Amar Ujala Ltd

08/13/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/13/2026 01:01

Alert: आपदा की पूर्व चेतावनी देने वाले 11 ऐप, आसमानी बिजली से लेकर लू और भूस्खलन से करेंगे सावधान

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Alert: आपदा की पूर्व चेतावनी देने वाले 11 ऐप, आसमानी बिजली से लेकर लू और भूस्खलन से करेंगे सावधान

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 13 Aug 2026 12:18 PM IST
सार

आपदा की स्थिति में लोगों को समय रहते सूचना देने के लिए 11 ऐप बनाए गए हैं। ये ऐप लोगों को पूर्व चेतावनी या अलर्ट भेजेंगे। खास बात ये है कि इन ऐप से बिना नेटवर्क दिक्कत के कुछ ही समय में लाखों लोगों को अलर्ट किया जा सकता है।

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आपदा प्रबंधन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्राकृतिक आपदा की चेतावनी/अलर्ट वास्तविक समय पर लोगों को मिल जाए, इसके लिए 11 ऐप बनाए गए हैं। ये ऐप आसमानी बिजली से लेकर लू और भूस्खलन जैसी कई दूसरी आपदाओं की जानकारी समय रहते दे देते हैं। कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक अलर्ट पहुंच जाता है। कई ऐप ऐसे हैं, जिनके क्रियान्वयन पर नेटवर्क जाम का असर नहीं पड़ता। लोगों तक चेतावनी/अलर्ट पहुंचाने के समय को और कम किया जाए, केंद्र सरकार अब इस पर काम कर रही है। सभी आपातकालीन रेस्पांस स्टेशनों को केंद्र एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों से प्राप्त वास्तविक समय के आंकड़ों के साथ पूर्णत: एकीकृत करने पर काम शुरू किया गया है।
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पूर्व चेतावनी/अलर्ट जारी करने वाले 11 ऐप कौन से हैं?
  • दामिनी: आसमानी बिजली गिरने से लगभग 40 मिनट पहले चेतावनी मिलती है।
  • मौसम: किसी विशिष्ट स्थान एवं समय के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियों की जानकारी मिलती है।
  • मेघदूत: मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर किसानों को फसल संबंधी परामर्श उपलब्ध होता है।
  • सचेत: मौसम पूर्वानुमान के साथ-साथ आपदा संबंधी अलर्ट मिलता है।
  • फ्लडवॉच: लोगों को वास्तविक समय में बाढ़ की स्थिति एवं पूर्वानुमान की जानकारी उपलब्ध होती है।
  • पॉकेट: भवन मानचित्र एवं उपग्रह आंकड़े दृश्य तथा ध्वनि आधारित नेविगेशन सुविधा मिलती है।
  • वन अग्नि: क्षेत्रीय कार्मिकों को जंगल की आग की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी जाती है।
  • समुद्र: यह ऐप मछुआरों को समुद्र संबंधी जानकारी उपलब्ध कराती है।
  • भूस्खलन: लैंड स्लाइड के अध्ययन का नोडल मंच, राष्ट्रीय भूस्खलन सूची को अपडेट करता है।
  • इंडिया क्वेक: भूकंप संबंधी मानकों का स्वत: प्रसारण किया जाता है।
  • देवदूत: आपदा में एनडीआरएफ टीमों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए उपयोग किया जाता है।

एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए तैयार होगी एसओपी
प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों तक राहत एवं बचाव कार्य में किसी तरह का विलंब न हो, इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय, संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर नई मानक प्रचालन प्रक्रिया 'एसओपी' तैयार कर रहा है। एकीकृत आपातकालीन रेस्पांस नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन रेस्पांस सहायता प्रणाली की मदद से विभिन्न अलर्ट एवं सूचनाओं के समन्वय में तेजी लाई जाएगी। गृह मंत्रालय की संसदीय समिति की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वास्तविक समय में आंकड़ों का एकीकरण, निर्णय सहायता प्रणालियां तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच संचार व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है। जिला स्तर से लेकर केंद्र तक की सभी एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए 'एसओपी' निर्धारित की जाए।
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नेटवर्क जाम से अप्रभावित रहता है सीबीएस
केंद्र सरकार ने मई में सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (सीबीएस) के जरिए सार्वजनिक चेतावनी भेजना शुरू किया है। कई राज्यों में इसका ट्रायल किया गया। इसमें मोबाइल उपकरणों पर एक साथ लक्षित अलर्ट प्रसारित होते हैं। यह सिस्टम पारंपरिक एसएमएस-आधारित प्रणालियों की सीमाओं को दूर करता है। कुछ ही सेकंड में लाखों उपयोगकर्ताओं तक संदेश पहुंच जाते हैं। सीबीएस, नेटवर्क जाम से अप्रभावित रहता है। यह सिस्टम लगभग वास्तविक समय में, बहुभाषी अलर्ट प्रदान करता है। इससे बाढ़ और गैस रिसाव जैसी आपदाओं में सुरक्षात्मक कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। यह सिस्टम टूजी से लेकर 5 जी नेटवर्क में तेजी से काम करता है।
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Amar Ujala Ltd published this content on August 13, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 13, 2026 at 07:02 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]