06/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 06/11/2026 12:31
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की मौजूदगी में आज नई दिल्ली में भारत सरकार, असम सरकार और नगालैंड सरकार के बीच असम-नगालैंड सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज तेल संचालन (Mineral Oil Operations) के संबंध में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो सहित केंद्र, असम एवं नगालैंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते से तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण और खनिज के खनन की संभावना बनेगी, साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा पूर्वोत्तर सहित पूरे देश के सामने रखी गई समृद्ध उत्तर-पूर्व की संकल्पना की राह में बहुत बड़ी बाधा दूर हुई है। श्री शाह ने कहा कि आज पूरा पूर्वोत्तर 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से यह समझौता करके आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि असम और नगालैंड परस्पर सहयोग के जरिए भारत के तेल उत्खनन में कोई बाधा नहीं बनेंगे, क्योंकि यह राष्ट्रीय संपदा है।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नगालैंड के मुख्यमंत्री ने बताया है कि छह फील्ड्स के अलावा पूरे नगालैंड में तेल की खोज के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सहमत है। उन्होंने कहा कि असम सरकार भी इससे सहमत है, क्योंकि यह सभी के लिए 'विन-विन सिचुएशन' है। गृह मंत्री ने कहा कि इस त्रिपक्षीय समझौते से पूरे नॉर्थ-ईस्ट में खनिजों के खनन का रास्ता साफ होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में न केवल तेल और गैस, बल्कि खनिजों का असीम भंडार है। उन्होंने कहा कि आज इस MoU से हमारी 1,000-1,500 बैरल प्रतिदिन की दोहन क्षमता के दस गुना से अधिक बढ़ने की संभावना है।
गृह मंत्री श्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि नगालैंड में उपलब्ध तेल और गैस का उत्खनन होने पर इस क्षेत्र में विदेशों पर हमारी निर्भरता काफी हद तक कम हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अभाव और कुछ चुनौतियों के कारण लंबे समय तक दोनों राज्यों का आर्थिक विकास प्रभावित हुआ था। लेकिन आज हुआ यह समझौता असम और नगालैंड के आर्थिक विकास के लिए बड़ा राजमार्ग खोलेगा। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद का इस त्रिपक्षीय समझौते से बड़ा उदाहरण कुछ नहीं हो सकता।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से नॉर्थ-ईस्ट को अपने फोकस में रखा है। वे आजादी के बाद सबसे अधिक बार नॉर्थ-ईस्ट का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि लिए मोदी जी ने नॉर्थ-ईस्ट को शांत और विकसित बनाने के जो प्रयास किए हैं, आजाद भारत के इतिहास में उनकी तुलना बमुश्किल मिलेगी। श्री शाह ने कहा कि 2019 के बाद अलग-अलग प्रकार के 12 समझौते हुए हैं, जिससे पूर्वोत्तर में शांति सुनिश्चित हुई और हिंसा में करीब 80% की कमी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर जिस गति से बढ़ा है, वह इन समझौतों के बिना संभव नहीं था
गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार में नॉर्थ-ईस्ट में पर्यटन एवं निवेश बढ़ा है और औद्योगिक शांति के कारण निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में 80% से अधिक क्षेत्र सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) से मुक्त हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि एक-दो राज्यों को छोड़कर अगले साल पूरे नॉर्थ-ईस्ट से AFSPA को समाप्त कर दिया जाएगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि देश के विकास, नॉर्थ-ईस्ट की समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को मजबूत करने के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के बिना किसी देश का विकास संभव नहीं है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के संघर्षों के कारण हम और पूरी दुनिया गहरे संकट से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि यह त्रिपक्षीय समझौता इस वैश्विक संकट में भारत के लिए कितनी जल्दी मददगार साबित होगा यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन समय आने पर इससे भारत को काफी सुकून मिलेगा और हम अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि इस समझौते से खनिजों के खनन की संभावनाएँ बढ़ी हैं और छह फील्ड्स के अलावा नगालैंड में हर जगह एक्सप्लोरेशन की संभावना में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे दोनों राज्य न केवल समृद्ध होंगे, बल्कि आपसी सद्भाव भी बढ़ेगा और विकास को नई गति मिलेगी।
गृह मंत्री ने उम्मीद जताई कि नॉर्थ ईस्ट के सारे विवाद, चाहे वह सीमा से जुड़ा हो या कानून-व्यवस्था से, धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समूहों के साथ समझौते हो चुके हैं। 50% से अधिक सीमा विवाद हम सुलझा चुके हैं और आज एक नई शुरुआत हो रही है। श्री शाह ने कहा कि यह उत्तर-पूर्व के स्वर्णिम भविष्य के लिए आशा और विश्वास को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
आज हुआ त्रिपक्षीय समझौता भारत सरकार और असम व नगालैंड राज्य सरकारों की पहचाने गए रुचि वाले क्षेत्र (Area of Interest) में पेट्रोलियम की खोज और उत्पादन गतिविधियों के लिए एक स्थिर, सुरक्षित और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस MoU के माध्यम से क्षेत्र में खनिज तेल से जुड़े कामकाज को सुविधाजनक बनाने के लिए एक समन्वित ढांचा स्थापित किया गया है, जिसमें परिचालन संबंधी निरंतरता (operational continuity), कर्मियों और संपत्तियों की सुरक्षा तथा सभी हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया गया है। यह ढांचा खोज और उत्पादन (exploration and production) गतिविधियों को सहायता प्रदान करेगा, अपस्ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्र (upstream petroleum sector) में निवेश को प्रोत्साहित करेगा तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के उद्देश्यों में योगदान देगा।
गृह मंत्रालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा असम और नगालैंड की सरकारों के साथ मिलकर MoU पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाया। इस समझौते से इलाके में चल रहे और भविष्य के हाइड्रोकार्बन ऑपरेशन्स के लिए ज़्यादा निश्चितता और स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
यह MoU सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों के बीच सहकारी संघवाद (cooperative federalism) और रचनात्मक जुड़ाव की भावना को रेखांकित करता है।
भारत सरकार सहयोगी और पारदर्शी तरीकों से खोज और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।
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RK/RR/PR/PS