Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

08/04/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/04/2026 06:56

ड्रग तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

गृह मंत्रालय

ड्रग तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

प्रविष्टि तिथि: 04 AUG 2026 3:25PM by PIB Delhi

अवैध मादक पदार्थों के व्यापार एवं नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो(एनसीबी), संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस के साथ तालमेल कर, युवाओं को नशे के खतरे से बचाने के लिए खुफिया-आधारित अभियानों और निवारक उपायों को जारी रखे हुए है। ड्रग तस्करों को रोकने के लिए 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत की गई विभिन्न कड़ी कार्रवाइयां निम्नलिखित हैं: -

  1. अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 26.06.2026 को "नारकोटिक्स कंट्रोल पर विज़न डॉक्यूमेंट(2026-2029)" जारी किया गया।यह सरकार 'सम्पूर्ण सरकार' तथा 'सम्पूर्ण समाज' विजन के आधार पर मादक पदार्थों पर नियंत्रण के लिए विभिन्न हितधारकों द्वारा प्राप्त किए जाने वाले स्पष्ट प्राथमिकताओं और समयबद्ध लक्ष्यों सहित तीन वर्ष की कार्ययोजना निर्धारित की गई है।
  2. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो(एनसीबी), मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियां(डीएलईए) और राज्यों की पुलिस स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985, अधिनियम, 1985(एनडीपीएस) के तहत कार्रवाई करने में सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं। इन सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप नशीली दवाओं की जब्ती, मामलों के पंजीकरण, गिरफ्तारियों, जब्त की गई दवाओं के निपटान, अवैध खेती को नष्ट करने, वित्तीय जांच और 'स्वापक औषधियों एवं मनः प्रभावी पदार्थों में अवैध यातायात की रोकथाम अधिनियम, 1988 (पीआईटीएनडीपीएस)' के तहत निवारक हिरासत के मामले में महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल हुई हैं।
  3. भारत में मादक पदार्थों की तस्करी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए एक 4-स्तरीय नार्को-समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) तंत्र की स्थापना की गई है।
  4. एनसीबी द्वारा एनसीओआरडी पोर्टल विकसित किया गया है। यह मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन से संबंधित सूचनाओं के लिए एक समेकित(ऑल-इन-वन) पोर्टल है। इस पोर्टल पर एनसीओआरडी, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, मादक पदार्थ अपराधियों का डेटा, विधिक जानकारी, तथा राज्यों द्वारा की गई अनुकरणीय पहलें आदि विषयों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
  5. मादक पदार्थों के महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मामलों, जिनमें नार्को-आतंकवाद से जुड़े मामले भी शामिल हैं, की जांच की निगरानी के लिए डीजी, एनसीबी की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति(जेसीसी) का गठन किया गया है। अब तक केंद्रीय स्तर पर 11 जेसीसी बैठकों तथा राज्य स्तर पर 75 जेसीसी बैठकों का आयोजन किया जा चुका है।
  6. सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों(डीजीपी) से अनुरोध किया गया है कि वे बीट कांस्टेबलों, क्षेत्रीय अधिकारियों तथा थाना प्रभारियों(एसएचओ) को रेड फ्लैग संकेतकों(आरएफआई) तथा विशेष रूप से मेफेड्रोन और एम्फेटामिन-प्रकार के उत्तेजक पदार्थों(एटीएस) सहित कृत्रिम(सिंथेटिक) मादक पदार्थों के गुप्त निर्माण से संबंधित उभरते खतरों के बारे में संवेदनशील एवं जागरूक बनाएं।
  7. एनसीबी मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आबकारी विभाग, सीमा सुरक्षा बल(बीएसएफ), राज्य मादक पदार्थ निरोधक कार्यबल(एएनटीएफ) तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित रूप से समन्वय स्थापित कर संयुक्त अभियान संचालित कर रहा है।
  8. संगठित कृत्रिम(सिंथेटिक) मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को खत्म करने और कमजोर बनाने के उद्देश्य से एनसीओआरडी, संयुक्त समन्वय समिति(जेसीसी) तथा क्षेत्रीय सम्मेलनों जैसे विभिन्न मंचों पर वित्तीय जांच और 'स्वापक औषधियों एवं मनः प्रभावी पदार्थों में अवैध यातायात की रोकथाम अधिनियम, 1988 (पीआईटीएनडीपीएस)' के प्रभावी क्रियान्वयन पर नियमित रूप से विशेष बल दिया जा रहा है।
  9. वित्तीय जांच के संबंध में व्यापक दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से अपराध से अर्जित आय की व्यवस्थित पहचान, उसका पता लगाने तथा उसे कुर्क करने की प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है।
  10. मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन अधिकारियों एवं एजेंसियों की क्षमता निर्माण के लिए एनसीबी कार्यशालाओं, संगोष्ठियों तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है। एनसीबी, संयुक्त राज्य अमेरिका के ड्रग प्रवर्तन प्रशासन(यूएस-डीईए) के सहयोग से, केंद्रीय एजेंसियों तथा राज्य की मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों(डीएलईए) के अधिकारियों की भागीदारी के साथ क्लैंडेस्टाइन प्रयोगशालाओं की जांच तथा प्रिकर्सर रसायनों के अवैध विचलन की जांच संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित कर रहा है।
  11. भारत मादक पदार्थों से संबंधित विषयों पर म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, श्रीलंका, इंडोनेशिया, सिंगापुर तथा संयुक्त राज्य अमेरिका(यूएसए) जैसे देशों के साथ महानिदेशक(डीजी) स्तर तथा द्विपक्षीय वार्ताएं नियमित रूप से आयोजित करता है।
  12. एनसीबी ने 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों तथा 19 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों(एमओयू) के माध्यम से मादक पदार्थ नियंत्रण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ किया है।
  13. "मादक-पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र"(मानस) के नाम से 24×7 टोल-फ्री राष्ट्रीय स्वापक हेल्पलाइन का शुभारंभ किया गया है। मानस की परिकल्पना एक एकीकृत प्रणाली के रूप में की गई है, जो नागरिकों को कॉल(1933), ई-मेल, वेब पोर्टल तथा उमंग मोबाइल ऐप जैसे विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए मादक पदार्थों से संबंधित समस्याओं एवं शिकायतों को दर्ज कराने, पंजीकृत करने तथा उनके समाधान के लिए एकल मंच उपलब्ध कराती है।
  14. देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में "मिशन ड्रग फ्री कैंपस" प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत युवाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए उन्हें नशा-मुक्त परिसर के महत्व के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनाया जा रहा है।

