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09/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/07/2026 10:23

'बंगाली लोग जो चाहें, वो खाएंगे': बाबा बागेश्वर की मांस छोड़ने की अपील खारिज, समिक भट्टाचार्य ने और क्या कहा

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'बंगाली लोग जो चाहें, वो खाएंगे': बाबा बागेश्वर की मांस छोड़ने की अपील खारिज, समिक भट्टाचार्य ने और क्या कहा?

Mon, 07 Sep 2026 09:45 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Mon, 07 Sep 2026 09:45 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ने की धीरेंद्र शास्त्री की अपील को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाला कोई धार्मिक व्यक्ति बंगाल के लोगों के खान-पान और पहनावे का फैसला नहीं कर सकता।

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दुर्गा पूजा में मांसाहार पर धीरेंद्र शास्त्री की अपील खारिज - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को धर्मगुरु धीरेंद्र शास्त्री की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों से मांसाहारी भोजन छोड़ने को कहा था। भट्टाचार्य ने कहा कि बाहर से आने वाला कोई धार्मिक व्यक्ति बंगाल के लोगों को यह तय नहीं कर सकता कि उन्हें क्या खाना या पहनना चाहिए।
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बागेश्वर बाबा के नाम से चर्चित धीरेंद्र शास्त्री ने त्योहार के दौरान मांसाहारी भोजन करने वालों को पाखंडी बताते हुए इसे छोड़ने की अपील की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि किसी बाहरी व्यक्ति के कहने पर बंगाल की खान-पान की आदतें और परंपराएं नहीं बदली जा सकतीं।
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धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर क्या बोले बंगाल के भाजपा अध्यक्ष?

समिक भट्टाचार्य ने कहा, "मुझे अपने तरीके से जीने दीजिए। बंगाली वही खाएंगे जो वे खाते आए हैं। क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते? स्वामी विवेकानंद ने यह बात कही है। उनसे ऊपर कौन है?" उन्होंने आगे कहा, "यहां मां काली को भोग के रूप में बकरे का मांस चढ़ाया जाता है।"
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अष्टमी पर लूची और नवमी पर बकरे का मांस खाना बंगाल की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है और लोगों से इसे छोड़ने के लिए कहने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा, "हम आम तौर पर अष्टमी पर लूची और नवमी पर बकरे का मांस खाते हैं। हम ऐसा करते रहेंगे। पश्चिम बंगाल के लोगों को यह कोई नहीं बता सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए।"

बंगाल में खान-पान की संस्कृति को लेकर क्यों भड़का विवाद?

शास्त्री की टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल में खान-पान, धर्म और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर बहस छिड़ गई है। राज्य में लंबे समय से भोजन और धार्मिक परंपराएं ऐसी विविधता के साथ साथ रही हैं, जो हमेशा पूरी तरह शाकाहारी धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं होती हैं।
  • यह विवाद शास्त्री के पश्चिम बंगाल दौरे के कुछ दिन बाद सामने आया है। उन्होंने राज्य में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन नहीं करने की अपील की थी और ऐसा भोजन करने वालों को पाखंडी बताया था।
  • शास्त्री का पश्चिम बंगाल दौरा राजनीतिक रंग भी ले चुका है। भाजपा सरकार के दौरान उन्हें राज्य में धार्मिक कार्यक्रम करने की अनुमति मिली, जबकि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय कथित तौर पर उन्हें अनुमति हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
  • हालांकि, भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने ऐसे किसी निर्देश से दूरी बना ली है, जिसे बंगाल की पारंपरिक खान-पान की आदतों को बदलने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

बंगाली समाज पर नहीं थोपे जा सकते निजी विचार : समिक भट्टाचार्य

भट्टाचार्य ने कहा कि वह धार्मिक व्यक्ति के तौर पर शास्त्री का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके निजी विचार बंगाली समाज पर थोपे नहीं जा सकते। उन्होंने कहा, "कोई संत या डॉक्टर लोगों को शाकाहारी बनने की सलाह दे सकता है। लेकिन बाहर से आने वाला कोई व्यक्ति बंगाल में बैठकर यह तय नहीं कर सकता कि कौन क्या खाएगा और कौन क्या पहनेगा।" भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि शास्त्री की टिप्पणी उनके निजी विचार हैं।

भाजपा नेता ने अपनी बात के समर्थन में स्वामी विवेकानंद और बंगाल की धार्मिक परंपराओं का जिक्र किया। उन्होंने राज्य के कई मंदिरों में देवी काली को बकरे का मांस चढ़ाने की परंपरा का भी हवाला दिया।

किसने बताया मांस को हिंदू धर्म का हिस्सा?

इस मुद्दे पर जाने-माने अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने बिना किसी का नाम लिए सोशल मीडिया पर लिखा, "मांस शाक्त हिंदू धर्म का मूल हिस्सा है। इसे प्राचीन परंपराओं के तहत मां दुर्गा और मां काली को चढ़ाया जाता है। दुर्गा पूजा में नवमी और दशमी पर भक्त जो प्रसाद खाते हैं, उसमें मांस होता है। इस पवित्र परंपरा में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

भट्टाचार्य ने दुर्गा पूजा से जुड़े एक अन्य विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। यह विवाद पश्चिम बंगाल सरकार के एक विज्ञापन को लेकर है, जिसमें देवी दुर्गा को 11 हाथों के साथ दिखाया गया था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विज्ञापन एजेंसी की "संभावित तकनीकी या छपाई की गलती" को राजनीतिक विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए और गलती को ठीक कर देना चाहिए।

हिंदुत्व के साथ बंगाली सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा भाजपा के लिए क्यों चुनौती?

ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे के साथ बंगाली सांस्कृतिक पहचान को जोड़कर पश्चिम बंगाल में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में पार्टी के लिए दोनों मुद्दों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।

भट्टाचार्य के बयान से धार्मिक आस्था और बंगाल की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं के बीच अंतर करने की भाजपा की प्रदेश इकाई की कोशिश दिखाई देती है। साथ ही यह संकेत भी मिलता है कि प्रदेश नेतृत्व राज्य के लोगों के खान-पान को लेकर किसी तरह के व्यापक निर्देश का समर्थन नहीं करता।

शास्त्री की टिप्पणी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक पुराने सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है कि क्या धार्मिक मान्यताओं के आधार पर लोगों के निजी खान-पान के फैसले तय किए जाने चाहिए और धार्मिक हस्तियों की ओर से सांस्कृतिक परंपराओं के लिए किस हद तक निर्देश दिए जाने चाहिए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया से पश्चिम बंगाल भाजपा ने दुर्गा पूजा के दौरान लोगों के लिए शाकाहार को अनिवार्य करने वाले किसी भी व्यापक निर्देश के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 07, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 07, 2026 at 16:23 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]