06/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 06/24/2026 04:56
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत का एक सुभाषितम् साझा किया है, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामूहिक समर्पण और प्रयास से ही राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण बनी रहती है। यही भावना समाज में नई ऊर्जा का संचार करती है और विकास के संकल्पों को पूरा करने का मार्ग प्रशस्त करती है।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक सुभाषितम् साझा किया:
"यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता।
नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥"
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
"सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण रहती है। यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता।
नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥"
सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण रहती है। यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता।
नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥ pic.twitter.com/DoeTxm3sBX
***
पीके/केसी/एके/वाईबी