क्षेत्र-विशिष्ट पहलों के अंतर्गत, सरकार ने एनसीबी के माध्यम से खुफिया सूचना आधारित तथा प्रौद्योगिकी-संचालित कार्यशैली अपनाया है, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों, एन्क्रिप्टेड संचार अनुप्रयोगों तथा डार्कनेट के माध्यम से संचालित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क की पहचान कर उन्हें खत्म किया जा सके। इस संबंध में उठाए गए कदम इस प्रकार हैं:

डार्कनेट के माध्यम से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी तथा क्रिप्टोकरेंसी आधारित लेन-देन की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की सेवाएं लेकर प्रौद्योगिकी-सक्षम मादक पदार्थ तस्करी का मुकाबला करने की क्षमताओं को सुदृढ़ किया गया है।

प्रवर्तन कर्मचारियों की तकनीकी विशेषज्ञता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एनसीबी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के ड्रग प्रवर्तन प्रशासन(यूएस-डीईए) तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय(आरआरयू), गांधीनगर के सहयोग से एनसीबी एवं अन्य मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों(डीएलईए) के अधिकारियों के लिए साइबर-सक्षम मादक पदार्थ जांच, डिजिटल फॉरेंसिक, डार्कनेट निगरानी, क्रिप्टोकरेंसी जांच तथा मादक पदार्थों की तस्करी में उपयोग की जा रही अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों पर अनेक क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

इसके अलावा, 26.06.2026 को जारी स्वापक नियंत्रण पर विज़न दस्तावेज(2026-2029) में संगठित साइबर-आधारित ड्रग तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए सभी एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स(एएनटीएफ) में समर्पित डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी सेल बनाने, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और एआई-आधारित एनालिटिक्स अपनाने, शोध करने, एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की योजना है।

स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985(एनडीपीएस अधिनियम) का प्रशासन राजस्व विभाग के अधीन है। सरकार समय-समय पर एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा करती है, जिसमें न्यायालयों के निर्णयों, अधिनियम के क्रियान्वयन के अनुभवों तथा प्रवर्तन एजेंसियों एवं अन्य हितधारकों द्वारा चिन्हित कमियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐसी समीक्षाओं के आधार पर तथा उभरती चुनौतियों को देखते हुए, जहां आवश्यक समझा जाता है, वहां अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया सरकार की निरंतर विधायी समीक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, ताकि वैधानिक ढांचा प्रभावी, समकालीन तथा बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप उत्तरदायी बना रहे।

"स्वापक नियंत्रण पर विजन दस्तावेज(2026-2029)" में अन्य बातों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों के चारों ओर 500-मीटर के दायरे को "नशा-मुक्त परिसर क्षेत्र(ड्रग फ्री कैंपस+500 मीटर)" के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, इस विजन दस्तावेज में केंद्रीय वित्तपोषित उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत सहमति-आधारित स्क्रीनिंग परीक्षण का भी प्रस्ताव किया गया है। यह पहल विजन दस्तावेज के अंतर्गत निर्धारित तीन वर्षीय समयबद्ध कार्ययोजना का हिस्सा है, जो नशा-मुक्त परिसर, निवारक शिक्षा, जन-जागरूकता कार्यक्रम, परामर्श सेवाओं तथा सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देकर शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित एवं नशा-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।

यह जानकारी गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

***

पीके/केसी/पीकेपी


(रिलीज़ आईडी: 2294466) आगंतुक पटल : 3
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Bengali
Ministry of Heavy Industries of the Republic of India published this content on August 04, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 04, 2026 at 12:56 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]