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09/08/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/08/2026 09:14

ब्रिक्स 2026: चीन के मोबाइल फोन ने जमाया बाजार पर कब्जा, भारत भी चाहता है कारोबार संतुलन

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ब्रिक्स 2026: चीन के मोबाइल फोन ने जमाया बाजार पर कब्जा, भारत भी चाहता है कारोबार संतुलन

शशिधर पाठक
Updated Tue, 08 Sep 2026 08:26 PM IST
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पीएम मोदी और शी जिनपिंग। - फोटो : PTI
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ब्रिक्स फोरम का आधार तीन देश हैं। भारत-रूस-चीन। चीन एशिया का सबसे प्रभावी देश है। रूस दुनिया की महाशक्ति है और भारत दक्षिण एशिया का सबसे प्रभावी देश। कूटनीति के जानकार मानते हैं कि रूस की पहल से भारत, चीन करीब आ रहे हैं। माना जा रहा है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इसकी पूरी बानगी देखने को मिलेगी।
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पूर्व विदेश सचिव शशांक भी मानते हैं कि चीन और भारत में रिश्तों की मिठास संभव है। यह भी संभव है कि रूस ने इस मिठास को लेकर अपनी भूमिका को बढ़ाया हो। वैसे भी जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अगस्त 2026 में अपने समकक्ष वांग यी से चीन में बात कर रहे थे तो उस समय विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस में भारतीय हित को आगे बढ़ाने में व्यस्त थे।
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चीन ने भारत के मोबाइल कारोबार पर जमाया कब्जा
2002-03 के दौर में भारत के मोबाइल फोन के बाजार में नोकिया के फोन की बादशाहत थी। इसके बाद सैमसंग ने बहुत तेजी से जगह बनाई। अब चीन के फोन की धूम है। प्रीमियम सेगमेंट में अमेरिका के आईफोन की बादशाहत है। भारतीय मोबाइल फोन बाजार की रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 15.2 करोड़ मोबाइल फोन बिकते हैं। इनमें से 70-75 प्रतिशत चीन की कंपनियों (विवो 18-20 प्रति, शाओमी और पोको 17.9,ओप्पो 13, रीयलमी 10 प्रति, वन प्लस,आईक्यू00 भी ) के फोन की बिक्री होती है। लेनोवो ने अब अमेरिका की कंपनी मेटरोला का स्वामित्व हासिल कर लिया है। इस तरह से सैमसंग की हिस्सेदारी घटकर 14-15 प्रतिशत पर आ गई है। आईफोन 10-11 प्रतिशत। यह इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में चीन के मोबाइल फोन का दबदबा है।

भारत चाहता है कि इस क्षेत्र में चीन सहयोग के साथ आगे आए। डोमेस्टिक वैल्यू एडीशन(नॉक डाऊन)स्थिति बेहतर हो और इससे व्यापार घाटा को रोकने में सहायता मिलेगी। अभी तक भारत में मोबाइल निर्माणन क्षेत्र में वैल्यू एडीशन के नाम पर केवल चार्जर, प्लास्टिक केबल, बैट्री पैक, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड(पीसीबी) जैसी चीजें बन रही हैं। इस काम में 290 से अधिक कंपनिया लगी हैं। पूरे प्रयास के बाद यह वैल्यू एडिशन बमुश्किल 18-21 प्रतिशत तक हो सका है। इसे भारत 35-40 प्रतिशत तक ले जाना चाहता है।
पका फल खाकर दोस्ती का मधुर संदेश देंगे भारत और चीन....
भारत और चीन एक दूसरे के संपर्क में हैं। राष्ट्रपित शी जिनपिंग बड़े प्रतिनिधमंडल के साथ भारत आ रहे हैं। ओप्पो इंडिया के बड़े अधिकारी को काफी उम्मीदें हैं। वहीं सामरिक और रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के लोगों के बीच में दोस्ती गहराने से पहले सही संदेश जरूरी है। बताते हैं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीजिंग दौरे के दौरान इसकी प्रस्तावना बन गई है। डोभाल की एक पुरानी नीति है। जहां विवाद जटिल है, वहां संवाद और समाधान का मैकेनिज्म बनाना चाहिए। जहां कम है, वहां समाधान की तरफ बढ़ना चाहिए और जहां लगभग सहमित है, उसे निर्णायक भूमिका में लाना चाहिए। डोभाल ने इसी रणनीति के तहत डोकालाम में भारत-चीन के बीच में तनाव के दौरान सामंजस्य बिठाया था। लद्दाख में तनाव बढ़ने पर, वह इसी रणनीति को लेकर आगे बढ़े। ऐसे में इसकी पूरी संभावना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीधी उड़ान सेवा, दोनों देशों के बीच में सैन्य अधिकारियों के बीच में बैठक शुरू होने के बाद अगला कदम सिक्किम की सीमा पर बनी सहमति के तौर पर आ सकता है। इसी तरह की कुछ और पहल के साथ भारत और चीन साथ चलने के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं।
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रूस के साथ कई क्षेत्रों में भारत आगे बढ़ा सकता है कदम
रूस ने भारत को पांचवी पीढ़ी का अत्याधुनिक Su-57 फाइटर जेट देने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा रक्षा, अंतरिक्ष, विज्ञान समेत तमाम क्षेत्रों में दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं। इसी साल दोनों देशों में एनुअल इंटरगवर्नमेंटल बैठक भी होनी है। रूस चाहता है कि ब्रिक्स देश अर्थ व्यवस्था, कारोबार के क्षेत्र में अहम निर्णय लें। डॉलर के प्रभुत्व को कम किए जाने, एकाधिकार पर चोट किए जाने की पहल हो। हालांकि भारत कभी भी एक पक्षीय नीति पर नहीं चला है। इसलिए रूस के साथ भारत अच्छे संबंध का संदेश देगा, लेकिन थोड़ी गुंजाइश बनाकर रखेगा। बिश्केक में जारी हुए साझा में इसकी संवेदनशीलता देखने को मिल सकती है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 08, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 08, 2026 at 15:14 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]