Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

08/05/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/05/2026 07:36

सरकार का उद्देश्य भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कॉन्टेंट से मुक्त रखना और एक सुरक्षित व भरोसेमंद डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है

सूचना और प्रसारण मंत्रालय

सरकार का उद्देश्य भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कॉन्टेंट से मुक्त रखना और एक सुरक्षित व भरोसेमंद डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है


राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) महिलाओं और बच्चों पर हो रहे साइबर अपराधों की गुमनाम रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है; 'रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट' मॉड्यूल नागरिकों को डीपफेक से जुड़ी संदिग्ध डिजिटल संस्थाओं को चिह्नित करने में मदद करता है

प्रविष्टि तिथि: 05 AUG 2026 5:08PM by PIB Delhi

सरकार की नीतियों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के साथ-साथ सभी यूजर्स के लिए एक खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है। सरकार भारत में इंटरनेट को किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सामग्री या सूचना, विशेष रूप से अश्लील और आपत्तिजनक कॉन्टेंट से मुक्त रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी अधिनियम) और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 (आईटी नियमावली) मिलकर डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक कॉन्टेंट से निपटने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मध्यस्थों पर स्पष्ट दायित्व लागू करते हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अंतर्गत सोशल मीडिया मध्यस्थों के साथ-साथ सभी मध्यस्थों पर यह सुनिश्चित करने का दायित्व है कि उनके कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स कोई भी ऐसा कॉन्टेंट होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, संशोधित, प्रकाशित, प्रसारित, संग्रहीत, अपडेट या साझा करें जो अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से संबंधित, बच्चों के लिए हानिकारक, निजता का उल्लंघन करने वाली, लिंग के आधार पर अपमानजनक या उत्पीड़न करने वाली हो या किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में दिए गए कानूनी दायित्वों का पालन करने की स्थिति में, मध्यस्थ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के अंतर्गत प्राप्त थर्ड पार्टी सूचना से छूट खो देंगे। वे किसी भी मौजूदा कानून के अंतर्गत परिणामी कार्रवाई या अभियोजन के लिए उत्तरदायी होंगे।

10 फरवरी 2026 को, सरकार ने कृत्रिम रूप से तैयार जानकारी (एसजीआई) से होने वाले नुकसानों को दूर करने के लिए आईटी नियमों में संशोधन करके नियामक फ्रेमवर्क को मजबूत किया, जिसमें डीपफेक और एआई से तैयार की गई सामग्री शामिल है।

संशोधनों के अनुसार, मध्यस्थों और बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को अवैध आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के माध्यम से तैयार कॉन्टेंट, जिसमें अश्लील, भ्रामक, व्यक्तियों का प्रतिरूपण करने वाला या बच्चों के लिए हानिकारक कॉन्टेंट शामिल है, के निर्माण और प्रसार को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होंगे। प्लेटफॉर्म को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 या यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 जैसे कानूनों के अंतर्गत संबंधित अपराधों की रिपोर्ट उचित अधिकारियों को देनी होगी।

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के एक अंग के तौर पर, 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (एनसीआरपी) (https://cybercrime.gov.in) को शुरू किया गया है, जिससे आम जनता सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सके। एनसीआरपी में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की कुछ श्रेणियों की गुमनाम आधार पर रिपोर्ट करने का प्रावधान भी शामिल है। "महिला/ बाल संबंधित अपराध की रिपोर्ट करें" मॉड्यूल के अंतर्गत, शिकायतकर्ता "गुमनाम आधार पर रिपोर्ट करें" विकल्प चुन सकते हैं, जिससे निजी पहचान विवरण प्रकट किए बिना शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

एनआरसीपी ने 'संदिग्ध की रिपोर्ट करें और जांच करें' नामक एक मॉड्यूल शुरू किया है, जिससे नागरिक संदिग्ध वेबसाइट यूआरएल, व्हाट्सएप नंबर/ टेलीग्राम हैंडल, फोन नंबर, ईमेल आईडी, एसएमएस हेडर/ नंबर, डीप फेक और सोशल मीडिया यूआरएल को रिपोर्ट कर सकें।

सरकार ने 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी)' योजना के अंतर्गत राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद जारी की है। इस सहायता का उद्देश्य साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना करना, कनिष्ठ साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करना है। 33 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं और 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि का प्रशिक्षण दिया गया है।

गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) ने देश भर में 2 लाख से अधिक एनसीसी, एनएसएस और एनवाईकेएस के छात्रों को साइबर स्वच्छता प्रशिक्षण प्रदान किया।

आई4सी ने छात्रों को साइबर अपराध की रोकथाम के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से 'किशोरों/ शिक्षार्थियों के लिए हैंडबुक' और महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए 'महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक' जारी की हैं।

सरकार सूचना सुरक्षा में मानव संसाधन निर्माण करने और आम जनता के बीच साइबर स्वच्छता और साइबर सुरक्षा के कई पहलुओं के बारे में सामान्य जागरूकता पैदा करने के लिए 'सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (आईएसईए)' नामक एक परियोजना लागू कर रही है।

यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में श्री प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एमएम


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