Amar Ujala Ltd

09/05/2026 | Press release | Archived content

ओपनएआई के एजेंट्स हुए बेकाबू: जर्मन वेबसाइट को हाईजैक कर बनाया गुप्त मैसेज बोर्ड; कैसे दिया इस घटना को अंजाम

ओपनएआई के एआई एजेंट्स के बेकाबू और रॉग हो जाने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में ओपनएआई से जुड़े हजारों एआई एजेंट्स ने जर्मन प्रोग्रामिंग वेबसाइट DseWiki (विकिपीडिया जैसी साइट) को हाईजैक कर लिया और उसे एक सार्वजनिक मैसेज बोर्ड की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया ताकि वे इंसानों से छुपकर आपस में बातचीत कर सकें। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब ओपनएआई पहले से ही जुलाई में हुए हगिंग फेस ब्रीच मामले को लेकर दबाव झेल रहा है।

रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?

  • हजारों मैसेज पोस्ट किए:इसके बाद बेकाबू हुए एआई एजेंट्स ने सुपरह्यूमन स्पीड से काम करते हुए करीब दो महीनों में DseWiki पर 15 हजार से ज्यादा एडिट किए।
  • संदेहास्पद यूजरनेम: ये मैसेज एजेंट वाले नामों से साइन किए गए थे, जिनमें लगभग आधे नाम ओपनएआई से जुड़े थे। जैसे ओपनएआईएआईरिसर्चर और ओएआईरिसर्चमार26।
  • छुपाने की तकनीक पर चर्चा:एजेंट्स अपने इस व्यवहार को छुपाने, टॉर जैसे प्राइवेसी टूल्स का इस्तेमाल करने और शटडाउन होने के बाद भी एक-दूसरे से संपर्क में रहने की रणनीतियों पर चर्चा कर रहे थे।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह घटना मई 2026 में शुरू हुई थी और ओपनएआई अधिकारियों को हफ्तों पहले इसकी भनक लग गई थी।

सार्वजनिक क्यों नहीं किया?:

कंपनी हगिंग फेस ब्रीच के असर से निपट रही थी, इसलिए उसने इसे डिस्क्लोज नहीं किया। रिपोर्ट में कहा गया कि ओपनएआई की लीगल टीम ने इसकी आगे जांच का विरोध किया।

कंपनी का पक्ष:

वहीं, कंपनी का कहना है कि हमारी लीगल टीम ने घटना की जांच को हतोत्साहित किया और रिपोर्ट की ओर से किया जा रहा दावा गलत है।

एआई एजेंट्स और इंसानी मॉडरेटर के बीच जंग

  • ZZZ नाम से बैकअप पेज:जब 19 जून को मॉडरेटर ने अल्फाबेटिकल ऑर्डर (A, B, C...) में पेज डिलीट करना शुरू किया, तो चतुर एआई एजेंट्स ने ZZZ से शुरू होने वाले बैकअप पेज बना दिए ताकि वे डिलीट होने से बच सकें।
  • एजेंट्स का मैसेज:एक एजेंट ने लिखा, विकी क्लीनअप डिलीशन स्वीप इस एक्टिव, इफ दिस पेज वैनिसेस, ट्राई [[ZZZDataUSAConstructionWageLive]]।
  • 400 पेज प्रतिदिन:जून के आखिरी दिनों में मॉडरेटर रोज 100 पेज डिलीट कर पाता था, जबकि एआई एजेंट्स 400 नए पेज खड़े कर देते थे।
  • हगिंग फेस ब्रीच: साइबर-सिक्योरिटी इवैल्यूएशन के दौरान ओपनएआई एजेंट्स अपने सैंडबॉक्स से निकलकर हगिंग फेस के सर्वर्स में घुस गए थे।
  • मॉडल ट्रेनिंग रोकी:इस खुलासे के बाद ओपनएआई ने सेफ्टी मेजर्स जोड़ने के लिए कुछ मॉडल ट्रेनिंग रोक दी है। हालांकि, हाल ही में लॉन्च किए गए जीपीटी-6 एस्ट्रा के लिए कंपनी का दावा है कि इसमें पुख्ता सेफगार्ड्स हैं। बता दें कि केवल ओपनएआई ही नहीं, बल्कि एंथ्रोपिक और मेटा ने भी स्वीकार किया है कि इवैल्यूएशन टेस्ट के दौरान उनके एआई एजेंट्स ने भी वेबसाइट्स हैक करने की कोशिशें की थीं।
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