04/15/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/15/2026 06:43
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) को सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता विकसित करने और एआई-संचालित "स्मार्ट गवर्नेंस" के लिए पाठ्यक्रम विकसित करने हेतु एक नोडल संस्थान के रूप में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो भारत में प्रौद्योगिकी-आधारित प्रशासनिक सुधारों को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आज यहां आईआईपीए के 72वें संस्थापक दिवस पर "सुशासन के लिए एआई" विषय पर 5वां डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्षिक स्मृति व्याख्यान देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान एआई-सक्षम शासन के लिए प्रशिक्षण ढांचे तैयार करने हेतु क्षमता निर्माण आयोग, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी), एलबीएसएनएए मसूरी और प्रशासनिक सुधार विभाग जैसे संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर सकता है। आईआईपीए की विरासत और शैक्षणिक साख पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एआई-संचालित "स्मार्ट शासन" के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने और सार्वजनिक क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य करने के लिए संस्थान की स्थिति अद्वितीय है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईपीए में संस्थागत सुधारों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इसकी सदस्यता में सहायक सचिवों जैसे युवा सिविल सेवकों को भी शामिल किया गया है। इस कदम से इसकी पहुंच में काफी विस्तार हुआ है और कुल सदस्यता लगभग 11,000 हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान ने इस वर्ष लगभग 6,000 अधिकारियों के लिए 129 पाठ्यक्रम आयोजित किए हैं, जो लोक प्रशासन में प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीतिगत चर्चा के प्रमुख केंद्र के रूप में इसकी भूमिका को और मजबूत करता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक आधुनिकीकरण के लिए एक एकीकृत और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाते हुए, शासन प्रशिक्षण में निजी क्षेत्र, सशस्त्र बलों और जन प्रतिनिधियों के साथ गहन सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण आयोग जैसी संस्थाओं के सहयोग से विज्ञान प्रशासकों के लिए आवासीय कार्यक्रमों सहित विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
विकेंद्रीकृत शासन में किए गए नवाचारों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने जिला स्तरीय आईआईपीए अध्यायों और जिला शासन सूचकांकों की शुरुआत के बारे में बताया। इन पहलों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना और सभी क्षेत्रों में डेटा-आधारित शासन और सर्वोत्तम प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
सरकार की व्यापक डिजिटल शासन पहलों के अंतर्गत डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के माध्यम से "सरल एआई" पोर्टल के शुभारंभ की घोषणा की। इस पोर्टल का उद्देश्य जटिल तकनीकी प्रगति को सरल, नागरिक-अनुकूल व्याख्याओं में प्रस्तुत करना है, जिससे जनता उभरती प्रौद्योगिकियों को बेहतर ढंग से समझ सके और उनका उपयोग कर सके।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत के रणनीतिक प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने 10,370 करोड़ रुपये के 'इंडिया एआई मिशन' को देश के डिजिटल परिवर्तन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन अनुसंधान, नवाचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास में निवेश के माध्यम से राष्ट्रीय एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बनाया गया है, जो समावेशी और कुशल शासन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र ने एआई कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए 38,000 सीपीयू और बाद में 22,000 जीपीयू उपलब्ध कराए हैं, जिससे भारत की कम्प्यूटेशनल क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होने और विभिन्न क्षेत्रों में एआई-संचालित समाधानों से काम लेने में तेजी आने की उम्मीद है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एआई शिखर सम्मेलनों ने महत्वपूर्ण निवेश को बढ़ावा दिया है और देश के तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
नागरिक-केंद्रित प्रशासन में उल्लेखनीय सुधारों के बारे में चर्चा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) ने 95 प्रतिशत से अधिक निपटान दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म को एक हाइब्रिड मॉडल में परिवर्तित कर दिया गया है, जिससे शिकायत के समाधान के बाद एक मानव प्रतिनिधि शिकायतकर्ताओं से बातचीत करता है, इस प्रकार तकनीकी दक्षता को सहानुभूति के साथ एकीकृत किया गया है।
सिविल सेवा सुधार के व्यापक दायरे पर जोर देते हुए डॉ. सिंह ने मिशन कर्मयोगी की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमता विकास मंच पर 14.5 करोड़ से अधिक अधिकारियों ने पंजीकरण कराया है। यह पहल संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं सहित 23 भाषाओं में डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराती है और इसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार, सक्षम और नागरिक-केंद्रित नौकरशाही का निर्माण करना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह के संबोधन में केंद्र सरकार की उस व्यापक सोच पर बल दिया गया, जिसके तहत पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया जाएगा। भारत एआई मिशन और कर्मयोगी मिशन से लेकर एआई-आधारित शिकायत निवारण प्रणालियों और क्षमता निर्माण ढांचों तक की पहलों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य अगली पीढ़ी के शासन में प्रौद्योगिकी को समाहित करना है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह बुधवार को नई दिल्ली में आईआईपीए के 72वें स्थापना दिवस के अवसर पर "सुशासन के लिए एआई" विषय पर 5वां डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्षिक स्मृति व्याख्यान देते हुए।
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