02/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/20/2026 08:57
इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन-2026 में दिए गए नए मुख्य भाषणों ने आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस की नींव, सुशासन और वैश्विक प्रसार पर ध्यान केंद्रित किया है। इसमेन इस बात पर जोर दिया गया है कि एआई की क्षमता एल्गोरिदम के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और सहयोग पर भी उतनी ही निर्भर है।
वर्टिव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जियोर्डानो अल्बर्टाज़ी ने एआई के भौतिक आधार को स्पष्ट करते हुए, इस बात पर ज़ोर दिया कि एआई पर चर्चा केवल सॉफ़्टवेयर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जब हम एआई की बात करते हैं, तो हमें डेटा केंद्रों की भी बात करनी चाहिए, जो वास्तव में एआई को संभव बनाने वाला भौतिक हिस्सा है।" एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "यदि एआई मस्तिष्क है, तो अवसंरचना शरीर है। एआई की वर्तमान मांग के अनुसार गति, पैमाने और सघनता को बनाए रखने के लिए सब कुछ एक एकीकृत प्रणाली के रूप में व्यवस्थित, परस्पर संचालित और इंजीनियर किया जाना चाहिए।" उनके इस कथन ने एआई की तीव्र वृद्धि को बनाए रखने में बिजली, शीतलन और एकीकृत प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया।
स्विट्जरलैंड के संघीय संचार कार्यालय (ओएफसीओएम) के राजदूत और उप-निदेशक थॉमस श्नाइडर ने वैश्विक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ते हुए, घोषणा की कि जिनेवा वर्ष 2027 में अगले एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल दिखावा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने में सार्थक योगदान देना है कि मानवता एआई की अभूतपूर्व और परिवर्तनकारी क्षमता का उपयोग भलाई के लिए करे, न कि हानि के लिए।" उन्होंने कहा कि एआई को "सभी लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना चाहिए, न कि कम करना चाहिए," इस प्रकार मानवीय गरिमा, शांति और व्यावहारिक बहुपक्षीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना चाहिए।
वैश्विक इंटरनेट अवसंरचना के परिप्रेक्ष्य से, क्लाउडफ्लेयर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथ्यू प्रिंस ने एआई तक सर्वव्यापी पहुंच का समर्थन किया। इतिहास पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, "प्रिंटिंग प्रेस की तरह, जिसकी शुरुआत जर्मनी में हुई और जो बिना किसी केंद्रीय नियंत्रण के तेज़ी से पूरे यूरोप में फैल गया, एआई को भी कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एआई को रचनाकारों, छोटे व्यवसायों और विविध संस्कृतियों को सशक्त बनाना चाहिए, न कि उन्हें एकरूप बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, "एआई को हमारी मानवता को खत्म नहीं करना चाहिए; बल्कि इसे गति देनी चाहिए और इसे बढ़ाना चाहिए, यह तकनीक सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए, न कि केवल धनी लोगों के लिए।"
सत्र के समापन पर, एसईबी और साब के अध्यक्ष मार्कस वालेंबर्ग ने भारत के नेतृत्व के इस महत्वपूर्ण क्षण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन का आयोजन करके भारत ने अपने पिछले परिवर्तनकारी प्रयासों के समान "राष्ट्रीय संकल्प और उद्योग समन्वय" का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे एआई विभिन्न उद्योगों में फैलेगा, यह न केवल प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा बल्कि पूरी तरह से नए व्यावसायिक मॉडल और सामाजिक परिणाम भी सामने लाएगा।" उन्होंने वैश्विक प्रभाव के लिए एआई को व्यापक स्तर पर लागू करने में भारत के विशाल प्रतिभा आधार और मजबूत आईटी इकोसिस्टम को प्रमुख लाभ बताया।
सभी भाषणों में कुल मिलाकर इस बात पर जोर दिया गया कि एआई का अगला अध्याय न केवल मॉडलों में नवाचार से परिभाषित होगा, बल्कि सुगम बुनियादी ढांचे, समावेशी शासन, खुली पहुंच और सीमा पार सहयोग से भी परिभाषित होगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि एआई की परिवर्तनकारी शक्ति टिकाऊ और व्यापक रूप से साझा की जाए।
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