09/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/17/2026 11:29
प्रविष्टि तिथि: 17 SEP 2026 12:08PM by PIB Delhi
|
सेमीकॉन 1.0 के सफल कार्यान्वयन को ध्यान में रखते हुए, केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2026 को 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी। पहले चरण में भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकोसिस्टम की नींव रखी, वहीं सेमीकॉन 2.0 छह रणनीतिक स्तंभों के जरिये अगले चरण को आगे बढ़ा रहा है। इनमें अनुसंधान एवं विकास, चिप डिजाइन, मशीनरी एवं सामग्री, अधिक फैब की स्थापना, प्रतिभा विकास तथा एटीएमपी/ओएसएटी उद्योग को और मजबूत करना शामिल है। यह भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में स्थापित करने तथा विकसित भारत की कल्पना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
|
परिप्रेक्ष्य निर्धारण
सेमीकंडक्टर आधुनिक प्रौद्योगिकी के आधारभूत घटक और आर्थिक शक्ति की नींव हैं। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), दूरसंचार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा और उन्नत विनिर्माण को शक्ति प्रदान करते हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), 5जी/6जी, डेटा सेंटर और स्वायत्त वाहनों जैसी प्रौद्योगिकियाँ भी चिप्स की मांग को लगातार बढ़ा रही हैं। इनकी उपलब्धता और तकनीकी क्षमताएँ नवाचार, प्रतिस्पर्धात्मकता और राष्ट्रीय तकनीकी सामर्थ्य बढ़ाएंगी।
सेमीकंडक्टर के बढ़ते महत्व का प्रतिबिंब वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार के तेजी से विस्तार में भी दिखाई देता है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में 6.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई। अगले 5-10 वर्षों में इसके 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, हाल के व्यवधानों ने परस्पर सम्बंधित ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चैन की कमजोरियों को उजागर किया है। भू-राजनीतिक तनावों ने आपूर्ति पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों को भी और स्पष्ट किया है। इसलिए, प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ अपने तकनीकी और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं।
भारत में भी सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2030 तक इसके 110 अरब अमेरिकी डॉलर और वित्त वर्ष 2035 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है, जबकि घरेलू विनिर्माण अभी प्रारंभिक अवस्था में है। भारत ने वित्त वर्ष 2017 से वित्त वर्ष 2025 के दौरान सेमीकंडक्टर उत्पादों के आयात पर लगभग 150 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए। इस अवधि में आयात में 23 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो वर्ष 2035 तक वार्षिक आयात 240 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इसलिए, एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण तत्काल राष्ट्रीय प्राथमिकता है। सरकार आत्मनिर्भरता, सुरक्षा, कौशल और तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता को आगे बढ़ाने के लिए इस इकोसिस्टम को मजबूत कर रही है।
|
सेमीकॉन 2026: भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को गति प्रदान करना
सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का मूल आधार हैं। इसलिए, एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण तकनीकी सुदृढ़ता, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक है। इस रणनीतिक महत्व को पहचानते हुए, सरकार नीतिगत सहयोग, बुनियादी ढाँचे और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत कर रही है। इन प्रयासों के तहत, "सिलिकॉन टू सिस्टम्स : बिल्डिंग द इकोसिस्टम" विषय पर आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितबर 2026 को यशोभूमि, नई दिल्ली में किया। 17 से 19 सितम्बर 2026 तक आयोजित सेमीकॉन 2026 में वैश्विक उद्योग जगत के प्रमुख नेता, नीति-निर्माता, निवेशक, शिक्षाविद् और स्टार्ट-अप एक मंच पर एकत्रित हो रहे हैं। यह भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
|
सेमीकंडक्टर क्या है?
