Amar Ujala Ltd

10/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/06/2026 19:24

महंगाई बढ़ी तो बदला पैकेट का गणित: छोटे पैक में सामान की मात्रा कम, बड़े पैक किए महंगे; ग्राहकों पर कितना असर

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महंगाई बढ़ी तो बदला पैकेट का गणित: छोटे पैक में सामान की मात्रा कम, बड़े पैक किए महंगे; ग्राहकों पर कितना असर?

Wed, 07 Oct 2026 04:27 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 07 Oct 2026 04:27 AM IST
सार

दशहरा और दिवाली से पहले रोजमर्रा के सामान की बढ़ती लागत का असर अब ग्राहकों को पैकेट के अंदर भी दिखने लगा है। कंपनियां कई छोटे पैक की कीमत वही रखते हुए उनमें सामान की मात्रा घटा रही हैं, जबकि बड़े पैक के दाम सीधे बढ़ाए जा रहे हैं। बिस्कुट, नमकीन, नूडल्स, साबुन, शैंपू और चाय जैसी चीजें इससे प्रभावित हैं। आखिर कंपनियां ऐसा क्यों कर रही हैं और ग्राहक पर इसका कितना असर पड़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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विस्तार

दशहरा और दिवाली से पहले रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान की बढ़ती कीमतों का असर अब अलग तरीके से दिखाई दे रहा है। कच्चे माल और उत्पादन से जुड़ी लागत बढ़ने के बीच कंपनियां हर पैकेट की कीमत सीधे बढ़ाने से बच रही हैं। इसके बजाय छोटे पैक में सामान की मात्रा घटाई जा रही है। कई मामलों में मात्रा में 2 से 7 फीसदी तक की कमी की जा रही है। वहीं बड़े पैक की कीमत सीधे 5 से 6 फीसदी तक बढ़ाई जा रही है। इसका मतलब है कि ग्राहक को कई सामान पहले जितने ही रुपये में मिलेंगे, लेकिन पैकेट में सामान कुछ कम होगा।
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कंपनियां पैकेट में सामान कम क्यों कर रही हैं?
एफएमसीजी कंपनियों के सामने इस समय लागत बढ़ने और ग्राहकों को कीमत का झटका देने से बचने की दोहरी चुनौती है। पाम ऑयल, पैकेजिंग, कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों और दूसरी जिंसों की कीमत बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ रही है। दूसरी ओर ग्राहक रोजमर्रा की चीजों की कीमत को लेकर काफी सतर्क हैं। ऐसे में कंपनियां ऐसी कीमत बनाए रखना चाहती हैं, जिससे बिक्री की मात्रा पर ज्यादा असर न पड़े। इसलिए छोटे पैक में कीमत बढ़ाने के बजाय सामान की मात्रा कम करना आसान विकल्प माना जा रहा है। ग्राहक को पैकेट की कीमत पहले जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसमें मिलने वाला सामान कम हो जाता है।
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किन रोजमर्रा के सामान पर इसका असर दिख रहा है?
यह बदलाव बिस्कुट, नमकीन, स्नैक्स, नूडल्स, हेयर ऑयल, साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, चीनी और चाय जैसी रोजमर्रा की चीजों में देखने को मिल रहा है। बिस्कुट, नमकीन और स्नैक्स बनाने वाली कई कंपनियों ने बढ़ी लागत से निपटने के लिए कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं। बीकाजी फूड्स के मनोज वर्मा के मुताबिक, पिछले छह-सात महीनों में औसत कच्चे माल की लागत करीब 7 फीसदी बढ़ी है। पाम ऑयल, पैकेजिंग और दूसरी जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है। यानी कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है और उसका असर किसी न किसी रूप में ग्राहकों तक पहुंच रहा है।
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दूध और घी की कीमतों पर कितना दबाव है?
त्योहारी सीजन में डेयरी उत्पादों की लागत पर भी दबाव बढ़ रहा है। पारस डेयरी के विपणन अधिकारी वीपीएस मलिक के मुताबिक, त्योहारी सीजन में दूध की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकती है। घी की कीमत पहले ही 25 से 30 रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी है। इसके अलावा इतनी ही और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। इसका सीधा असर उन परिवारों के बजट पर पड़ सकता है, जिनके घर में दूध और घी की नियमित खपत होती है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों में डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ने से भी कीमतों पर नजर बनी हुई है।

10, 20 और 50 रुपये के पैक पर कंपनियों की नजर क्यों है?
डाटा रिसर्च फर्म नीलसन इंडिया के प्रीतम भादुड़ी के मुताबिक, कंपनियों के लिए 10, 20 और 50 रुपये कीमत वाले छोटे पैक काफी महत्वपूर्ण हैं। इन पैकों की कीमत बढ़ने पर ग्राहक को सामान तुरंत महंगा महसूस हो सकता है। इसलिए इन पैकों में मात्रा घटाना कंपनियों के लिए आसान रास्ता बन जाता है। दूसरी तरफ बड़े पैक में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश ज्यादा होती है। आधुनिक रिटेल और ई-कॉमर्स में बिकने वाले बड़े पैक पर कंपनियां बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा सीधे ग्राहक पर डाल सकती हैं। इस तरह कंपनियां छोटे पैक में कीमत को नियंत्रित रखने और बड़े पैक में दाम बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। इसका असर ग्राहक की जेब पर सिर्फ कीमत बढ़ने से नहीं, बल्कि कम सामान मिलने के रूप में भी पड़ सकता है।
Amar Ujala Ltd published this content on October 07, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on October 07, 2026 at 01:25 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]