स देशों के लिए इस प्रौद्योगिकी की प्रासंगिकता पर प्रस्तुतियां दीं। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने कास्ता भूमिगत कोयला गैसीकरण (यूसीजी) पायलट परियोजना की प्रगति प्रस्तुत की, जबकि नामित प्राधिकरण ने यूसीजी के लिए कोयला ब्लॉक आवंटन और नीतिगत पहलों पर प्रकाश डाला। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने कोयला लिंकेज प्रावधानों और कंपनी द्वारा चलाई जा रही कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को प्रदर्शित किया।
कोयला गैसीकरण के विभिन्न पहलुओं पर एक संवादात्मक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें प्रौद्योगिकी, परियोजना अर्थशास्त्र, भूवैज्ञानिक और प्रसंस्करण चुनौतियां, उच्च राख वाले भारतीय कोयले का उपयोग और प्रौद्योगिकी को व्यापक रूप से अपनाने के लिए आवश्यक नीति और वित्तीय सहायता शामिल थी।
इस आयोजन ने ब्रिक्स देशों और अन्य हितधारकों के बीच ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान किया, साथ ही ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और कोयले के स्वच्छ उपयोग में कोयला गैसीकरण की भूमिका को उजागर किया।
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