Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

01/28/2026 | Press release | Distributed by Public on 01/28/2026 10:47

केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी ने गूगल के ‘एआई फॉर लर्निंग फोरम’ में एआई-आधारित शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए अपना विज़न प्रस्तुत किया; सीसीएसयू मेरठ में भारत के पहले एआई-सक्षम[...]

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी ने गूगल के 'एआई फॉर लर्निंग फोरम' में एआई-आधारित शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए अपना विज़न प्रस्तुत किया; सीसीएसयू मेरठ में भारत के पहले एआई-सक्षम राज्य विश्वविद्यालय के प्रायोगिक मॉडल की घोषणा की


मंत्री महोदय ने महानगरों से परे एआई तक लोकतांत्रिक पहुँच सुनिश्चित करने, शिक्षकों को सशक्त बनाने तथा 'विकसित भारत 2047' के तहत भविष्य के लिए तैयार संस्थानों हेतु एक राष्ट्रीय खाका तैयार करने का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 28 JAN 2026 7:06PM by PIB Delhi

केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार, श्री जयंत चौधरी ने आज नई दिल्ली में आयोजित गूगल के 'एआई फॉर लर्निंग फोरम' में शिक्षा और कौशल विकास इकोसिस्टम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण के लिए सरकार के विज़न को रेखांकित किया।

माननीय मंत्री जी ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, गूगल क्लाउड और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के बीच हुए एक ऐतिहासिक गठजोड़ से जुड़ी घोषणाएं कीं, जिसके तहत सीसीएसयू को भारत के पहले एआई-सक्षम राज्य विश्वविद्यालय के प्रायोगिक मॉडल (पायलट) के रूप में स्थापित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री के प्रौद्योगिकी-सशक्त विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार रूप देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

इस कार्यक्रम में गूगल के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया, जिनमें सुश्री प्रीति लोबाना, उपाध्यक्ष एवं कंट्री मैनेजर, गूगल इंडिया; श्री क्रिस फिलिप्स, उपाध्यक्ष एवं शिक्षा के लिए वैश्विक प्रमुख, गूगल; श्री विल्सन व्हाइट, उपाध्यक्ष, सरकारी कार्य एवं सार्वजनिक नीति, गूगल एपीएसी; तथा सुश्री योलिंड लोबो, निदेशक, सरकारी कार्य एवं सार्वजनिक नीति, गूगल क्लाउड सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

औपचारिक सत्र से पहले, श्री जयंत चौधरी ने सीसीएसयू के छात्रों और संकाय सदस्यों से बातचीत की और इस विषय पर खुली चर्चा की, कि किस प्रकार एआई ज्ञानार्जन के मार्गों का विस्तार कर सकता है, रोजगार-योग्यता को बढ़ा सकता है और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित कर सकता है।

सुश्री योलिंड लोबो द्वारा संचालित एक आत्‍मीय संवाद के दौरान मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए, मंत्री महोदय ने शिक्षा और कौशल विकास के बीच मौजूद खाइयों को समाप्त करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और कहा कि प्रौद्योगिकी-विशेष रूप से एआई-कक्षा-आधारित शिक्षण और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करती है।

श्री जयंत चौधरी ने कहा, "विकसित भारत की परिकल्पना हमारी जनसांख्यिकीय क्षमता को जनसांख्यिकीय गतिशीलता में रूपांतरित करने पर आधारित है। लंबे समय तक डिग्री और कौशल को अलग-अलग धाराओं के रूप में देखा गया। एआई हमें अंततः इन्हें जोड़ने में सक्षम बनाता है। इस प्रकार की साझेदारियों के माध्यम से हम केवल प्रौद्योगिकी को इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक ऐसी रोजगार-योग्यता प्रणाली का निर्माण कर रहे हैं, जो भौगोलिक सीमाओं से परे, विश्वस्तरीय कौशलों तक लोकतांत्रिक पहुँच सुनिश्चित करती है।"

सीसीएसयू एआई-फर्स्‍ट एजूकेशन के लिए नेशनल 'लिविंग लैबोरेटरी' के रूप में कार्य करेगी

इस प्रायोगिक मॉडल के तहत, सीसीएसयू मेरठ एआई-आधारित संस्थागत सुधार के लिए एक 'लिविंग लैबोरेटरी' के रूप में कार्य करेगा। विश्वविद्यालय, छात्रों के लिए व्यक्तिगत एआई ट्यूटर, एआई-आधारित कौशल-अंतर विश्लेषण तथा प्रशासनिक कार्यप्रवाह को सुव्यवस्थित करने हेतु इंटेलिजेंट डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग को लागू करेगा। यह पहल एक ऐसा स्केलेबल ढांचा विकसित करने के लिए तैयार की गई है, जिसे भारत के उच्च शिक्षा इकोसिस्टम में व्यापक रूप से अपनाया जा सके।

मंत्री महोदय ने रेखांकित किया कि इस प्रायोगिक मॉडल का त्वरित लाभ सीसीएसयू से संबद्ध महाविद्यालयों को मिलेगा, तथा इससे प्राप्त अनुभवों को देश के 45,000 से अधिक महाविद्यालयों और 1,200 से अधिक विश्वविद्यालयों में चरणबद्ध रूप से विस्तार देने का उद्देश्य है। उन्होंने सरकार की ₹60,000 करोड़ की मॉडल आईटीआई योजना के साथ इसके संरेखण पर भी बल दिया, जिसके माध्यम से व्यावसायिक संस्थान उन्नत अवसंरचना के साथ-साथ एआई-सक्षम पाठ्यक्रमों को भी एकीकृत कर सकेंगे।

