Amar Ujala Ltd

09/10/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/09/2026 20:07

चीन का दबदबा: मालदीव ने भारत की जगह चीन को दिया थिलाफुशी पोर्ट का ठेका, कहा- संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा

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चीन का दबदबा: मालदीव ने भारत की जगह चीन को दिया थिलाफुशी पोर्ट का ठेका, कहा- संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा

Thu, 10 Sep 2026 06:31 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, माले
अमर उजाला नेटवर्क, माले Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 10 Sep 2026 06:31 AM IST
सार

मालदीव में चीन का दबदबा बढ़ राह है और उसका उदाहरण है कि मालदीव ने अपने थिलाफुशी बंदरगाह का ठेका एक चीनी कंपनी को दे दिया है। इसे भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि थिलाफुशी बंदरगाह का नियंत्रण लेने के लिए भारत ने भी मालदीव के साथ बातचीत की थी।

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मालदीव के बंदरगाह को लेकर विवाद - फोटो : एक्स
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विस्तार

मालदीव ने थिलाफुशी में बन रहे नए अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का ठेका चीनी कंपनी को दिए जाने पर उठ रहे सवालों के बीच बुधवार को साफ किया कि किसी विदेशी साझेदार को दूसरे पर तरजीह नहीं दी गई है। सरकार ने कहा कि पोर्ट का विकास, स्वामित्व और संचालन पूरी तरह मालदीव सरकार के नियंत्रण में रहेगा। थिलाफुशी पोर्ट परियोजना के पहले चरण का काम चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी (सीएचईसी) को दिया गया है। परियोजना का उद्देश्य मौजूदा माले कमर्शियल हार्बर पर बढ़ते दबाव और जाम को कम करना तथा देश के लिए आधुनिक व बड़े पैमाने का वाणिज्यिक बंदरगाह तैयार करना है। मालदीव सरकार ने कहा, ठेका किसी विदेशी कंपनी को दिया जा सकता है, लेकिन बंदरगाह पर मालिकाना हक और अंतिम नियंत्रण मालदीव का ही रहेगा।
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मालदीव सरकार ने क्या कहा?
मालदीव के आर्थिक विकास, परिवहन एवं व्यापार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि थिलाफुशी पोर्ट परियोजना के लिए ठेका सरकार की तय प्रक्रिया और मालदीव के कानून के तहत दिया गया है। फैसला देश की दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है और इसे किसी अंतरराष्ट्रीय साझेदार के प्रति रुख में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मालदीव के मुताबिक, नया पोर्ट अंतरराष्ट्रीय कार्गो के साथ-साथ घरेलू माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स के लिए भी अहम भूमिका निभाएगा। मौजूदा योजना के तहत माले के वाणिज्यिक बंदरगाह की बड़ी गतिविधियों को भविष्य में थिलाफुशी स्थानांतरित किया जाना है।
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किसी विदेशी कंपनी का मालिकाना हक नहीं
मंत्रालय ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि मालदीव की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा। किसी भी विदेशी साझेदार का मालदीव के बुनियादी ढांचे से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया पर वही अधिकार होगा, जिसकी अनुमति कानून और राष्ट्रीय हित देते हैं। आर्थिक विकास एवं व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद ने कहा कि थिलाफुशी पोर्ट मालदीव के लोगों और देश की दीर्घकालिक समृद्धि के लिए बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजना का ठेका किसी साझेदार के खिलाफ फैसला नहीं है और मालदीव सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है।
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भारत के साथ भी जुड़ा है पोर्ट प्रोजेक्ट
थिलाफुशी पोर्ट को लेकर भारत और मालदीव के बीच पहले भी सहयोग की चर्चा रही है। 2024 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने माले के बंदरगाह को थिलाफुशी स्थानांतरित करने और नए पोर्ट के विकास में सहयोग की योजना की घोषणा की थी। बाद में पहले चरण का काम चीनी कंपनी सीएचईसी को दिए जाने की खबर सामने आई। इस फैसले को लेकर रणनीतिक हलकों में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सवाल उठे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि थिलाफुशी हिंद महासागर क्षेत्र में मालदीव के प्रमुख समुद्री ढांचे का हिस्सा बनने जा रहा है।

माले पोर्ट का दबाव होगा कम
मालदीव सरकार का कहना है कि थिलाफुशी में नया पोर्ट बनने से माले के मौजूदा वाणिज्यिक बंदरगाह पर दबाव कम होगा। परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल, घरेलू कार्गो सुविधाएं, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा ढांचा विकसित किया जाना है। सरकार की योजना के मुताबिक, नए पोर्ट को नवंबर 2027 तक परिचालन में लाने का लक्ष्य है।

Amar Ujala Ltd published this content on September 10, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 10, 2026 at 02:07 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]