सेमीकंडक्टर एक ऐसी सामग्री है जिसकी विद्युत चालकता को नियंत्रित किया जा सकता है। तांबे जैसे चालक विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित होने देते हैं, जबकि कुचालक इसका प्रबल प्रतिरोध करते हैं। सेमीकंडक्टर सामग्रियों को इस प्रकार तैयार किया जा सकता है कि वे विद्युत संकेतों को स्विच, प्रवर्धित, संवेदित या नियंत्रित कर सकें। ट्रांजिस्टर एक सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक स्विच होता है। आधुनिक इंटीग्रेटेड सर्किट एक छोटी-सी चिप पर लाखों या अरबों ट्रांजिस्टर तथा अन्य घटकों को समाहित करते हैं। इनका समन्वित स्विचिंग कंप्यूटिंग, संचार, संवेदन, मेमोरी और विद्युत शक्ति प्रबंधन को संभव बनाता है।
अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सेमीकंडक्टर पर निर्भर करते हैं। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल, रक्षा प्रणालियाँ, उपग्रह और डेटा सेंटर सेमीकंडक्टर-आधारित घटकों का उपयोग करते हैं। सरल शब्दों में, सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के आधारभूत घटक हैं।
सिलिकॉन से सेमीकंडक्टर चिप तक
सिलिकॉन सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली सेमीकंडक्टर सामग्री है। इसे सिलिका से प्राप्त किया जाता है, जो रेत में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। चिप निर्माण की शुरुआत अत्यधिक शुद्ध किए गए सिलिकॉन से होती है, जिसे बेलनाकार ठोस छड़ों के रूप में तैयार किया जाता है। इन ठोस छड़ों को पतले वेफर्स में काटकर पॉलिश किया जाता है। वेफर्स को फैब्रिकेशन संयंत्रों में सैकड़ों सावधानीपूर्वक नियंत्रित प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। इनमें डिपोजिशन, फोटोलिथोग्राफी, एचिंग और आयन इम्प्लांटेशन जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
इन सभी प्रक्रियाओं के सम्मिलित परिणामस्वरूप वे जटिल संरचनाएँ तैयार होती हैं, जो अरबों ट्रांजिस्टर और अन्य घटकों का निर्माण करती हैं। फोटोलिथोग्राफी के दौरान प्रकाश का उपयोग करके पैटर्न को वेफर पर स्थानांतरित किया जाता है। ये पैटर्न उन संरचनाओं को निर्धारित करते हैं, जो अंततः ट्रांजिस्टर, इंटरकनेक्ट और चिप के अन्य हिस्सों का निर्माण करते हैं। ट्रांजिस्टर चिप पर मौजूद सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक स्विच होते हैं, जो विद्युत धारा के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। जटिल इंटीग्रेटेड सर्किट बनाने के लिए इस प्रक्रिया को कई परतों में दोहराया जाता है।
इसके बाद तैयार सेमीकंडक्टर उपकरण असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) अथवा आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। पैकेजिंग चिप की सुरक्षा करती है और उसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों से जोड़ने में सक्षम बनाती है। टेस्टिंग यह सुनिश्चित करती है कि तैयार उपकरण आवश्यक प्रदर्शन और गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं।
सेमीकंडक्टर नोड को समझना
सेमीकंडक्टर नोड विनिर्माण प्रौद्योगिकी की एक पीढ़ी को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से, 90 एनएम, 45 एनएम और 28 एनएम जैसे लेबल कुछ विशिष्ट भौतिक आयामों को दर्शाते थे। आज, नोड के नाम मुख्य रूप से किसी प्रक्रिया प्रौद्योगिकी की पीढ़ी के लिए संक्षिप्त संकेत के रूप में उपयोग किए जाते हैं। छोटा नोड अधिक ट्रांजिस्टर घनत्व, बेहतर प्रदर्शन या कम ऊर्जा खपत को संभव बना सकता है, लेकिन इसका परिणाम सर्किट डिजाइन, सामग्रियों, पैकेजिंग और इच्छित अनुप्रयोग पर भी निर्भर करता है। उन्नत नोड विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और अत्याधुनिक प्रोसेसर को सक्षम बनाते हैं। वहीं, परिपक्व नोड ऑटोमोबाइल, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, विद्युत प्रणालियों और अनेक उपभोक्ता उत्पादों के लिए आवश्यक बने हुए हैं। भारत अब स्थापित नोड से लेकर अधिक उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों तक क्षमताओं का विकास कर रहा है।
सेमीकंडक्टर क्यों: एक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य
सेमीकंडक्टर आर्थिक विकास, तकनीकी नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक संसाधन के रूप में उभरे हैं। आज ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अकेले ताइवान का वैश्विक चिप उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक और उन्नत चिप्स के उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा है। इस संकेंद्रण ने सुरक्षित, विविधीकृत और सुदृढ़ सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया है। भारत के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमताएँ केवल एक औद्योगिक अवसर से कहीं अधिक हैं। ये आयात पर निर्भरता कम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और उच्च-मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए आवश्यक हैं। ये तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूत कर सकती हैं और रणनीतिक क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की कमजोरियों को कम कर सकती हैं। कोई भी एक देश संपूर्ण सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को नियंत्रित नहीं करता। विभिन्न अर्थव्यवस्थाएँ चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, उपकरण, सामग्री, मेमोरी और पैकेजिंग के क्षेत्रों में अग्रणी हैं। इस विशेषज्ञता ने दक्षता में सुधार किया है, लेकिन इसके साथ आपूर्ति के संकेंद्रण का जोखिम भी पैदा होता है। इसलिए, भारत की नीति मजबूत घरेलू क्षमता के साथ-साथ विश्वसनीय साझेदारियों पर भी केन्द्रित है।
