05/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 05/23/2026 07:58
आज ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग (डीओआरडी) के सचिव, श्री रोहित कंसल की अध्यक्षता में वीबी-जी आरएएम जी अधिनियम, 2025 को लागू करने और उसे चालू करने की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान, डीओआरडी सचिव ने महात्मा गांधी एनआरईजीएस से वीबी-जी आरएएम जी अधिनियम के तहत संशोधित ढांचे में सुचारू रूप से बदलाव के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा की जा रही तैयारियों की गतिविधियों की स्थिति की समीक्षा की। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे सभी महत्वपूर्ण तैयारी के उपायों को समय-सीमा के भीतर पूरा करें, ताकि अधिनियम के लागू होने के बाद उसको बिना किसी रुकावट के लागू किया जा सके।
बैठक के दौरान जिन तैयारियों की समीक्षा की गई, उनमें संशोधित फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए ज़रूरी राज्य-स्तरीय उपाय शामिल थे; जैसे-राज्य वीबी-जी आरएएम जी योजना की अधिसूचना जारी करने की तैयारी, अधिनियम के तहत राज्य-विशिष्ट नियम बनाना, डीबीटी-स्पर्श (SPARSH) और एसएनए-स्पर्श के लिए तकनीकी एकीकरण और युक्तधारा पोर्टल के जरिए कामों की एक पर्याप्त सूची तैयार करना-जिसे अन्य जरूरी वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ सहभागी योजना दृष्टिकोण के तहत ग्राम सभा द्वारा विधिवत मंज़ूरी दी गई हो। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सलाह दी गई कि वे आवश्यक बजटीय प्रावधान करें और 1 जुलाई से वीबी- जी आरएएम जी को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन सुनिश्चित करें। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आगे यह भी सलाह दी गई कि वे संशोधित फ्रेमवर्क में सुचारू रूप से बदलाव के लिए महात्मा गांधी एनआरईजीएस के तहत लंबित देनदारियों का समय पर मिलान और निपटान सुनिश्चित करें।
श्री रोहित कंसल ने 1 जुलाई, 2026 से पहले सभी तैयारियों से जुड़ी गतिविधियों को समय पर पूरा करने के लिए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और तकनीकी टीमों सहित सभी हितधारकों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि महात्मा गांधी एनआरईजीएस से वीबी-जी आरएएम जी की ओर बदलाव, ग्रामीण रोजगार और आजीविका के ढांचे में एक बड़ा सुधार है, और इसलिए इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
डीओआरडी के सचिव ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वीबी- जी आरएएम जी अधिनियम, 2025 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पहले से की गई विभिन्न तैयारियों से जुड़ी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी। इस संबंध में, वीबी- जी आरएएम जी के तहत अनुमेय कार्यों की एक अंतरिम सूची पहले ही सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ उनकी प्रतिक्रिया और सुझावों के लिए साझा की जा चुकी है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर अतिरिक्त कार्यों का प्रस्ताव देने का भी अनुरोध किया गया है, जिन पर केंद्र सरकार द्वारा वीबी- जी आरएएम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची I के तहत विचार किया जा सकता है।
मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित किया कि वीबी- जी आरएएम जी अधिनियम, 2025 के तहत विभिन्न मसौदा नियम 22.05.2026 को जारी किए गए हैं और उन्हें अंतिम रूप दिए जाने से पहले 30 दिनों की अवधि के लिए व्यापक जन परामर्श हेतु ई-राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
संशोधित फ्रेमवर्क के तहत योजना बनाने और उसे लागू करने में मदद के लिए, ग्राम पंचायतों को ए/बी/सी श्रेणियों में बांटने का एक सांकेतिक ढांचा भी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे अपनी राज्य-विशेष जरूरतों और आवश्यकताओं के आधार पर, इस तरह के वर्गीकरण के लिए उपयुक्त मानदंड अपना सकते हैं।
मंत्रालय ने आगे बताया कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साप्ताहिक आधार पर नियमित परामर्श और समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि तैयारियों की समीक्षा की जा सके, जरूरी सहयोग दिया जा सके, कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों पर परामर्श में मदद मिल सके और नए फ्रेमवर्क में सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।
श्री कंसल ने आगे इस बात पर जोर दिया कि महात्मा गांधी एनआरईजीएस के तहत चल रहे काम 1 जुलाई, 2026 को वीबी- जी आरएएम जी अधिनियम के लागू होने तक बिना किसी रुकावट के जारी रहने चाहिए। इस संबंध में, रोजगार सृजन की निरंतरता सुनिश्चित करने और बेहतर व्यवस्था की ओर सुचारू रूप से आगे बढ़ने के लिए, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अनुमानित मांग के आधार पर जून, 2026 महीने के लिए पर्याप्त 'श्रम बजट' मंजूर कर दिया गया है।
इसके अलावा, श्री कंसल ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित किया कि इस बदलाव के दौर में धनराशि का प्रवाह बिना किसी रुकावट के जारी रहे और काम लगातार चलते रहें, इसके लिए महात्मा गांधी एनआरईजीएस के तहत मज़दूरी, सामग्री, प्रशासनिक और सामाजिक अंकेक्षण इकाई के घटकों के लिए ₹26,971 करोड़ की 'मदर सैंक्शन' (Mother Sanctions) जारी कर दी गई हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग को पर्याप्त रूप से पूरा करने के लिए धनराशि का समय पर उपयोग सुनिश्चित करें और चल रहे कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करें।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे जमीनी स्तर पर काम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें, रोजगार की सभी वास्तविक मांगों को पूरा करें, और ग्रामीण परिवारों को खासकर खेती के सबसे कम काम वाले मौसम के दौरान समय पर रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सलाह दी गई कि वे संशोधित ढांचे के शुरू होने से पहले, महात्मा गांधी एनआरईजीएस के तहत चल रहे कामों को समय पर पूरा करने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएं। हालांकि, इस बात पर जोर दिया गया कि 30 जून, 2026 तक चल रहे कामों को वीबी- जी आरएएम जी के प्रावधानों के अनुरूप रखते हुए, वीबी-जी आरएएम जी के तहत स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
श्री कंसल ने दोहराया कि मंत्रालय पूरे देश में ग्रामीण रोजगार और आजीविका के बेहतर ढांचे को सुचारू रूप से लागू करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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