उन्होंने कहा , "यह साझेदारी भारतीय शिक्षा के भविष्य के लिए एक स्वर्ण मानक है। हम सीसीएसयू को केवल एक विश्वविद्यालय के रूप में नहीं, बल्कि संस्थागत परिवर्तन के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में देख रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मेरठ के छात्रों को भी वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्रों के समान एआई क्षमताओं तक पहुँच प्राप्त हो।"

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और शिक्षक सक्षमता को सुदृढ़ करना

फोरम के दौरान घोषित गूगल की प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में, वधवानी एआई को ₹85 करोड़ (लगभग $10 मिलियन) की Google.org अनुदान राशि प्रदान की जाएगी, जो राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म जैसे स्‍वयं (SWAYAM) और पोषण ट्रैकर में एआई उपकरणों के एकीकरण को समर्थन देगी, जिसका उद्देश्य लगभग 7.5 करोड़ शिक्षार्थियों तक पहुँच बनाना है।

जमीनी स्तर पर और गहन भागीदारी के लिए आह्वान करते हुए, मंत्री महोदय ने गूगल से आग्रह किया कि वह केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों तक एआई समर्थन का विस्तार करे, यह संकेत देते हुए कि इन संस्थानों में शिक्षकों को सक्षम बनाना दूरदराज़ के क्षेत्रों में डिजिटल अवसरों को साकार करने की कुंजी है।

समावेशी एआई के लिए वैश्विक दक्षिण की परीक्षणभूमि के रूप में भारत

भारत की नेतृत्व भूमिका को रेखांकित करते हुए, श्री जयंत चौधरी ने कहा कि भारत की विविध भाषाई और भौगोलिक पृष्ठभूमि के लिए सह-निर्मित समाधान वैश्विक दक्षिण के लिए मॉडल के रूप में कार्य कर सकते हैं।

उन्होंने कहा , "जब हम भारत के लिए समाधान ढूँढते हैं, तो हम दुनिया के लिए समाधान ढूँढते हैं। जो एआई उपकरण कम लागत वाली डिवाइस और स्थानीय भाषाओं के उपयोगकर्ताओं के लिए विकसित किए जा रहे हैं, वे वैश्विक सार्वजनिक वस्तुएँ हैं। भारत इन 'मेड इन इंडिया' शिक्षा मॉडलों को अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है" और विश्व-बंधु - दुनिया के साथ मित्रता - के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

गूगल नेतृत्व ने जनसंख्या-स्तरीय प्रभाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

गूगल इंडिया की कंट्री मैनेजर और उपाध्यक्ष, प्रीति लोबाना ने कहा, "एक वैश्विक एआई केंद्र बनने के भारत के विज़न का समर्थन करने के लिए गूगल पूरी दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। इस गठजोड़ के माध्यम से, सीसीएसयू गूगल क्लाउड और जेमिनी का उपयोग करके व्यक्तिगत ज्ञानार्जन से लेकर एआई-संचालित करियर समर्थन तक के लर्निंग समाधान तैयार करेगा। सीसीएसयू को एआई-फ़र्स्‍ट संस्थान के रूप में विकसित करने का समर्थन करके, हम भारत की शिक्षा और कौशल विकास का आधुनिकीकरण करने के लिए एक पायलट ढांचा तैयार करने का लक्ष्य रख रहे हैं। हम कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय और सीसीएसयू के साथ मिलकर यह प्रदर्शित करने के लिए उत्साहित हैं कि कैसे प्रौद्योगिकी बड़े पैमाने पर मानव क्षमता को साकार कर सकती है,यह सुनिश्चित करने के लक्ष्‍य के साथ कि प्रत्येक छात्र, चाहे वह किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में हो, विश्वस्तरीय ज्ञानार्जन उपकरणों तक पहुँच प्राप्त कर सके।"

श्री क्रिस फिलिप्स ने शिक्षा में जिम्मेदार एआई के लिए गूगल के दृष्टिकोण को रेखांकित किया, जिसमें लर्निंग साइंस, लाभकारी संघर्ष और जेमिनी, सर्च और नोटबुकएलएम जैसे उपकरणों पर जोर दिया गया, जिन्हें फोरम के दौरान लाइव प्रोडक्ट डेमो में प्रदर्शित किया गया।

एआई-रेडी संस्थानों के लिए राष्ट्रीय खाका तैयार करना

सीसीएसयू के कार्यान्वयन से सीख लेते हुए, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय एक नेशनल बेस्‍ट प्रैक्टिस फ्रेमवर्क विकसित करेगा, जो महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को स्वयं को "एआई-सक्षम संस्थान" के रूप में प्रमाणित करने में सक्षम बनाएगा। इसके अलावा, सीसीएसयू मंत्रालय के नेटवर्क में ज्ञान-साझाकरण सत्र आयोजित करके उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

शिक्षा और कौशल विकास प्रणालियों में एआई एकीकरण की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के एक प्रतीक के रूप में इस फोरम का समापन श्री जयंत चौधरी और गूगल नेतृत्व की साथ मिलकर खिंचवाई गई तसवीरों के साथ हुआ।

यह गठजोड़ सरकार की उस प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है कि प्रत्येक शिक्षार्थी - चाहे उसकी पृष्ठभूमि या स्थान कुछ भी हो - केवल डिग्री के साथ ही नहीं, बल्कि एआई-आधारित अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार कौशल के साथ उत्‍तीर्ण होगा।

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पीके/केसी/पीके


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