सेमीकंडक्टर भारत के रणनीतिक मिशनों को शक्ति प्रदान करते हैं
|
भारत का उभरता हुआ सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा रणनीतिक क्षमताओं के निर्माण से आगे बढ़कर एक व्यापक घरेलू इकोसिस्टम के सृजन तक विकसित हुई है। सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) जैसे शुरुआती संस्थानों ने इसकी आधारशिला रखी, जबकि हालिया नीतिगत हस्तक्षेपों ने निवेश, नवाचार और प्रतिभा विकास को गति प्रदान की है। इन प्रयासों से भारत को सेमीकंडक्टर की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में भागीदारी के लिए सक्षम बनाया जा रहा है।
सेमीकॉन 1.0: आधारशिला रखना
सरकार ने दिसम्बर 2021 में सेमीकॉन 1.0 को 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इसका उद्देश्य देश में घरेलू सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम स्थापित करना था। इस कार्यक्रम के तहत सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब स्थापित करने के लिए समर्पित योजनाएँ शुरू की गईं। इसके अलावा, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सिलिकॉन फोटोनिक्स, सेंसर और सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी सुविधाएँ स्थापित करने के लिए भी योजना शुरू की गई। साथ ही, डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना ने भारत की सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमताओं को मजबूत किया। इन सभी योजनाओं ने मिलकर चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और संबंधित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में आधार बनाया।
सेमीकॉन 1.0: प्रमुख उपलब्धियाँ
|
सेमीकॉन 2.0: संपूर्ण इकोसिस्टम का निर्माण
सेमीकॉन 1.0 द्वारा रखी गई आधारशिला पर आगे बढ़ते हुए, सरकार ने जुलाई 2026 में सेमीकॉन 2.0 को 1,27,500 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को निरंतर और दीर्घकालिक सहयोग प्रदान करना है। इसका लक्ष्य सेमीकॉन 1.0 के तहत विकसित क्षमताओं को और मजबूत करना तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास को गति देना है। सेमीकॉन 1.0 में मुख्य रूप से फैब और एटीएमपी/ओएसएटी संयंत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया गया था। सेमीकॉन 2.0 में मशीनरी एवं सामग्री, डिजाइन, अनुसंधान और प्रतिभा को भी इस मिशन में शामिल किया गया है। दोनों चरण मिलकर कच्ची सामग्री से लेकर तैयार चिप्स तक की श्रृंखला के प्रत्येक चरण को शामिल करते हैं।
प्रमुख सहायक नीतिगत इकोसिस्टम [1]
भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी महत्वाकांक्षाओं को विनिर्माण, बुनियादी ढाँचे, निवेश, अनुसंधान और प्रतिभा विकास को समाहित करने वाले एक प्रगतिशील नीतिगत इकोसिस्टम का समर्थन प्राप्त है। इन उपायों ने इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला को लगातार मजबूत किया है और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आधारशिला तैयार की है।
· राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति (एनपीई) 2019 - इसने इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) के लिए व्यापक ढाँचा स्थापित किया, जिसमें चिपसेट जैसे प्रमुख घटक भी शामिल हैं।
ये पहल एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए आवश्यक औद्योगिक आधार, बाजार मांग और निवेश वातावरण तैयार कर रही हैं। ये प्रमुख सेमीकंडक्टर पहलों को पूरक समर्थन प्रदान करती हैं और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर केन्द्र बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाती हैं।
उन्नत एवं आत्मनिर्भर भारत की ओर
भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा ने बहुत कम समय में तेजी से प्रगति की है। वर्ष 2021 में देश में कोई वाणिज्यिक चिप संयंत्र नहीं था। वर्ष 2026 तक 12 इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है और पाँच इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है। सैकड़ों कॉलेजों के विद्यार्थी अब चिप डिजाइन कर रहे हैं। सेमीकॉन 2.0 इस यात्रा का स्वाभाविक अगला अध्याय है। यह नए सिरे से शुरुआत नहीं करता, बल्कि एक कार्यशील इकोसिस्टम को पूर्णता प्रदान करता है। फैब और पैकेजिंग के साथ अब मशीनरी, सामग्री, डिजाइन, अनुसंधान और प्रतिभा भी इसमें शामिल हो गए हैं। आगे की राह चुनौतीपूर्ण है। चिप विनिर्माण दुनिया के सबसे जटिल उद्योगों में से एक है। इसके लिए धैर्य, सटीकता और निरंतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता होती है। सेमीकॉन 2.0 लंबे समय के लिए यह सहयोग प्रदान करता है। नागरिकों के लिए इसका लाभ भले ही प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न दे, लेकिन यह वास्तविक होगा। उपकरणों का अधिक व्यापक विनिर्माण भारत में ही किया जाएगा। महत्वपूर्ण प्रणालियाँ दूरस्थ आपूर्ति श्रृंखलाओं पर कम निर्भर होंगी। युवा इंजीनियरों को अपने घर के करीब उच्च-मूल्य वाले रोजगार के अवसर मिलेंगे। एक छोटी-सी चिप अपने भीतर एक बड़ा वादा समेटे हुए है। भारत ने इसे देश में ही बनाने का संकल्प लिया है।
संदर्भ
इलैक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन
सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला
केन्द्रीय मंत्रिमंडल
पत्र सूचना कार्यालय (फैक्टशीट्स और बैकग्राउंडर्स)
नीति आयोग
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास
केन्द्रीय इलैक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
भारत सेमीकंडक्टर के भविष्य का निर्माण कर रहा है
******
पीआईबी रिसर्च
पीके/केसी/केपी
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Bengali , Bengali-TR , Gujarati